—— बलिदान दिवस -शौर्यनमन—–
ग्रेनेडियर राजकुमार पूनिया
10-10-1976 – 24-05-1999
सेना मेडल (मरणोपरांत)
वीरांगना – श्रीमती सुमित्रा देवी
यूनिट – 18 ग्रेनेडियर्स रेजिमेंट
तोलोलिंग (पॉइंट 4590) का युद्ध
ऑपरेशन विजय
कारगिल युद्ध 1999
ग्रेनेडियर राजकुमार पूनिया का जन्म 10 अक्टूबर 1976 को राजस्थान के चूरू जिले की राजगढ़ तहसील के भैंसली गांव के एक किसान परिवार में श्री शुभराम पूनिया एवं श्रीमती चन्द्रो देवी के घर में हुआ था। तीन भाईयों और दो बहनों में छोटे राजकुमार बाल्यकाल से ही धुन के पक्के व गंभीर प्रकृति के थे।
18 वर्ष की आयु में 10 वीं कक्षा उत्तीर्ण करने के पश्चात उनमें और परिपक्वता आई तो उन्होंने सेना में भर्ती होने का निर्णय कर लिया। 24 अप्रैल 1994 को वह भारतीय सेना की ग्रेनेडियर्स रेजिमेंट में रंगरूट के रूप में भर्ती हुए थे। प्रशिक्षण के पश्चात उन्हें 18 ग्रेनेडियर्स बटालियन में ग्रेनिडियर के पद पर नियुक्त किया गया था।
उनकी प्रथम नियुक्ति राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले में हुई थी। 19 मई 1995 को उनका विवाह राजगढ़ क्षेत्र के बूढ़ावास गांव की सुश्री सुमित्रा से हुआ था। दिसंबर 1997 में उनके पुत्र सचिन का जन्म हुआ था। राजकुमार 6 फीट 2 इंच लंबे सुदर्शन, हंसमुख, अति साहसी एवं वीर सैनिक थे।
उनका साहसी स्वभाव माँ चन्द्रो देवी को भयभीत करता था, राजकुमार उनसे कहते कि “मेरे लिए जो गोली निर्मित हुई है, वह मेरे प्राण लेगी ही, तब कोई मेरी सहायता नहीं कर पाएगा…” इससे लगता है कि कदाचित उन्हें रणभूमि में अपनी वीरगति का पूर्वाभास हो गया था।
दिसंबर 1997 में उन्हें जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा में तैनात किया गया, जहां वह लगभग 18 माह तैनात रहे। कारगिल में घुसपैठ उजागर होने पर 14 मई 1999 को 18 ग्रेनेडियर्स बटालियन ने अपने कमांडिंग ऑफिसर कर्नल Khushal Thakur के नेतृत्व में श्रीनगर से कारगिल जिले के द्रास सेक्टर के लिए कूच किया। इस बटालियन को तोलोलिंग हिल (पॉइंट 4590) क्षेत्र में पहुंच कर वहां पांव रोपने थे।
23/24 मई 1999 की रात्रि में, 18 ग्रेनेडियर्स बटालियन की एक टुकड़ी चढ़ाई करते हुए लगभग 16000 फीट ऊंचाई तक पहुंच गई। ग्रेनेडियर राजकुमार भी इस टुकड़ी के सदस्य थे। इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार के पेड़ों या झाड़ियों की ओट नहीं थी व पूर्णतः खड़ी चढ़ाई थी। यहां के कठिन, दुर्गम भूभाग व शत्रु के प्रभावी स्थिति में होने के कारण मात्र रात्रि में ही चढ़ना संभव था।
24 मई 1999 की भोर में, जैसे ही यह टुकड़ी आगे बढ़ने लगी, उसी समय आकस्मिक शत्रु ने इस पर तीव्र गोलीवर्षा आरंभ कर दी। इस अप्रत्याशित आक्रमण का सामना अग्रिम सेक्शन ने किया। ग्रेनेडियर राजकुमार इस सेक्शन में सबसे अग्रणी थे, अन्य सैनिक पीछे आ रहे थे। उन्होंने अपने साथियों को तीव्र मशीनगन फायर में घिरते देखा व दो साथियों को घायल होकर गिरते हुए देखा। ऐसे में, संकटमय चट्टान पर इंच-इंच रेंगते हुए ग्रेनेडियर राजकुमार शत्रु के मशीन गन बंकर की ओर बढ़ रहे थे।
उसी समय उन्हें गोली लग गई। घाव से रक्त बह रहा था, तो भी वह निरंतर आगे बढ़ते रहे व एक हथगोला फेंक कर उस मशीन गन को शांत कर दिया। यद्यपि कुछ घंटों पश्चात वह मशीनगन पुनः सक्रिय हो गई, किंतु उस समय तक उनके साथियों को आड़ लेने का अवसर मिल गया था। ग्रेनेडियर राजकुमार अपनी लाइट मशीन गन से अंतिम श्वास तक फायर करते हुए वीरगति को प्राप्त हुए थे।
उस क्षेत्र में शत्रु की निरंतर हो रही प्रचंड गोली वर्षा के कारण उनके साथियों ने शत्रु से सोलह घंटे तक संघर्ष करके रस्सियों से खींच कर उनका शव प्राप्त किया था। 29 मई 1999 को, उनका पार्थिव शरीर भैंसली गांव पहुंचा तथा उसी सांय पूर्ण सैन्य सम्मान से उनका अंतिम संस्कार हुआ था।
ग्रेनेडियर राजकुमार कारगिल युद्ध में 18 ग्रेनेडियर्स बटालियन के प्रथम बलिदानी सैनिक थे। ग्रेनेडियर राजकुमार को उनके अदम्य साहस, वीरता एवं सर्वोच्च बलिदान के लिए मरणोपरांत “सेना मेडल” दिया गया।
#कारगिलसेजोलौटकेघरनाआए
#Kargil24May
#KargilChuruDistrict
#KargilRajasthan
#Kargil18Grenadiers
#indianarmy #india #army #indianairforce #indiannavy #pulwama #galwan #freedomfighter #15august #26january #nationfirst #shauryanaman #shauryasaga #realheros #superheros
#kargil #shauryagatha #shauryanaman #kargilwar #news #imp #army #salute #ngo #bestngo #bestngoformartyrs
https://www.shauryanaman.com/ https://www.shauryanaman.org
:
https://www.instagram.com/shauryanamanngo
:
https://www.facebook.com/ShauryaNamanNGO
https://www.youtube.com/c/shauryanaman
: shauryanaman2019@gmail.com
:
+91 91110-10007/8

