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कारगिल युद्ध 28 जून 1999 राइफलमैन अनुसुइया प्रसाद ध्यानी

—— बलिदान दिवस -शौर्यनमन—–
राइफलमैन अनुसुइया प्रसाद ध्यानी
10-06-1975 – 28-06-1999
वीर चक्र (मरणोपरांत)
वीरांगना – श्रीमती पिंकी देवी
यूनिट – 18 गढ़वाल राइफल्स
पॉइंट 4700 का संग्राम
ऑपरेशन विजय
कारगिल युद्ध 1999
राइफलमैन अनुसुइया प्रसाद का जन्म 10 जून 1975 को उत्तराखंड के पौड़़ी गढ़वाल में श्री शेखरानंद ध्यानी के घर में हुआ था। 12वीं तक की शिक्षा उत्तराखंड से प्राप्त करने के पश्चात उन्होंने दक्षिणी दिल्ली के देशबंधु कॉलेज से स्नातक किया। उनके परिवार में कोई भी सैन्य सेवा में नहीं था।
वर्ष 1995 में वह भारतीय सेना की गढ़वाल राइफल्स रेजिमेंट में रंगरूट के रूप में भर्ती हुए थे। प्रारंभिक प्रशिक्षण के पश्चात उन्हें 18 गढ़वाल बटालियन में राइफलमैन के पद पर नियुक्त किया गया था। मई 1999 में कारगिल में शत्रु की घुसपैठ उजागर होने पर 18 गढ़वाल राइफल्स बटालियन को भी युद्ध में तैनात किया गया था।
“ऑपरेशन विजय” में 28-29 जून 1999 की रात्रि में राइफलमैन अनुसुइया प्रसाद 18 गढ़वाल बटालियन की ‘चार्ली’ कंपनी के सदस्य थे, जिसे द्रास सेक्टर में पॉइंट 4700 पर एक चौकी पर अधिकार करने का कार्य सौंपा गया था। पॉइंट 4700 को शत्रु द्वारा आठ अस्थाई बंकरों (SANGARS) व स्वचालित शस्त्रों की फायरिंग से सुदृढ़ रक्षित किया गया था। जब आक्रमण आरंभ हुआ तो आक्रमण की दिशा में एक संगर से हो रही भारी स्वचालित फायरिंग के कारण अनेक प्रयासों के होते हुए भी यह कंपनी आगे नहीं बढ़ पा रही थी।
राइफलमैन अनुसुइया प्रसाद ने विशाल शिलाखंडों की आड़ लेते हुए और अपनी व्यक्तिगत सुरक्षा की पूर्णतः अवहेलना करते हुए उस संगर पर आक्रमण किया। शत्रु की भयानक फायरिंग होते हुए भी तीन घुसपैठियों के अन्वेषण के लिए, हथगोले फेंकते हुए वह संगर में प्रवेश कर गए। भीषण शारीरिक संघर्ष में उन्होंने दो शत्रु सैनिकों को गला काटकर मार दिया व एक को संगीन घोंपकर मार दिया। इस भीषण मुठभेड़ में राइफलमैन अनुसुइया प्रसाद को अनेक गोलियां लगीं। वह अंतिम श्वास तक संघर्ष करते हुए वीरगति को प्राप्त हुए थे।
राइफलमैन अनुसूइया प्रसाद ने शत्रु के समक्ष असाधारण साहस, विशिष्ट वीरता, सौहार्द की भावना और दृढ़ संकल्प का परिचय दिया और भारतीय सेना की सर्वोच्च परंपराओं में सर्वोच्च बलिदान दिया। उन्हें मरणोपरांत “वीर चक्र” से सम्मानित किया गया।
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