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कारगिल युद्ध 20 जून 1999 लेफ्टिनेंट कर्नल योगेश कुमार जोशी

—— शौर्य दिवस -शौर्यनमन—–
लेफ्टिनेंट कर्नल योगेश कुमार जोशी
वीर चक्र
यूनिट – 13 जेएके राइफल्स
पॉइंट 5140 का संग्राम
ऑपरेशन विजय
कारगिल युद्ध 1999
लेफ्टिनेंट कर्नल योगेश कुमार जोशी का जन्म 5 जनवरी 1962 को हुआ था। 12 जून 1982 को उन्हें भारतीय सेना की जम्मू एंड कश्मीर राइफल्स रेजिमेंट की 13 बटालियन में सैकिंड लेफ्टिनेंट के रूप में कमीशन प्राप्त हुआ था। वर्ष 1999 तक वह लेफ्टिनेंट कर्नल के पद पर पदोन्नत हो गए थे। कारगिल युद्ध के समय वह इसी बटालियन की कमान संभाल रहे थे।
ऑपरेशन विजय में, 12-13 जून 1999 की रात्रि में तोलोलिंग चोटी पर भारतीय सेना का अधिकार होने के पश्चात शत्रु पीछे हटकर तोलोलिंग रिजलाइन की सबसे ऊंची चोटी पॉइंट 5140 पर समेकित हो गया। साथ ही, शत्रु टाईगर हिल से द्रास घाटी में हमारे सैन्य संसाधनों और श्रीनगर-लेह राजमार्ग संख्या 1 पर प्रत्यक्ष गोला वृष्टि करके सैन्य वाहनों को क्षति पहुंचा रहा था।
टाईगर हिल पर आक्रमण करने से पूर्व पॉइंट 5140 को सुरक्षित करना अत्यावश्यक हो गया था। अतः 56 माउंटेन ब्रिगेड की कमान में 13 जेएके राइफल्स बटालियन, 18 गढ़वाल बटालियन और 1 नागा बटालियन को तीन भिन्न-भिन्न दिशाओं से दुर्गम और कठिन चढ़ाई के पॉइंट 5140 पर आक्रमण करने का कार्य सौंपा गया था।
“ऑपरेशन विजय” में 13 जम्मू एंड कश्मीर राइफल्स के कमांडिंग ऑफिसर लेफ्टिनेंट कर्नल योगेश कुमार जोशी को द्रास सेक्टर में रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण पॉइंट 5140 पर अधिकार करने का कार्य सौंपा गया था। लेफ्टिनेंट कर्नल जोशी ने इस सामरिक रूप से प्रभावी स्थिति पर, आकस्मिक पहुंचने और शत्रु पर मनोवैज्ञानिक प्रभुत्व पाने की समन्वित कार्रवाई के लिए अति चातुर्यपूर्ण योजना की परिकल्पना की। आक्रमण से पूर्व उन्होंने सभी प्रारंभिक कार्रवाइयों का व्यक्तिगत रूप से पर्यवेक्षण भी किया।
20 जून 1999 को हुए आक्रमण में, लेफ्टिनेंट कर्नल जोशी अपने कंपनी कमांडरों को प्रेरित करते रहे और अपनी व्यक्तिगत सुरक्षा की घोर उपेक्षा करते हुए वे स्वयं भी आगे बढ़ते रहे। असाधारण सूझबूझ प्रदर्शित करते हुए, उन्होंने युद्ध की परिवर्तित होती परिस्थितियों का सर्वाधिक सक्षम रूप से प्रत्युत्तर दिया।
लेफ्टिनेंट कर्नल जोशी का, आगे हो कर नेतृत्व करना और युद्ध में भली-भांति से आगे रहना, उनसे संलग्न सैनिकों के मनोबल को बढ़ाने वाला था। उनसे प्रेरणा लेते हुए, आक्रमण करने वाली कंपनियों ने भीषण बाधाओं, ऊबड़-खाबड़ क्षेत्र को लांघ लिया और शत्रु के फायर में निकट से आक्रमण कर पॉइंट 5140 के महत्वपूर्ण शिखर पर अधिकार कर लिया।
लेफ्टिनेंट कर्नल जोशी ने अनुकरणीय नेतृत्व, उत्कृष्ट कमान और नियंत्रण तथा कर्तव्य से परे वीरता का प्रदर्शन किया, जिससे छः शत्रु घुसपैठियों को मार दिया गया और द्रास सेक्टर में रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण पॉइंट 5140 पर पुनः अधिकार कर लिया गया। उन्हें “वीर चक्र” से सम्मानित किया गया।
उन्होंने ऑपरेशन विजय (कारगिल) और ऑपरेशन पराक्रम में 13 JAK राइफल्स बटालियन की कमान संभाली थी। उनकी कमान में ऑपरेशन विजय में, बटालियन को कुल 37 वीरता पुरस्कारों से सम्मानित किया गया था, जिसमें दो परमवीर चक्र, आठ वीर चक्र और 14 सेना मेडल सम्मिलित हैं। वह “ऑपरेशन विजय” और “ऑपरेशन स्नो लेपर्ड” में भारतीय सफलता का रूप रहे हैं। वह लेफ्टिनेंट जनरल के रूप में सेवानिवृत्त हुए।
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