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कारगिल युद्ध 27 जून 1999 सिपाही (सूबेदार मेजर) सेवांग मोरूप

—— शौर्य दिवस -शौर्यनमन—–
सिपाही (सूबेदार मेजर) सेवांग मोरूप
06-06-1980 – 31-03-2023
वीर चक्र
यूनिट – 2 लद्दाख स्काउट्स
पॉइंट 5770 का संग्राम
ऑपरेशन विजय
कारगिल युद्ध 1999
सिपाही सेवांग मोरूप का जन्म 6 जून 1980 को नायब सूबेदार (सेवानिवृत्त) छेरिंग मुटुप (अशोक चक्र) के घर में हुआ था। वह जम्मू-कश्मीर के लेह के लिकिर गांव के निवासी थे। वर्ष 1999 में वह भारतीय सेना की 2 लद्दाख स्काउट्स में सिपाही के पद पर सेवाएं दे रहे थे।
कारगिल युद्ध में 18930 फीट की ऊंचाई पर पॉइंट 5770 के शीर्ष पर शत्रु का अधिकार था। शत्रु निरंतर अवलोकन और लघु शस्त्रों के फायर से भारतीय सैनिकों को विचलित कर रहा था। सिपाही सेवांग मोरुप ने एक अधिकारी की कमान में शीर्ष पर जाने का मार्ग निर्मित करने के लिए स्वेच्छा से कार्य किया। मार्ग निर्माण के लिए 1800 मीटर की हिम दरारों से युक्त खड़ी पहाड़ी पर चढ़ाई चढ़नी थी, इसके अतिरिक्त लगभग 125 डिग्री की ढलान के साथ 50 मीटर की चढ़ाई और आगे निकले हुए भाग भी थे। तीन दिनों में शीर्ष पर चढ़ने के लिए ऊर्ध्वाधर चट्टानी सतह, कंगनियों, आगे निकले भागों और हिमस्खलन संभावित क्षेत्र पर रस्सी लगाने का कार्य किया गया और 27 जून 1999 को अपरान्ह 2:00 बजे रस्सी लगाने का अंतिम चरण पूर्ण हुआ।
शत्रु तोपों और लघु शस्त्रों की विनाशकारी फायरिंग से अभीत, सिपाही सेवांग मोरूप ने आक्रमण दल के साथ सफलतापूर्वक शीर्ष चढ़ाई की और शत्रु संगरों (अस्थाई बंकर) पर आक्रमण किया। उनके दल ने प्रचंड गोली वर्षा करते हुए और हथगोले फेंकते हुए, शत्रु बंकरों को नष्ट कर शांत कर दिया। आक्रमण दल के साहसिक कार्य और वीरता से पूर्णतः अचंभित होकर शत्रु अस्तव्यस्त हो गया। सिपाही मोरुप ने अपने व्यक्तिगत शस्त्र से घातक फायरिंग कर दो शत्रु सैनिकों को मार दिया। तो भी एक अन्य संगर के चार शत्रु कर्मियों ने स्वचालित शस्त्रों के साथ आक्रमण दल से संघर्ष किया।
सिपाही मोरुप ने अपनी व्यक्तिगत सुरक्षा की घोर उपेक्षा करते हुए, दल के दो अन्य सदस्यों के साथ, सबसे दूर स्थित संगर की ओर आक्रमण किया और आगामी आमने-सामने के संघर्ष में शत्रु के प्रतिरोध को शांत कर दिया और दिन के प्रकाश में अपरान्ह 4:00 बजे तक उस सामरिक स्थिति पर अधिकार कर लिया। उनके दल ने शत्रु के केवल शस्त्र और गोला-बारूद ही नहीं अपितु चार शत्रुओं के शव भी प्राप्त किए। सिपाही सेवांग मोरूप ने शत्रु के समक्ष साहस, प्रेरक वीरता, अदम्य समर्पण और मानसिक दृढ़ता का विशिष्ट कार्य प्रदर्शित किया। उन्हें “वीर चक्र” से सम्मानित किया गया।
मार्च 2023 में वह सूबेदार मेजर के पद पर पदोन्नत हुए थे और लेह में तैनात थे। 31 मार्च 1923 को रात्रि में लेह में निमू के निकट उनका वाहन दुर्घटनाग्रस्त होकर खाई में गिर गया, जिससे वह वीरगति को प्राप्त हो गए।
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