—— बलिदान दिवस -शौर्यनमन—–
हवलदार के. पलानी
15139118Y
03-06-1980 – 15-06-2020
वीर चक्र (मरणोपरांत)
वीरांगना – श्रीमती पी. वनथी देवी
यूनिट – 81 फील्ड रेजिमेंट
ऑपरेशन स्नो लेपर्ड 2020
हवलदार (गनर) के. पलानी का जन्म 3 जून 1980 को एक किसान परिवार में श्री कालीमुथु और श्रीमती लोगंबाई के घर में हुआ था। वह तमिलनाडु के रामनाथपुरम जिले के कडुक्कलूर गाँव के रहने वाले थे। बाल्यकाल से ही वह सशस्त्र बलों में सम्मिलित होने के इच्छुक थे। अंततः विद्यालय शिक्षा पूर्ण करने के पश्चात, 29 अप्रैल 1999 को वह भारतीय सेना की आर्टिलरी रेजिमेंट में रंगरूट के रूप में भर्ती हुए थे।
प्रारंभिक प्रशिक्षण के पश्चात उन्हें 81 फील्ड रेजिमेंट में गनर के पद पर नियुक्त किया गया था। सैन्य सेवा में ही उन्होंने दूरस्थ शिक्षा के माध्यम से स्नातक की शिक्षा पूर्ण की थी। अपनी बटालियन में भिन्न-भिन्न परिचालन परिस्थितियों और स्थानों पर सेवाएं देते हुए वर्ष 2020 तक वह हवलदार के पद पर पदोन्नत हो गए थे। जून 2020 में हवलदार के. पलानी की यूनिट को ऑपरेशन स्नो लेपर्ड के अंतर्गत वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के निकट पूर्वी लद्दाख में तैनात किया गया था।
जून के आरंभ से ही लेह से दौलत बेग ओल्डी को जाने वाली सड़क के निकट गलवान घाटी में निर्माण कार्य के कारण LAC पर तनाव बढ़ रहा था। गलवान नदी पर अक्साई चिन क्षेत्र में एक पुल के निर्माण पर चीनियों को गंभीर आपत्ति थी। यह क्षेत्र भारत के साथ-साथ चीन के लिए भी सामरिक रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि यह क्षेत्र लेह से दौलत बेग ओल्डी तक की सड़क पर प्रभावी है, जो भारत के लिए अत्यंत सैन्य महत्व की हवाई पट्टी थी। तनाव नियंत्रण के लिए दोनों पक्षों के वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों के मध्य अनेक समय वार्ता हुई।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए 15/16 जून 2020 की रात्रि को, क्षेत्र में तैनात 16 बिहार बटालियन के कमांडिंग ऑफिसर कर्नल संतोष बाबू ने वार्ता का नेतृत्व करने का निर्णय किया। किंतु, वार्ता के समय हुई कहासुनी से हाथापाई हो गई। शीघ्र ही हाथापाई हिंसक झड़प में परिवर्तित गई और चीनी सैनिकों ने कर्नल संतोष बाबू और उनके सैनिकों पर घातक कल्बों और छड़ों से आक्रमण कर दिया।
भारतीय सैनिकों की संख्या अति अल्प थी और चीनी सैनिक पूर्व से ही आक्रमण के लिए तत्पर प्रतीत हो रहे थे। जैसे ही, संघर्ष बढ़ा, हवलदार के. पलानी और अन्य सैनिक चीनियों से जूझ रहे भारतीय सैनिकों में सम्मिलित हो गए।
15 जून 2020 की रात्रि को, हवलदार के. पलानी 16 बिहार के गश्ती दल के सदस्य थे, जिसे एक अवलोकन चौकी स्थापित करने का कार्य सौंपा गया था। चीनियों के साथ गुत्थमगुत्था के संघर्ष में उन्होंने वीरता से संघर्ष किया और अपने मातहतों की शत्रु सैनिकों की आक्रामक कार्रवाई से रक्षा की।
आकस्मिक, चीनियों ने उन्हें घेर लिया और अपनी व्यक्तिगत सुरक्षा पर ध्यान नहीं देते हुए, वह वीरता से खड़े रहे और जब शत्रु ने उन पर धारदार शस्त्रों से आक्रमण किया और उन्हें गंभीर रूप से घायल कर दिया, तो भी उन्होंने अपने साथियों की रक्षा करने का प्रयास किया।
उनकी वीरता के कार्य ने अन्य सहकर्मी सैनिकों को भी अडिग रहकर संघर्ष करने और शत्रु के आक्रमण का प्रतिरोध करने के लिए प्रेरित किया। अपने गंभीर घावों के उपरांत, वह दृढ़ता से अपनी भूमि पर अडिग रहे और भारतीय सेना की उत्कृष्ट परंपराओं में मातृभूमि के लिए अपना जीवन न्यौछावर कर दिया।
शत्रु के समक्ष साहस, दृढ़ता और सर्वोच्च बलिदान के अपने कार्य के लिए हवलदार के. पलानी को मरणोपरांत “वीर चक्र” से सम्मानित किया गया।
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