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Kargil story

कारगिल युद्ध 8 जुलाई 1999 लांस नायक राजेंद्र सिंह धामा

—— बलिदान दिवस -शौर्यनमन—–
लांस नायक राजेंद्र सिंह धामा
3182641
वीरांगना – श्रीमती मुनेश देवी
यूनिट – 17 जाट रेजिमेंट
पिंपल-2 का संग्राम
ऑपरेशन विजय
कारगिल युद्ध 1999
लांस नायक राजेंद्र सिंह का जन्म उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के खेकड़ा गांव में श्री जयसिंह धामा एवं श्रीमती शकुंतला देवी के परिवार में हुआ था। इंटर तक शिक्षा प्राप्त करने के पश्चात वर्ष 1988 में वह भारतीय सेना की जाट रेजिमेंट में रंगरूट के रूप में भर्ती हुए थे। प्रशिक्षण के पश्चात उन्हें 17 जाट बटालियन में सिपाही के पद पर नियुक्त किया गया था।
अपनी बटालियन में विभिन्न परिचालन परिस्थितियों और स्थानों पर सेवाएं प्रदान करते हुए वह लांस नायक के पद पर पदोन्नत हो गए थे। कारगिल युद्ध के समय वह अपनी बटालियन के साथ युद्धक्षेत्र में तैनात थे।
“ऑपरेशन विजय” में, 6/7 जुलाई 1999 की रात्रि में, 17 जाट बटालियन की एक कंपनी को द्रास सेक्टर की मश्कोह घाटी में हजारों फीट ऊंची, हिमाच्छादित, उबड़खाबड़, कठिन चढ़ाई की, शत्रु आर्टिलरी व स्वचालित शस्त्रों से सुसज्जित, सुदृढ़, बंकरों की पिंपल चोटियों पर अधिकार करने का कार्य सौंपा गया था।
लांस नायक राजेंद्र सिंह भी इस आक्रमणकारी कंपनी के सदस्य थे। 7/8 जुलाई को भी यह संघर्ष चलता रहा। इस संघर्ष में अदम्य साहस, दृढ़ निश्चय एवं वीरता से अपना कर्तव्य निर्वहन करते हुए वह वीरगति को प्राप्त हुए थे।

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