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शौर्य चक्र सिपाही धर्माराम बेनीवाल

—— बलिदान दिवस -शौर्यनमन—–
सिपाही धर्माराम बेनीवाल
21-12-1983 – 25-05-2015
शौर्य चक्र (मरणोपरांत)
वीरांगना – श्रीमती टीमू देवी
यूनिट – 1 राष्ट्रीय राइफल्स, 4 महार रेजिमेंट
आतंकवाद विरोधी अभियान
सिपाही धर्माराम बेनीवाल का जन्म 21 दिसंबर 1983 को राजस्थान के बाड़मेर जिले के तारातरा गांव में श्री गंगाराम बेनीवाल एवं श्रीमती अमरू देवी के परिवार में हुआ था। 23 जुलाई 2003 को वह भारतीय सेना की महार रेजिमेंट में रंगरूट के रूप में भर्ती हुए थे। प्रशिक्षण के पश्चात उन्हें4 महार बटालियन में नियुक्त किया गया था।
वर्ष 2007 में उनका विवाह हुआ था। कुछ वर्षों तक अपनी मूल बटालियन में सेवाएं देने के पश्चात उन्हें प्रतिनियुक्ति पर जम्मू-कश्मीर के आतंकवाद विरोधी अभियानों में 1 राष्ट्रीय राइफल्स बटालियन के साथ संलग्न किया गया था।
25 मई 2015 की अपरान्ह लगभग 12:30 बजे सिपाही धर्माराम कुलगाम जिले में अपने दल के साथ गश्त पर थे, उसी समय आकस्मिक एक घर से उनके दल पर फायरिंग हुई। सिपाही धर्माराम को पीठ और जांघ में दो गोलियां लगी। तो भी, उन्होंने रेंगते हुए एक सुरक्षित स्थान पर पहुंच कर स्थिति ले ली। इस मुठभेड़ के में एक आतंकवादी गोलियां चलाते हुए छत से कूदा।
अपने साथियों पर आसन्न संकट को देख कर अपनी व्यक्तिगत सुरक्षा की घोर उपेक्षा करते हुए सिपाही धर्माराम आड़ से बाहर आए और आतंकवादी के छत से भूमि पर पहुंचने के तक 30 गोलियां फायर कर उसे ढेर कर दिया। सिपाही धर्माराम ने की इस वीरतापूर्ण कार्रवाई से उनके 15 सहकर्मियों के प्राणों की रक्षा हुई। मारा गया आतंकवादी लश्कर-ऐ-तैयबा का जिला कमांडर व पुरस्कार घोषित दुर्दांत आतंकवादी अख्यात उल्लाह भट्ट था।
सिपाही धर्माराम घायल होते हुए भी, 10 मिनट तक सहकर्मियों से वार्ता करते रहे। इसके पश्चात उन्हें हेलिकॉप्टर से 5 किमी दूर बटालियन मुख्यालय पर ले जा कर उनका प्राथमिक उपचार किया गया, तत्पश्चात हेलिकॉप्टर से 92 बेस हॉस्पिटल, श्रीनगर ले जाया गया, जहां उपचार के समय वह वीरगति को प्राप्त हो गए।
28 मई 2015 को प्रातः 9:00 बजे तारातरा गांव में हजारों की संख्या में उपस्थित जनसमूह में पूर्ण सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया।
सिपाही धर्माराम को उनके अदम्य साहस, वीरता, सौहार्द की भावना एवं सर्वोच्च बलिदान के लिए वर्ष 2016 में महामहिम राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी द्वारा मरणोपरांत “शौर्य चक्र” सम्मान दिया गया। यह सम्मान वीरांगना श्रीमती टीमू देवी ने ग्रहण किया था। 21 दिसंबर 2017 को तारातरा गांव में उनकी मूर्ति का अनावरण किया गया।
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