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Kargil story

कारगिल युद्ध 7 जून 1999

—— बलिदान दिवस -शौर्यनमन—–
सिग्नलमैन एकनाथ चैत्राम खैरनार
सिग्नलमैन मानस रंजन साहू
यूनिट – 8 माउंटेन डिविजन/सिग्नल रेजिमेंट
(8 MDSR)
द्रास सेक्टर का युद्ध
ऑपरेशन विजय
कारगिल युद्ध 1999
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सिग्नलमैन एकनाथ चैत्राम खैरनार
6932439N
01-06-1968 – 07-06-1999
सेना मेडल (मरणोपरांत)
वीरांगना – श्रीमती रेखा खैरनार
सिग्नलमैन एकनाथ चैत्राम खैरनार का जन्म 1 जून 1968 को महाराष्ट्र के नासिक जिले की मालेगांव तहसील के देवघाट गांव में हुआ था। शिक्षा पूर्ण करने के पश्चात 22 फरवरी 1991 को वह भारतीय सेना की कॉर्प्स ऑफ सिग्नल्स में रंगरूट के रूप में भर्ती हुए थे। प्रशिक्षण के पश्चात उन्हें सिग्नलमैन के पद पर नियुक्त किया गया। 18 मार्च 1995 को उनका विवाह सुश्री रेखा से हुआ था। 26 नवंबर 1998 को उनके परिवार में पुत्र गोवर्धन का जन्म हुआ था।
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सिग्नलमैन मानस रंजन साहू
15666968P
सेना मेडल (मरणोपरांत)
सिग्नलमैन मानस रंजन साहू उड़ीसा के अंगुल जिले के अंगुल नगर के निवासी थे। शिक्षा पूर्ण करने के पश्चात वह भारतीय सेना के कॉर्प्स ऑफ सिग्नल्स में रंगरूट के रूप में भर्ती हुए। उन्होंने गोवा में अपना प्रारंभिक प्रशिक्षण पूरा किया और उन्हें सक्रिय सेवा में सिग्नलमैन के पद पर आए केवल 3 माह ही हुए थे।
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वर्ष 1999 में सिग्नलमैन एकनाथ चैत्राम खैरनार व सिग्नलमैन मानस रंजन साहू 8 माउंटेन डिविजन सिग्नल रेजिमेंट के साथ सेवारत थे। 29 मई 1999 को कर्नल सुधीर भटनागर की कमान में इस रेजिमेंट को “ऑपरेशन विजय” में भाग लेने के लिए तैनात किया गया था। सिग्नलमैन खैरनार व सिग्नलमैन साहू की रेजिमेंट को द्रास सेक्टर में मतायिन स्थित डिवीजन मुख्यालय पर संचालन का उत्तरदायित्व दिया गया था।
7 जून 1999 को, सिग्नलमैन खैरनार को, सिग्नलमैन साहू के साथ द्रास सेक्टर में एक स्थान पर आक्रमण करने वाली एक इंफेट्री बटालियन को रेडियो संचार प्रदान करने का कार्य सौंपा गया था। इस आक्रमणकारी टुकड़ी को दिए गए लक्ष्य को शत्रु ने सुदृढ़ रक्षित किया हुआ था। भारतीय आक्रमण की आशंका देखते हुए शत्रु ने तोपों से प्रचंड गोला वृष्टि आरंभ कर दी। शत्रु की भयानक गोला वृष्टि में भी इंफेंट्री के सैनिक अपने लक्ष्य की ओर आगे बढ़ते रहे।
सिग्नलमैन खैरनार व सिग्नलमैन साहू को इस आक्रमणकारी टुकड़ी के साथ महत्वपूर्ण संचार संपर्क प्रदान करने का कार्य दिया गया था। जब ये आक्रमणकारी सैनिक धीरे-धीरे अपने लक्ष्य की ओर बढ़ रहे थे, उसी समय शत्रु तोपों से हुई हुई गोला वृष्टि से सिग्नलमैन खैरनार व सिग्नलमैन साहू को घातक रूप से गोले के टुकड़े (SPLINTERS) लगे और वे वीरगति को प्राप्त हो गए।
सिग्नलमैन एकनाथ चैत्राम खैरनार व सिग्नलमैन मानस रंजन साहू को उनके अदम्य साहस, कर्तव्य के प्रति समर्पण और सर्वोच्च बलिदान के लिए मरणोपरांत “सेना मेडल” से सम्मानित किया गया।
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