—— बलिदान दिवस -शौर्यनमन—–
मेजर भुकांत मिश्रा
IC22479
15-06-1941 – 07-06-1984
वीरांगना – श्रीमती मीना देवी
अशोक चक्र (मरणोपरांत)
यूनिट – 15 कुमाऊं रेजिमेंट
ऑपरेशन ब्लू स्टार
मेजर भुकांत मिश्रा का जन्म 15 जून 1941 को उत्तर प्रदेश के आगरा जिले के नौबस्ता तालीपारा गांव में श्री बी. एल. मिश्रा के घर में हुआ था। 4 अप्रैल 1970 को उन्हें भारतीय सेना की कुमाऊं रेजिमेंट की 15 वीं बटालियन में सैकिंड लेफ्टिनेंट के रूप में कमीशन प्राप्त हुआ था। अपनी बटालियन में सेवाएं देते हुए वह मेजर के पद पर पदोन्नत हो गए थे।
वर्ष 1984 में पंजाब में आतंकवाद चरम पर पहुंच गया था। खालिस्तानी आतंकवादियों ने पवित्र स्वर्ण मंदिर परिसर पर अधिकार कर लिया था और वहां सुदृढ़ रक्षण कर उसे अपना मुख्यालय बना लिया था। अंततः स्वर्ण मंदिर परिसर पर नियंत्रण स्थापित करने और परिसर को मुक्त कराने के लिए 1 जून 1984 से 8 जून 1984 तक भारतीय सेना द्वारा ‘ऑपरेशन ब्लू स्टार’ चलाया गया था।
7 जून 1984 को, मेजर भुकांत मिश्रा के नेतृत्व में, 15 कुमाऊं बटालियन की एक कंपनी को स्वर्ण मंदिर परिसर को रिक्त कराने का कार्य सौंपा गया था। मंदिर परिसर अति सुदृढ़ रक्षित था और इसे अभेद्य गढ़ में परिवर्तित कर दिया गया था। इससे पूर्व 6/7 जून की रात्रि में भवन को रिक्त कराने के प्रयासों में अनेक सैनिक हताहत हुए थे। प्रातः 4:40 बजे मेजर भुकांत मिश्रा के नेतृत्व में कंपनी एक बख्तरबंद सैन्य वाहन के पीछे आगे बढ़ी, जो शीघ्र ही टैंक रोधी बंदूकों की फायरिंग में घिर गई।
उसी समय कंपनी पर प्रचंड फायरिंग हुई और अग्रणी प्लाटून के जेसीओ सहित आठ सैनिक हताहत हो गए। अग्रणी प्लाटून में कमान और नियंत्रण की क्षति को देख कर चारों ओर से हो रहे भयानक फायर को अनदेखा करते हुए मेजर भुकांत मिश्रा आगे बढ़े और शीघ्र ही कमान और नियंत्रण स्थापित कर लिया। दो कंपनियों को अगले दिन 7 जून 1984 की प्रातः 5:30 बजे आरंभ किया गया। दोनों कंपनियां दिए गए समय पर आगे बढ़ीं, किंतु शीघ्र ही वे भीषण फायर में घिर गईं।
मेजर भुकांत मिश्रा की कंपनी को पुनः गंभीर क्षति हुई और कंपनी का अग्रिम बाधित हो गया। ऐसी विकट स्थिति में मेजर भुकांत मिश्रा ने कंपनी की अगुवाई की। उन्होंने सैनिकों को अपने पीछे आने के लिए कहा और भवन के तलघर पर आक्रमण किया। मेजर भुकांत मिश्रा के इस साहसिक कार्य ने कंपनी को प्रेरित किया, सैनिक उनके पीछे दौड़ पड़े और कंपनी ने एक स्थान पर पांव रोप लिए।
तलघर के एक छिद्र से हो रही मशीन गन की फायरिंग कंपनी के आगे बढ़ने में भारी बाधा उत्पन्न कर रही थी। अपनी व्यक्तिगत सुरक्षा को अनदेखा कर , मेजर मिश्रा रेंगते हुए तलघर की ओर बढ़े, उन्होंने उस छिद्र में एक हथगोला फेंककर मशीन गन चालक दल को मार दिया और उस लाइट मशीन गन को शांत कर दिया।
लाइट मशीन गन को नष्ट करने के शीघ्र पश्चात, मेजर मिश्रा कॉम्प्लेक्स की ओर गई सीढ़ियों पर पहुंचे। जैसे ही वह कॉम्प्लेक्स में प्रवेश करने वाले थे, उसी समय उन्हें मीडियम मशीन गन से अनेक गोलियां लगी और वह वीरगति को प्राप्त हो गए।
इस पूर्ण ऑपरेशन में, मेजर भुकांत मिश्रा ने असाधारण साहस, असीम वीरता और उत्कृष्ट नेतृत्व कौशल का परिचय दिया। मेजर भुकांत मिश्रा को उनके अनुकरणीय नेतृत्व, प्रचंड वीरता एवं सर्वोच्च बलिदान के लिए मरणोपरांत “अशोक चक्र” से सम्मानित किया गया।
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