—— बलिदान दिवस -शौर्यनमन—–
सिपाही गज्जन सिंह
4406L
01-10-1923 – 8-06-1948
वीर चक्र (मरणोपरांत)
यूनिट – 1 पटियाला (RS)
भारत-पाक युद्ध 1947-48
सिपाही गज्जन सिंह का जन्म ब्रिटिश भारत में 1 अक्टूबर 1923 को संयुक्त पंजाब प्रांत में हुआ था। वह भारतीय सेना की 1 पटियाला (वर्तमान 15 पंजाब) रेजिमेंट में सेवारत थे।
8 जून 1948 को सिपाही गज्जन सिंह जोजिला दर्रे पर, 1 नंबर ब्रेन गनर थे। ड्यूटी करके आने के पश्चात, वह अपनी स्थिति से दूर थे, उसी समय शत्रु ने उनके पिकेट पर मीडियम मशीन गनों (MMG) और लाइट मशीन गनों (LMG) से प्रचंड फायरिंग आरंभ कर दी।
शत्रु की अति सटीक और निकट की फायरिंग में, अपनी ब्रेन गन संभालने के लिए, वह पिकेट की ओर दौड़ पड़े और उनके पैर में गोली लग गई। अपने घाव से अविचलित और अपनी ब्रेन लाइट मशीन गन तक पहुंचने के लिए दृढ़ संकल्पित सिपाही गज्जन सिंह अपनी व्यक्तिगत सुरक्षा की घोर उपेक्षा करते, शत्रु को पूर्ण रूप से दिखाई देते, रेंगते हुए आगे बढ़े।
अपनी ब्रेन गन तक पहुंच कर भी वह अपनी स्थिति से संतुष्ट नहीं थे और आगे रेंगते हुए अन्य स्थान की ओर बढ़ गए। आगे बढ़ते हुए पुनः उनके कंधे में गोली लगी, किंतु अपनी नव स्थिति से वह ब्रेन गन फायर कर शत्रु को घेरने में सफल हो गए।
अपने सटीक लक्ष्य भेदन से उन्होंने अल्पतम पांच शत्रु सैनिकों को मार दिया या घायल किया और शत्रु के आक्रमण को अस्थाई रूप से मंद कर दिया। किंतु इस चरण में उन्हें मीडियम मशीन गन से गोलियों की झड़ लगी और वह घातक रूप से घायल हो गए।
सिपाही गज्जन सिंह ने उत्कृष्ट प्रकृति के साहस, दृढ़ संकल्प और अमोघ भावना का परिचय दिया। उन्हें मरणोपरांत “वीर चक्र” से सम्मानित किया।
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