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Ashok Chakra

अशोक चक्र कैप्टन एरिक जेम्स टकर

—— बलिदान दिवस -शौर्यनमन—–
कैप्टन एरिक जेम्स टकर
IC5034
21-10-1927 – 02-08-1957
अशोक चक्र (मरणोपरांत)
यूनिट – 2 मराठा लाइट इंफेट्री
आतंकवाद विरोधी अभियान
कैप्टन एरिक जेम्स टकर का जन्म 21 अक्टूबर 1927 को श्री वीरा विजया सुकेव के परिवार में हुआ था। 13 जुलाई 1947 को उन्हें ब्रिटिश-भारतीय सेना की मराठा लाइट इंफेट्री रेजिमेंट की 2 बटालियन में सैकिंड लेफ्टिनेंट के रूप में कमीशन प्राप्त हुआ था।
स्वतंत्रता के पश्चात से नागा विद्रोह भारत का प्रथम और सबसे प्राचीन विद्रोह भी था। नागा गुरिल्ला समूह क्रूर और युद्ध प्रशिक्षित थे। 1956 में कैप्टन एरिक जेम्स टकर नागा हिल्स (वर्तमान नागालैंड राज्य) में तैनात 2 मराठा लाइट इंफेट्री बटालियन की ‘B’ कंपनी की कमान नियंत्रण कर रहे थे। उन्हें चाकबामा से फेक तक, 42 मील की दूरी और मेलुरी से 20 मील की दूरी तक संचार की लाइनें खोलने का कार्य दिया गया था।
उन्होंने अपने लक्ष्य को सफलतापूर्वक प्राप्त किया। वह विपुल संख्या में स्वचालित शस्त्रों और राइफलों से लैस विद्रोहियों से संघर्ष करते हुए 15 अक्टूबर 1956 को मेलुरी पहुंचे। अपने घावों से अविचलित , अति साहस के साथ वह मार्ग में जूझते रहे व विद्रोहियों को हताहत करते रहे। विद्रोहियों द्वारा उन्हें मारने की अनेक चेतावनियों के उपरांत भी उन्होंने अपने कर्तव्य से परे अनेक संकटमय और कठिन कार्यों को पूर्ण किया।
1 अप्रैल 1957 को उन्हें चिपोकाटामी में, विद्रोहियों के इकट्ठे होने की सूचना प्राप्त हुई । घने जंगलों से होकर वह उस स्थान पर पहुंच गए। विद्रोहियों को आश्चर्यचकित करते हुए उन्होंने चार विद्रोहियों को शस्त्रों के साथ पकड़ लिया। 18 जुलाई 1957 को उन्हें संचार लाइनें खोलने का कार्य सौंपा गया था। कैप्टन जेम्स टकर ने उस क्षेत्र में आक्रमण करके नागा उग्रवादियों के एक विशाल गुट को गंभीर क्षति पहुंचाई।
2 अगस्त 1957 को वह एक प्लाटून के साथ खुजामी से किविखु की ओर बढ़ रहे थे। घने जंगल में 70 माइलस्टोन के निकट उग्रवादियों ने उनपर घात लगाकर आक्रमण (AMBUSH) किया। उग्रवादियों ने उनकी गतिविधि के संबंध में अग्रिम सूचना जुटाई थी। कैप्टन जेम्स टूकर के मुख और पैरों पर आघात लगे थे, किंतु वह अंतिम गोली तक दृढ़ निश्चय से डटे रहे व उग्रवादियों से संघर्ष किया। अंत में उन्होंने उग्रवादियों पर प्रत्यक्ष आक्रमण किया। इस साहसिक एवं भयानक कार्रवाई में स्वचालित फायर लगने से वह वीरगति को प्राप्त हुए।
कैप्टन जेम्स टकर को उनके अनुकरणीय साहस, प्रचंड वीरता, कर्तव्य के प्रति समर्पण एवं असाधारण नेतृत्व के लिए मरणोपरांत अशोक चक्र से सम्मानित किया गया।
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