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Sena Medal

सेना मेडल नायक राजेंद्र सिंह राठौड़

—— बलिदान दिवस -शौर्यनमन—–
नायक राजेंद्र सिंह राठौड़
01-01-1976 – 25-05-2005
सेना मेडल (मरणोपरांत)
वीरांगना – श्रीमती मंजू कंवर शेखावत
यूनिट – 29 राष्ट्रीय राइफल्स, 14 ग्रेनेडियर्स रेजिमेंट
आतंकवाद विरोधी अभियान
नायक राजेंद्र सिंह राठौड़ का जन्म 1 जनवरी 1976 को राजस्थान के चूरू जिले के लालगढ़ गांव में श्री अखेसिंह राठौड़ एवं श्रीमती दाखां कंवर भाटी के परिवार में हुआ था। 27 फरवरी 1996 को वह भारतीय सेना की ग्रेनेडियर्स रेजिमेंट में रंगरूट के रूप में भर्ती हुए थे। प्रारंभिक प्रशिक्षण के पश्चात उन्हें 14 ग्रेनेडियर्स बटालियन में ग्रेनेडियर के पद पर नियुक्त किया गया था।
अपनी बटालियन में विभिन्न परिचालन परिस्थितियों और स्थानों पर सेवाएं देते हुए वर्ष 2005 तक वह नायक के पद पर पदोन्नत हो गए थे। वर्ष 2005 में उनकी बटालियन को जम्मू-कश्मीर के आतंकवाद विरोधी अभियानों में 29 राष्ट्रीय राइफल्स के साथ संलग्न किया गया था। बटालियन कुपवाड़ा जिले में तैनात थी। यह जिला नियत्रंण रेखा से जुड़ा होने के कारण प्रायः यहां पाकिस्तानी की ओर से घुसपैठ के प्रयास होते रहते हैं। इस कारण सुरक्षा बलों को अत्यधिक सतर्क रहना होता है।
25 मई 2005 को गोपनीय सूत्रों से 29 राष्ट्रीय राइफल्स बटालियन को कुपवाड़ा जिले के रंगवाड़ गांव में आतंकवादियों की उपस्थिति से संबंधित विश्वसनीय सूचना प्राप्त हुई। सूचना के आधार पर बटालियन द्वारा वहां CORDON & SEARCH ऑपरेशन चलाया गया। नायक राजेंद्र सिंह एक सेक्शन के कमांडर थे।
वह सैनिकों के साथ गांव में पहुंचे और संदिग्ध क्षेत्र में घेरा डाल कर आतंकवादियों के भागने के समस्त मार्गों को अवरुद्ध कर दिया। चारों ओर से घिर जाने पर आक्रोशित आतंकवादियों ने गोलियां चलाई, जिसके परिणामस्वरूप वहां भीषण मुठभेड़ आरंभ हो गई। नायक राजेंद्र सिंह अपनी व्यक्तिगत सुरक्षा पर ध्यान नहीं देते हुए आतंकवादियों पर फायर करते रहे।
इस भयानक गोली वर्षा में आतंकवादियों से संघर्ष कर रहे एक अन्य सेक्शन का सैनिक घायल हो गया। अपने कमांडर और साथियों पर मंडराते हुए गंभीर संकट को देखकर आतंकवादियों का ध्यान भंग करने के लिए नायक राजेंद्र सिंह ने आतंकवादियों पर धावा बोल दिया। आकस्मिक हुए इस आक्रमण से अवाक हुए आतंकवादियों ने उनपर अंधाधुंध गोलियां चलाईं।
परिणामस्वरूप वह गंभीर रूप से घायल हो गए। घायल होते हुए भी अपनी जीवन सुरक्षा पर तनिक ध्यान नहीं देते हुए, दृढ़ निश्चय से उन्होंने आतंकवादियों का प्रतिरोध किया। उन्होंने एक आतंकवादी को मार दिया एवं वीरगति को प्राप्त हुए।
नायक राजेंद्र सिंह को उनके साहस, वीरता, कर्तव्य के प्रति समर्पण एवं सर्वोच्च बलिदान के लिए मरणोपरांत “सेना मेडल” (वीरता) दिया गया।
#आतंकवाद_विरोधी_अभियान_2005

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