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कारगिल युद्ध 9 जुलाई 1999 मेजर गौतम शशिकुमार खोत

—— शौर्य दिवस -शौर्यनमन—–
मेजर गौतम शशिकुमार खोत
वीर चक्र
यूनिट – 23 Racee & Observation Flight
आर्मी एविएशन कॉर्प्स
ऑपरेशन विजय
कारगिल युद्ध 1999
कैप्टन गौतम शशिकुमार खोत का जन्म 18 अक्टूबर 1967 को महाराष्ट्र के पूना (अब पुणे) नगर में श्री एस. बी. खोत एवं श्रीमती मीना खोत के परिवार में हुआ था। वर्ष 1984 में उन्होंने राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA), खड़कवासला में प्रवेश लिया था। तत्पश्चात भारतीय सैन्य अकादमी (IMA) देहरादून से पास आउट के पश्चात 11 जून 1988 को उन्हें कॉर्प्स ऑफ आर्मी एयर डिफेंस की, 129 एयर डिफेंस रेजिमेंट में सैकिंड लेफ्टिनेंट के रूप में कमीशन प्राप्त हुआ था।
वर्ष 1993 में उन्होंने आर्मी एविएशन कोर्स किया था और अप्रैल 1994 में उन्हें WINGS प्रदान किए गए थे। वर्ष 1999 में वह मेजर के पद पर सेवाएं दे रहे थे। कारगिल युद्ध दीर्घ समय चलने पर, 3 जून 1999 को उन्हें बरेली से श्रीनगर जाने का आदेश दिया गया था।
5 जुलाई 1999 को, मेजर खोत ‘ऑपरेशन विजय’ चलाए जा रहे क्षेत्र में गए थे। अल्प समयावधि में, उन्होंने चीता हेलिकॉप्टर से लगभग 70 घंटे उड़ान भरी और जलवायु की कठोर स्थिति में कष्टकर ऊंचाई वाले क्षेत्रों में हेलीकॉप्टर उड़ाए, कच्चे हेलीपैड पर लैंडिंग की और अनेक घायल सैनिकों के जीवन की रक्षा की।
शत्रु की तीव्र फायरिंग में उन्होंने शत्रु के संपर्क में आने वाले सैनिकों तक सफलतापूर्वक गोला-बारूद, भोजन-पानी और आवश्यक सामग्री पहुंचाई, जिससे हमारे सैनिकों का मनोबल बढ़ा और उन्हें शत्रु पर अतिरिक्त प्रहार करने में सहायता प्राप्त हुई।
19 जून 1999 को, एक अन्य अधिकारी के साथ, उन्होंने छः हताहतों को एयरलिफ्ट कर उनके जीवन की रक्षा की और 14,500 Above Mean Sea Level की ऊंचाई पर निकट के क्षेत्रों से हो रही शत्रु की प्रचंड गोला वृष्टि और शस्त्रों की प्रत्यक्ष फायरिंग में मात्र 2×2 मीटर आकार के एक अस्थाई हेलीपैड पर तोलोलिंग चोटी पर आवश्यक सामान पहुंचाया।
5 जुलाई 1999 को, एक हेलीकॉप्टर के कैप्टन के रूप में, उन्हें बकरवाल में आकाशी सहायता करने का कार्य सौंपा गया था। उन्होंने दो आकाशी सहायता उड़ानें भरीं और मश्कोह से शत्रु की तीव्र गोला वृष्टि में घिरे चार कर्मियों को निकाला।
9 जुलाई 1999 को, उन्होंने नौ आकाशी सहायता उड़ानें भरीं, जिससे शत्रु के अवलोकन और तोपखाने के भारी फायर में, मशकोह घाटी में ऑपरेशन की प्रगति के लिए पैरा ब्रिगेड को आवश्यक गोला-बारूद प्रदान किया गया। उन्होंने एक संकटमय मिशन को निष्पादित करने में अपने व्यावसायिक कौशल और वास्तविक वीरता का प्रदर्शन किया।
उन्होंने मश्कोह के उस क्षेत्र से दो हताहतों को निकाला जो शत्रु की तीव फायरिंग में घिरा हुआ था और दो और मानव जीवन की रक्षा की। मिशन को पूर्ण करने और अपने साथियों के जीवन की रक्षा के लिए मेजर खोत ने ऊंचाई वाले क्षेत्र में कठोर जलवायु और अपने जीवन पर संकट की घोर उपेक्षा करते हुए उड़ानें भरी।
मेजर गौतम शशिकुमार खोत ने शत्रु की तीव्र गोला वृष्टि में संकटमय कार्यों को निष्पादित करने में साहस और वीरता का प्रदर्शन किया। उन्हें “वीर चक्र” से सम्मानित किया गया। जनवरी 2007 से दिसंबर 2008 तक उन्होंने माधोपुर (पंजाब ) में 105 एयर डिफेंस रेजिमेंट की कमान संभाली थी और जम्मू-कश्मीर की आतंकवाद विरोधी कार्रवाईयों में विशेष भूमिका निर्वहन की थी। 12 जून 2010 को कर्नल के रूप में उन्होंने समय पूर्व स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली थी।
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