—— बलिदान दिवस -शौर्यनमन—–
कैप्टन अमोल कालिया
हवलदार राजिंदर सिंह
नायक पवन कुमार
लांस नायक लियाकत अली
राइफलमैन तरसेम लाल
राइफलमैन इश्तियाक अहमद
राइफलमैन रविंदर सिंह
राइफलमैन अब्दुल सलाम डार
यूनिट – 12 जेएके एलआई
पॉइंट 5203 का संग्राम
ऑपरेशन विजय
कारगिल युद्ध 1999
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कैप्टन अमोल कालिया
IC54065F
26-02-1974 – 09-06-1999
वीर चक्र (मरणोपरांत)
कैप्टन अमोल कालिया का जन्म 26 फरवरी 1974 को पंजाब के रोपड़ जिले के नंगल कस्बे में श्री सतपाल कालिया एवं श्रीमती उषा कालिया के परिवार में हुआ था। उन्हें भारतीय सेना की जम्मू एंड कश्मीर लाइट इंफेंट्री रेजिमेंट की 12 बटालियन में लेफ्टिनेंट के रूप में कमीशन प्राप्त हुआ था।
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हवलदार राजिंदर सिंह
9084900A
वीरांगना – श्रीमती कंचन देवी
हवलदार राजिंदर सिंह जम्मू कश्मीर के कठुआ जिले के बसोहली गांव के निवासी थे। वह भारतीय सेना की जम्मू एंड कश्मीर लाइट इंफेंट्री रेजिमेंट की 12 बटालियन में हवलदार के पद पर सेवारत थे।
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नायक पवन कुमार
9088407K
30-12-1970 – 09-06-1999
वीरांगना – श्रीमती रीता कुमारी
नायक पवन कुमार का जन्म 30 दिसंबर 1970 को जम्मू कश्मीर के कठुआ जिले की हीरानगर तहसील के सीमावर्ती महेशे चक गांव में हुआ था। शिक्षा पूर्ण करने के पश्चात 20 मई 1987 को वह भारतीय सेना की जम्मू एंड कश्मीर लाइट इंफेंट्री रेजिमेंट में रंगरूट के रूप में भर्ती हुए थे। प्रारंभिक प्रशिक्षण के पश्चात उन्हें 12 जेएके एलआई बटालियन में राइफलमैन के पद पर नियुक्त किया गया था।
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लांस नायक लियाकत अली
9094812X
वीरांगना – नसीम अख्तर
लांस नायक लियाकत अली जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले के टोपा गांव के निवासी थे और भारतीय सेना की जम्मू एंड कश्मीर लाइट इंफेंट्री रेजिमेंट की 12 बटालियन में सेवारत थे।
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राइफलमैन तरसेम लाल
9097495M
राइफलमैन तरसेम लाल का जन्म जम्मू कश्मीर के जम्मू जिले के आरएसपुरा ब्लॉक के गंडली गांव में श्री भूतिलाल के घर में हुआ था। वह अपनी चार बहनों के मध्य एकमात्र भाई थै। वह भारतीय सेना की जम्मू एंड कश्मीर लाइट इंफेंट्री रेजिमेंट की 12 बटालियन में सेवारत थे।
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राइफलमैन इश्तियाक अहमद
9101891H
03-04-1978 – 09-06-1999
राइफलमैन इश्तियाक अहमद का जन्म 3 अप्रैल 1978 को श्री अब्दुल गनी एवं श्रीमती शाया बेगम के परिवार में हुआ था। वह जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले के कुंडगावरी गांव के निवासी थे। वर्ष 1996 में वह भारतीय सेना की जम्मू एंड कश्मीर लाइट इंफेंट्री रेजिमेंट में रंगरूट के रूप में भर्ती हुए थे। प्रारंभिक प्रशिक्षण के पश्चात उन्हें 12 जेएके एलआई बटालियन में राइफलमैन के पद पर नियुक्त किया गया था।
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राइफलमैन रविंदर सिंह
9099400A
राइफलमैन रविंदर सिंह जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा जिले के शालपोरा गांव के निवासी थे और भारतीय सेना की जम्मू एंड कश्मीर लाइट इंफेंट्री रेजिमेंट की 12 बटालियन में सेवारत थे।
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राइफलमैन अब्दुल सलाम डार
9096396X
राइफलमैन अब्दुल सलाम डार जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग जिले के श्री गुफवाड़ा गांव के निवासी थे और भारतीय सेना की जम्मू एंड कश्मीर लाइट इंफेंट्री रेजिमेंट की 12 बटालियन में सेवारत थे।
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मई 1999 में सियाचिन कार्यकाल पूर्ण करने के पश्चात 12 जेएके एलआई बटालियन को कारगिल के बटालिक सेक्टर में तैनात किया गया था। 7 जून 1999 को कैप्टन अमोल कालिया को कारगिल-यलदोर क्षेत्र में 17000 फीट ऊंचे पॉइंट 5203 को पुनः आधिपत्य में लेने का कार्य दिया गया था। बटालिक क्षेत्र पर नियंत्रण प्राप्त करने के लिए यह एक अत्यंत संकटमय और रणनीतिक रूप से अति महत्वपूर्ण मिशन था।
पर्वतीय युद्ध के विशेषज्ञ कैप्टन अमोल कालिया और उनके 13 सैनिकों के दल को प्रथम दिवस हेलिकॉप्टर से इस क्षेत्र में उतारा गया था। अधिकांश पहुंच क्षेत्र को शत्रु ने फायरिंग से कवर किया हुआ था, तो भी, भीषण फायरिंग और गंभीर बाधाओं से जूझते हुए ये सैनिक अपने लक्ष्य की ओर बढ़े तथा विशेष पर्वतारोहण तकनीकों के प्रयोग से शीर्ष पर पहुंच गए।
9 जून 1999 की भोर में लगभग 3:00 बजे उन्होंने शत्रु पर आक्रमण किया। क्योंकि अंधेरे में कुछ भी अनुमान करना अति कठिन था अतः शत्रु ने उन्हें आगे नहीं बढ़ने दिया। पाकिस्तानी भलि भांति स्थिति लिए हुए थे और उन्होंने उस क्षेत्र की विस्तृत किलेबंदी की हुई थी। तो भी, यह कंपनी उत्तर-पश्चिमी ढलान पर पांव रोपने (FOOTHOLD) में सफल रही। शत्रु ने उस स्थान पर पलटवार किया, इस आक्रमण में कैप्टन कालिया के लाइट मशीन गन टुकड़ी के सैनिक बलिदान हो गए।
ऐसे में, कैप्टन अमोल कालिया ने तत्क्षण लाइट मशीन गन (LMG) का संचालन किया और शत्रु के तीन सैनिकों को मार दिया और तीन अन्य को घायल कर दिया। किंतु वे शत्रु के अनुपात में संख्या बल में अल्प थे। प्रातः लगभग 9:00 बजे कैप्टन कालिया को अनेक गोलियां लगी और वह गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्होंने अंतिम श्वास तक शत्रु से संघर्ष किया।
इस ऑपरेशन में कैप्टन अमोल कालिया, हवलदार राजिंदर सिंह, नायक पवन कुमार, लांस नायक लियाकत अली, राइफलमैन तरसेम लाल, राइफलमैन इश्तियाक अहमद, राइफलमैन रविंदर सिंह और राइफलमैन अब्दुल सलाम डार वीरगति को प्राप्त हुए थे।
कैप्टन अमोल कालिया और उनके सैनिकों ने रेजिमेंट के आदर्श वाक्य ‘बलिदानम् वीर लक्षणम्’ को सार्थक किया और पॉइंट 5203 पर आधिपत्य का मार्ग प्रशस्त किया। उनके द्वारा इस महत्वपूर्ण चौकी के क्षेत्र में पांव रोपना अत्यंत वीरतापूर्ण कार्य था।
यह क्षेत्र प्रत्यक्ष शत्रु तोपों की गोला वृष्टि में होने से कैप्टन अमोल कालिया और अन्य सैनिकों के शव 12 दिनों से अधिक समय तक वहां से नहीं निकाले जा सके। यह क्षेत्र शत्रुओं से मुक्त होने के पश्चात 20 जून को उनके शव परिजनों को सौंपे गए थे।
कैप्टन अमोल कालिया को उनकी उत्कृष्ट वीरता, नेतृत्व, युद्ध की अडिग भावना एवं सर्वोच्च बलिदान के लिए मरणोपरांत “वीर चक्र” से सम्मानित किया गया।
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