—— बलिदान दिवस -शौर्यनमन—–
नायक दीपक सिंह गहरवार
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15-07-1989 – 15-06-2020
वीर चक्र (मरणोपरांत)
वीरांगना – लेफ्टिनेंट श्रीमती रेखा सिंह
यूनिट – 16 बिहार रेजिमेंट/AMC
ऑपरेशन स्नो लेपर्ड 2020
नायक (नर्सिंग सहायक) दीपक सिंह का जन्म 15 जुलाई 1989 को मध्यप्रदेश के रीवा जिले की मनगवां तहसील के फरेहदा गांव में श्री गजराज सिंह गहरवार एवं श्रीमती सरोज देवी के परिवार में हुआ था। वर्ष 2012 में वह भारतीय सेना की आर्मी मेडिकल कॉर्प्स में भर्ती हुए थे। प्रशिक्षण के पश्चात उन्होंने आर्मी बेस हॉस्पिटल, 414 फील्ड हॉस्पिटल, 426 फील्ड हॉस्पिटल में भिन्न-भिन्न स्थानों पर सेवाएं दी थीं। 30 जनवरी 2019 को उन्हें 16 बिहार बटालियन में संलग्न किया गया था 30 नवंबर 2019 को उनका विवाह सुश्री रेखा सिंह से हुआ था।
जून 2020 के आरंभ से ही लेह से दौलत बेग ओल्डी को जाने वाली सड़क के निकट गलवान घाटी में निर्माण कार्य के कारण LAC पर तनाव बढ़ रहा था। गलवान नदी पर अक्साई चिन क्षेत्र में एक पुल के निर्माण पर चीनियों को गंभीर आपत्ति थी। यह क्षेत्र भारत के साथ-साथ चीन के लिए भी सामरिक रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि यह क्षेत्र लेह से दौलत बेग ओल्डी तक की सड़क पर प्रभावी है, जो भारत के लिए अत्यंत सैन्य महत्व की हवाई पट्टी थी। तनाव नियंत्रण के लिए दोनों पक्षों के वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों के मध्य अनेक समय वार्ता हुई।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए 15/16 जून 2020 की रात्रि को, क्षेत्र में तैनात 16 बिहार बटालियन के कमांडिंग ऑफिसर कर्नल संतोष बाबू ने वार्ता का नेतृत्व करने का निर्णय किया। किंतु, वार्ता के समय हुई कहासुनी से हाथापाई हो गई। शीघ्र ही हाथापाई हिंसक झड़प में परिवर्तित गई और चीनी सैनिकों ने कर्नल संतोष बाबू और उनके सैनिकों पर घातक कल्बों और छड़ों से आक्रमण कर दिया। इस संघर्ष में अनेक भारतीय सैनिक घायल हो गए।
15 जून 2020 को, नायक दीपक सिंह 16 बिहार बटालियन में नर्सिंग सहायक का कर्तव्य निर्वहन कर रहे थे। उन्होंने ऑपरेशन स्नो लेपर्ड में, पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में हुई झड़प में हताहत हुए सैनिकों का उपचार किया।
युद्ध की स्थिति का आकलन करने के पश्चात, वे तत्काल चिकित्सा सहायता के लिए ऊपर चले गए। जैसे ही, झड़प हुई और हताहतों की संख्या में वृद्धि हुई, वह अपने घायल सैनिकों को प्राथमिक चिकित्सा प्रदान करने के लिए अग्रिम पंक्ति में गए। आगामी झड़प में हुए भारी पथराव में, पत्थरों से उन्हें भी गंभीर घाव लगे, किंतु अविचलित और अथक रूप से वह घायलों को चिकित्सा सहायता प्रदान करते रहे।
शत्रु की संख्या अनुपात में भारतीय सैनिकों से अधिक थी और अपना कर्तव्य निर्वहन करते हुए नायक दीपक सिंह घायल हो गए। गंभीर घावों के होते हुए भी वह घायल सैनिकों को चिकित्सा सहायता देते रहे और उन्होंने अनेक सैनिकों का जीवन सुरक्षित किया। अंततः अपने घातक घावों के कारण वह वीरगति को प्राप्त हो गए। उन्होंने 30 से अधिक भारतीय सैनिकों का उपचार करने और उनके जीवन की रक्षा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निर्वहन की, जो उनके व्यावसायिक कौशल को प्रदर्शित करती है।
नायक दीपक सिंह को, शत्रुतापूर्ण परिस्थितियों में अद्वितीय व्यावसायिकता, अदम्य समर्पण और कर्तव्य की पालना में अपना जीवन समर्पित करने के लिए मरणोपरांत “वीर चक्र” से सम्मानित किया गया।
वीरांगना रेखा सिंह ने पति की वीरगति के पश्चात, शिक्षण का कार्य छोड़ कर अपने पति की सैन्य सेवा की विरासत को आगे बढ़ाया। वर्ष 2022 में उन्हें भारतीय सेना की आर्मी ऑर्डनेंस कॉर्प्स में लेफ्टिनेंट के रूप में कमीशन प्राप्त हुआ।
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