——-शौर्यनमन——-
श्री भूरे लाल का जन्म 20 मार्च, 1938 को ग्राम बजरंग गढ़, जिला गुना, मध्य प्रदेश में हुआ था। वे श्री नन्हू लाल के पुत्र थे। वे 20 जून, 1965 को मध्य प्रदेश पुलिस में भर्ती हुए और सात साल तक सेवारत रहे।
14/15 जुलाई, 1970 की रात को सूचना मिली की गुना जिले का कुख्यात डाकू नाहर सिंह अपने गिरोह के साथ गिड खो के जंगल में छिपा है। भूरे लाल ने इस सूचना की जांच का निर्णय किया और भारी जोखिम को उठाकर स्वयं जंगल में गए। यह सूचना सही साबित हुई और उन्होंने पुलिस को सूचित किया। पुलिस को घात की योजना बनाने में कुछ समय लगा अतः डाकुओं के दल की उपस्थिति की फिर से पुष्टि करना आवश्यक हो गया।
भूरे लाल आधी रात को अपनी मजल लोडिंग बंदूक को लेकर फिर जंगल में गए। व्यक्तिगत सुरक्षा की अनदेखी कर वे डाकुओं के बहुत निकट तक चले गए। नाहर सिंह ने उन्हें देख लिया और उन पर गोली चलाई। परन्तु सावधान और चुस्त भूरे लाल ने न केवल समय पर आड़ लेली अपितु उस पर जवाबी गोली भी चलाई। उनका निशाना इतना सही पड़ा कि डाकू वहीं ढेर हो गया। जब एक और सशस्त्र डाकू ने भागने का प्रयत्न किया तब श्री भूरे लाल ने उसका पीछा किया और उस पर झपट पड़े। इसी बीच पुलिस दल भी पहुंच गया और डाकू को पकड़ लिया गया।
चम्बल घाटी के सशस्त्र डाकुओं का मुकाबला करने में श्री भूरे लाल ने अनुकरणीय साहस और पराक्रम का प्रदर्शन किया। उन्हें अशोक चक्र प्रदान किया गया।#indianarmy #india #army #indianairforce #indiannavy #pulwama #galwan #freedomfighter #15august #26january #nationfirst #shauryanaman #shauryasaga #realheros #superheros
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