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Untold stories of Martyrs

ऑपरेशन मेघदूत 29 मई 1987

—— बलिदान दिवस -शौर्यनमन—–
सैकिंड लेफ्टिनेंट राजीव पांडे
नायब सूबेदार हेमराज शर्मा
हवलदार मुल्कराज शर्मा
नायक कुलदीप सिंह
राइफलमैन गिरधारी लाल
राइफलमैन कश्मीरी लाल
यूनिट – 8 जेएके एलआई
ऑपरेशन मेघदूत
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सैकिंड लेफ्टिनेंट राजीव पांडे
11-04-1962 – 29-05-1987
वीर चक्र (मरणोपरांत)
सैकिंड लेफ्टिनेंट राजीव पांडे का जन्म 11 अप्रैल 1962 को, लेफ्टिनेंट कर्नल श्री आर. पी. पांडे एवं श्रीमती शकुंतला पांडे के परिवार में हुआ था। वह मध्य प्रदेश के जबलपुर नगर के निवासी थे। 8 जून 1985 को उन्हें भारतीय सेना की जम्मू एंड कश्मीर लाइट इंफेंट्री रेजिमेंट की 8 बटालियन में सैकिंड लेफ्टिनेंट के रूप में कमीशन प्राप्त हुआ था। वर्ष 1987 के आरंभ में, उन्हें विश्व के सर्वाधिक ऊंचे और कठिनतम युद्ध क्षेत्र सियाचिन ग्लेशियर क्षेत्र में तैनात किया गया था।
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1947-48 के भारत-पाकिस्तान युद्ध की समाप्ति के पश्चात जम्मू के मनावर से लद्दाख में खोर (NJ 9842) तक एक संघर्ष विराम रेखा (Cease Fire Line) स्थापित की गई, जो काराकोरम ग्लेशियरों से कुछ ही दूर है। इससे आगे कोई सटीक रेखा नहीं बढ़ाई गई और 1972 के शिमला समझौते के अंतर्गत इसी CFL को फिर से परिभाषित किया गया और नियंत्रण रेखा (LoC) नाम दिया गया।
सियाचिन क्षेत्र में पाकिस्तान द्वारा उकसावे की कार्रवाई के पश्चात, वर्ष 1984 में भारत ने ऑपरेशन मेघदूत चलाकर इस क्षेत्र पर अधिकार कर लिया। इसके पश्चात पाकिस्तान ने भी बिलाफोंड ला के दक्षिण में स्थित इस क्षेत्र की सबसे ऊंची चोटी पर अधिकार कर लिया और इस क्षेत्र में भारतीय चौकियों पर आक्रमण आरंभ कर दिए।
अप्रैल 1986 में, पाकिस्तानियों ने इस सबसे ऊंची चोटी पर एक सैन्य चौकी स्थापित की और इस चोटी का नाम पाकिस्तान के संस्थापक कायदे आजम मोहम्मद अली जिन्ना के नाम पर “कायद” पोस्ट रख दिया। कायद पोस्ट 22,153 फीट ऊंची थी और इस पर आक्रमण करना अत्यंत ही दुष्कर था। क्योंकि यह चौकी 457 मीटर ऊंची हिम की भीतों से घिरी हुई थी। तीन ओर इसका झुकाव 80° से 85° और चौथी ओर कुछ अल्प था। भारतीय सैनिकों के लिए कायद पोस्ट पर तैनात पाकिस्तानी सैनिकों की दृष्टि से ओझल होते हुए चोटी पर चढ़ना अति दुष्कर था।
18 अप्रैल 1987 को, कायद पोस्ट पर तैनात पाकिस्तानी सैनिकों ने भारत की सोनम पोस्ट पर गोला वृष्टि की, जिससे दो भारतीय सैनिक बलिदान हो गए। तब भारतीय सेना ने कायद पोस्ट पर अधिकार करने के लिए एक ऑपरेशन चलाने का निर्णय लिया। 8 जेएके एलआई बटालियन को यह कार्य सौंपा गया गया। कायद पोस्ट पर आक्रमण की साधना रचना में, सबसे पूर्व वहां तक पहुंचने के सबसे संभव मार्ग के अभिज्ञान के लिए एक टोही दल भेजने का निर्णय लिया गया।
सैकिंड लेफ्टिनेंट राजीव पांडे को 8 सैनिकों के दल के साथ यह कार्य सौंपा गया। योजनानुसार 29 मई 1987 को, सैकिंड लेफ्टिनेंट राजीव पांडे सक्रिय हुए और जलवायु की घोर प्रतिकूल स्थिति में भी उन्होंने नायब सूबेदार हेमराज शर्मा, हवलदार मुल्कराज शर्मा, नायक स्वर्ण लाल, नायक कुलदीप सिंह, लांस नायक दर्शन लाल, राइफलमैन गिरधारी लाल, राइफलमैन कश्मीरी लाल, राइफलमैन सुरमन सिंह के साथ यह कठिन कार्य आरंभ किया। उन्हें ग्लेशियर के फैलाव पर 3 किलोमीटर अनावृत स्थिति में चलकर कर 12000 फीट की एक खड़ी हिम की भीत पर चढ़ना था।
सैकिंड लेफ्टिनेंट राजीव पांडे ने अपने कौशल और प्रेरणा के साथ इंच-इंच रेंगते हुए अपने सैनिकों का नेतृत्व किया और चोटी के 30 मीटर के भीतर अनजान और दुर्गम हिम की चोटी को लांघ लिया। इस दल का कार्य कायद पोस्ट पर आक्रमण के लिए सबसे संभव मार्ग का अभिज्ञान करना और उसे रस्सियों से चिह्नित करना था। सैकिंड लेफ्टिनेंट राजीव पांडे और उनके दल ने अत्यंत चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों से संघर्ष करते हुए हिम की खड़ी भीत पर पर्वतारोहण उपकरणों से पांव रोपने के अनेक स्थान बनाए और उन्होंने शीर्ष पर एक रस्सी भी छोड़ दी थी।
किंतु, जब यह दल शीर्ष से मात्र 30 मीटर नीचे था, उसी समय, शत्रु ने उनके द्वारा लगाए जा रहे पर्वतारोहण उपकरणों की ध्वनि को सुना और वे सतर्क हो गए। शत्रु ने हैवी मशीन गन (HMG) से उनपर गोलियां चलाईं। इस भयानक गोली वर्षा में, सैकिंड लेफ्टिनेंट राजीव पांडे, नायब सूबेदार हेमराज शर्मा, हवलदार मुल्कराज शर्मा, नायक कुलदीप सिंह, राइफलमैन गिरधारी लाल एवं राइफलमैन कश्मीरी लाल वहीं वीरगति को प्राप्त हुए। इस टुकड़ी के मात्र तीन सैनिक नायक स्वर्ण लाल, लांस नायक दर्शन लाल एवं राइफलमैन सुरमन सिंह ही जीवित रहे पाए थे।
सैकिंड लेफ्टिनेंट राजीव पांडे ने उन्हें दिए गए विशेष कार्य के निष्पादन में असाधारण साहस, अनुकरणीय नेतृत्व, कर्तव्य के प्रति समर्पण का प्रदर्शन किया एवं सर्वोच्च बलिदान दिया। उन्हें मरणोपरांत “वीर चक्र” से सम्मानित किया गया।

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