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Kargil story

ऑपरेशन विजय कारगिल युद्ध 29 मई 1999 यूनिट – 1 बिहार रेजिमेंट

—— बलिदान दिवस -शौर्यनमन—–
मेजर मारियप्पन सरवनन
नायक गणेश प्रसाद यादव
सिपाही शिवशंकर प्रसाद गुप्ता
सिपाही प्रमोद कुमार
सिपाही अरविंद कुमार पांडेय
यूनिट – 1 बिहार रेजिमेंट
पॉइंट 4268 का रण
ऑपरेशन विजय
कारगिल युद्ध 1999
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मेजर मारियप्पन सरवनन
10-08-1072 – 29-05-1999
वीर चक्र (मरणोपरांत)
मेजर मारियप्पन सरवनन का जन्म 10 अगस्त 1972 को तमिलनाडु के रामेश्वरम् द्वीप पर लेफ्टिनेंट कर्नल श्री आदि मारियप्पन एवं श्रीमती अमृतावल्ली के परिवार में हुआ था। उन्होंने अपनी शिक्षा बिहार के गया जिले में केंद्रीय विद्यालय और तत्पश्चात वर्ष 1992 में सेंट जोसेफ कॉलेज तिरुचिरापल्ली से स्नातक करके पूर्ण की थी। 11 मार्च 1995 को चेन्नई से उन्हें भारतीय सेना की बिहार रेजिमेंट की 1 बटालियन में लेफ्टिनेंट के रूप में कमीशन प्राप्त हुआ था।
मई 1999 में 1 बिहार बटालियन असम में थी। कारगिल युद्ध आरंभ होने पर इस बटालियन को असम से जम्मू-कश्मीर कूच करने का आदेश दिया गया। जहां असम में तापमान लगभग 30° था वहीं बटालिक क्षेत्र में 7000 से 15000 फीट की ऊंचाई पर तापमान न्यूनतम 10° से 20° था और जलवायु अत्यंत शीत थी। अत्यधिक ऊंचाई का अर्थ अति अल्प ऑक्सीजन वाले क्षेत्रों में युद्ध करना था। सियाचिन के पश्चात यह विश्व का द्वितीय सबसे ऊंचा रणक्षेत्र है।
कारगिल के बटालिक सेक्टर के पश्चिम की ओर स्थित जुबैर चोटी पर 14,229 फीट (4,337 मीटर) ऊंची व पूर्ण रूप से सुदृढ़ पॉइंट 4268 पर भारतीय सेना द्वारा अधिकार करने के दो प्रयास विफल हो चुके थे।
26 मई 1999 को, मेजर सरवनन और उनकी टुकड़ी को पॉइंट 4268 पर अधिकार करने का कार्य सौंपा गया। इस आक्रामक टुकड़ी ने 28 मई 1999 की रात्रि में मिशन आरंभ किया और 29 मई 1999 की भोर में 4:00 बजे “बजरंग बली की जय” और “बिरसा मुंडा की जय” के युद्धघोष के साथ समक्ष से शत्रु पर भीषण आक्रमण किया।
शत्रु की ओर से तोपों और स्वचालित शस्त्रों की भयंकर फायरिंग के होते हुए भी इस टुकड़ी ने आक्रमण प्रवृत्त रखा। मेजर सरवनन ने शत्रु की पोस्ट पर एक 90 mm रॉकेट दागा, जिससे शत्रु के दो सैनिक मारे गए। इस भयानक संघर्ष में उनके पेट में बम का किरच लग गया। वह गंभीर रूप से घायल हो गए तो भी जूझते रहे।
अनेक भारतीय सैनिक घायल होने के कारण उनके कमांडिंग ऑफिसर ने उन्हें पीछे हटने का आदेश दिया। इस ऑपरेशन में मेजर सरवनन का गुप्त नाम (Code Name) चंगेज खान था। आदेश आया “चंगेज खान Fall Back”। मेजर सरवनन ने प्रत्युत्तर दिया, “आज नहीं सर, हम लक्ष्य के अति निकट हैं”। इसके पश्चात उन्होंने शत्रु पर प्रचंड फायरिंग की व दो पाकिस्तानियों को और मार दिया।
मेजर सरवनन 4268 के टॉप पर पहुंचने वाले सैनिकों में थे, किंतु प्रातः 6:30 बजे उनके सिर में गोली लगी और वह वीरगति को प्राप्त हो गए। शत्रु अत्यंत ऊंचाई पर प्रभावी स्थिति लिए था। इस कारण मेजर सरवनन का शव वहीं हिम में दबा पड़ा रहा। 1 बिहार बटालियन ने पॉइंट 4268 पर अधिकार करने की सौगंध ली और 6 जुलाई को वहां अधिकार कर लिया। पॉइंट 4268 पर अधिकार होने के पश्चात 14 जुलाई को उनका पार्थिव शरीर प्राप्त हुआ था।
मेजर मारियप्पन सरवनन को उनके अनुकरणीय नेतृत्व, असाधारण साहस एवं वीरता के लिए महामहिम राष्ट्रपति के. आर. नारायणन द्वारा मरणोपरांत “वीर चक्र” से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उनकी मां श्रीमती अमृतावल्ली ने ग्रहण किया। भारतीय सेना ने उन्हें “बटालिक का नायक” की उपाधि प्रदान की।
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नायक गणेश प्रसाद यादव
19-02-1971 – 29-05-1999
वीर चक्र (मरणोपरांत)
वीरांगना – श्रीमती पुष्पा देवी
नायक गणेश प्रसाद का जन्म 19 फरवरी 1971 को बिहार के पटना जिले में बिहटा के पांडेयचक गांव में श्री रामदेव प्रसाद यादव एवं श्रीमती बच्चिया देवी के घर में हुआ था। 28 दिसंबर 1987 को वह भारतीय सेना की बिहार रेजिमेंट में रंगरूट के रूप में भर्ती हुए थे। प्रारंभिक प्रशिक्षण के पश्चात उन्हें 1 बिहार बटालियन में सिपाही के पद पर नियुक्त किया गया था।
‘ऑपरेशन विजय’ में 28 मई 1999 को 1 बिहार बटालियन की चार्ली कंपनी को कारगिल के बटालिक सेक्टर में 14,000 फीट की ऊंचाई पर एक भली-भांति सुदृढ़ रक्षित शत्रु चौकी (पॉइंट 4268) पर अधिकार करने का कार्य सौंपा गया। नायक गणेश प्रसाद भी उस कंपनी के सदस्य थे। रात्रि में चार घंटे तक चलने के पश्चात 29 मई 1999 की भोर में 4:00 बजे शत्रु पर आक्रमण किया गया।
इस आक्रमण में शत्रु के तोपखाने और लघु शस्त्रों की प्रचंड गोलीवर्षा का सामना करते हुए नायक गणेश प्रसाद सबसे आगे चल रहे थे। अपनी व्यक्तिगत सुरक्षा की पूर्णतः उपेक्षा करते हुए, उन्होंने अदम्य साहस, अडिग भावना, दृढ़ संकल्प के साथ शत्रु के बंकर पर आक्रमण किया और दो पाकिस्तानी सैनिकों को मार दिया। भीषण संग्राम में, नायक गणेश प्रसाद को कूल्हे पर अनेक गोलियां लगीं। वह गंभीर रूप से घायल हो गए। घायल होते हुए भी, अंतिम श्वास तक शत्रु पर गोलियां चलाते हुए वह वीरगति को प्राप्त हुए थे।
नायक गणेश प्रसाद यादव ने शत्रु के समक्ष असाधारण साहस, अडिग भावना एवं विशिष्ट वीरता का प्रदर्शन किया। उन्हें मरणोपरांत “वीर चक्र” से सम्मानित किया गया।
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सिपाही शिवशंकर प्रसाद गुप्ता
सेना मेडल (मरणोपरांत)
वीरांगना – श्रीमती रेखा देवी
सिपाही शिवशंकर प्रसाद का जन्म बिहार के औरंगाबाद जिले के रफीगंज तहसील के कोटवारा ग्राम पंचायत के बंचर बगड़ा गांव में श्री नंदलाल प्रसाद गुप्ता एवं श्रीमती पूनम देवी के परिवार में हुआ था। 28 अक्टूबर 1996 को वह भारतीय सेना की बिहार रेजिमेंट में रंगरूट के रूप में भर्ती हुए थे। प्रारंभिक प्रशिक्षण के पश्चात उन्हें 1 बिहार बटालियन में, सिपाही के पद पर नियुक्त किया गया था।
“ऑपरेशन विजय” में, 29 मई 1999 की भोर में 4:00 बजे, 1 बिहार बटालियन की चार्ली कंपनी ने बटालिक क्षेत्र के पॉइंट 4268 पर आक्रमण किया। भीषण संघर्ष में कंपनी कमांडर मेजर सर्वनन और सेक्शन कमांडर नायक गणेश प्रसाद यादव वीरगति को प्राप्त हो गए थे। उनके शव शत्रु के अधिकार के क्षेत्र में पड़े थे। सिपाही शिवशंकर प्रसाद अपने संगी सैनिकों के साथ उनके शव लाने के लिए आगे बढ़े।
शत्रु निरंतर भीषण फायरिंग कर रहा था, तो भी, सिपाही शिवशंकर प्रसाद रेंगते हुए 14230 फीट ऊंची पथरीली एवं हिमाच्छादित पहाड़ी पर जहां उनके कंपनी कमांडर का शव पड़ा हुआ था, वहां पहुंच गए। प्रथम प्रयास में वह शव के निकट पड़े उनके शस्त्र और गोला-बारूद ले आए, द्वितीय प्रयास में वह उनका शव लाने के लिए पुनः ऊपर चढ़े।
इस बार वह मेजर सर्वनन के शव को घसीट कर रेंगते हुए 50 मीटर ही चले थे कि उनके पैर में गोली लग गई। असहनीय पीड़ा और बहते हुए रक्त से अभीत उन्‍होंने त्वरित स्थिति ली और अपने आग्नेयास्त्र से प्रचंड फायर कर शत्रु को आगे नहीं बढ़ने दिया। दो घंटे तक दोनों ओर से भीषण फायरिंग होती रही। अंतत: उनकी छाती में गोली लग गई। वह गंभीर रुप से घायल हो गए और अत्यधिक रक्त बहने से वीरगति को प्राप्त हो गए। सिपाही शिव शंकर प्रसाद गुप्ता को उनके असाधारण साहस, वीरता एवं सर्वोच्च बलिदान के लिए मरणोपरांत “सेना मेडल” से सम्मानित किया गया था। मरणोपरांत “सेना मेडल” से सम्मानित किया गया।
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सिपाही प्रमोद कुमार
सेना मेडल (मरणोपरांत)
सिपाही प्रमोद कुमार का जन्म बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के कुढ़नी के माधोपुर सुस्ता गांव में श्री बिंदेश्वर राय एवं श्रीमती दौलती देवी के परिवार में हुआ था। शिक्षा पूर्ण करने के पश्चात वह भारतीय सेना की बिहार रेजिमेंट में रंगरूट के रूप में भर्ती हुए थे। प्रारंभिक प्रशिक्षण के पश्चात उन्हें 1 बिहार बटालियन में, सिपाही के पद पर नियुक्त किया गया था।
“ऑपरेशन विजय” में, 29 मई 1999 को, सिपाही प्रमोद कुमार बटालिक सेक्टर में पॉइंट 4268 पर अपने संगी सैनिकों के शवों को लाने गए थे। हजारों फीट ऊंची हिमाच्छादित पहाड़ियों पर तोपों एवं स्वचालित शस्त्रों से सुसज्जित सुदृढ़ रक्षित बंकरों में स्थिति लिए शत्रु से अदम्य साहस, दृढ़ निश्चय एवं वीरता से संघर्ष करते हुए वह वीरगति को प्राप्त हुए थे। 38 दिनों पश्चात भारतीय सेना का वहां अधिकार होने के पश्चात हिम में दबा हुआ उनका शव पाया गया था।
सिपाही प्रमोद कुमार को उनके असाधारण साहस, वीरता एवं सर्वोच्च बलिदान के लिए मरणोपरांत “सेना मेडल” से सम्मानित किया गया।
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सिपाही अरविंद कुमार पांडेय
सिपाही अरविंद कुमार पांडेय का जन्म बिहार के पूर्वी चंपारण जिले के भटिया गांव में श्री ईश्वरचंद्र पांडेय एवं श्रीमती सुनैना देवी के परिवार में हुआ था। शिक्षा पूर्ण करने के पश्चात वह भारतीय सेना की बिहार रेजिमेंट में रंगरूट के रूप में भर्ती हुए थे। प्रारंभिक प्रशिक्षण के पश्चात उन्हें 1 बिहार बटालियन में, सिपाही के पद पर नियुक्त किया गया था।
“ऑपरेशन विजय” में, 28 मई 1999 को, 1 बिहार बटालियन की चार्ली कंपनी को कारगिल के बटालिक सेक्टर में 14,000 फीट की ऊंचाई पर एक भली-भांति सुदृढ़ रक्षित शत्रु चौकी (पॉइंट 4268) पर अधिकार करने का कार्य सौंपा गया था। सिपाही अरविंद कुमार भी उस कंपनी के सदस्य थे। रात्रि में चार घंटे चलने के पश्चात 29 मई 1999 की भोर में 4:00 बजे शत्रु पर आक्रमण किया गया। इस भीषण युद्ध में अदम्य साहस, दृढ़ निश्चय एवं वीरता से संघर्ष करते हुए सिपाही अरविंद कुमार वीरगति को प्राप्त हुए थे।
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पॉइंट 4268 के भीषण संघर्ष में बलिदान हुए मेजर सरवनन, नायक गणेश प्रसाद यादव, सिपाही प्रमोद कुमार, सिपाही अरविंद कुमार और सिपाही शिवशंकर प्रसाद गुप्ता को आज उनके बलिदान दिवस पर कृतज्ञ नमन।
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