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कारगिल युद्ध 11 जून 1999 सूबेदार बहादुर सिंह

—— बलिदान दिवस -शौर्यनमन—–
सूबेदार बहादुर सिंह
JC-203851F
10-01-1953 – 11-06-1999
वीर चक्र (मरणोपरांत)
यूनिट – 12 जम्मू एंड कश्मीर लाइट इंफेंट्री (JAK LI)
पॉइंट 5203 का संग्राम
ऑपरेशन विजय
कारगिल युद्ध 1999
सूबेदार बहादुर सिंह का जन्म 10 जनवरी 1953 को हुआ था। वह जम्मू कश्मीर के जम्मू जिले के डिगियाना कस्बे के निवासी थे। वर्ष 1971 में वह भारतीय सेना की जम्मू एंड कश्मीर लाइट इंफेंट्री रेजिमेंट में रंगरूट के रूप में भर्ती हुए थे। प्रारंभिक प्रशिक्षण के पश्चात उन्हें 12 JAK LI बटालियन में राइफलमैन के पद पर नियुक्त किया गया था। अपनी बटालियन में सेवाएं देते हुए वह सूबेदार के पद पर पदोन्नत हो गए थे। मई 1999 में उनकी बटालियन सियाचिन ग्लेशियर का 6 माह का कार्यकाल पूर्ण करके शांत स्थान पर पोस्टिंग पर जानी थी।
किंतु कारगिल युद्ध आरंभ होने पर जून 1999 में बटालियन को पॉइंट 5203 पर आक्रमण के लिए चुना गया। सूबेदार बहादुर सिंह के शरीर के कुछ स्थूलपन को देखते हुए उन्हें यह मिशन छोड़ने का विकल्प दिया गया, किंतु उन्होंने कहा कि 28 वर्ष की सैन्य सेवा में प्रथम समय युद्ध करने का अवसर प्राप्त हुआ है। यह अवसर मैं कैसे छोड़ सकता हूं ?
11 जून 1999 को सूबेदार बहादुर सिंह की प्लाटून को बटालिक सेक्टर के लगभग 17,400 फीट की ऊंचाई पर स्थित पॉइंट 5203 पर आक्रमण करने का आदेश दिया गया। सूबेदार बहादुर सिंह दो अन्य रैंक के सैनिकों के साथ छिपकर उत्तर दिशा से, एक किनारे से शत्रु चौकी के अति निकट पहुंच गए। सुदृढ़ रक्षित बंकरों में स्थिति लिए शत्रु ने स्वचालित शस्त्रों से, उनपर फायरिंग की। सूबेदार बहादुर सिंह ने निडरता से प्रचंड फायरिंग करते हुए पलटवार किया, जिससे दो शत्रु सैनिक मारे गए।
इसके पश्चात दोनों और से हुई भीषण फायरिंग में, सूबेदार बहादुर सिंह को पाकिस्तानी स्नाइपर की गोली लगने से वह गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्होंने उपचार के लिए युद्धक्षेत्र छोड़ना अस्वीकार कर दिया। अपने साथियों की सुरक्षित निकासी के लिए अंतिम श्वास तक कवरिंग फायर देते हुए वह वीरगति को प्राप्त हुए।
इस ऑपरेशन में, सूबेदार बहादुर सिंह ने अनुकरणीय साहस, दृढ़ संकल्प व सौहार्द की भावना का परिचय दिया एवं कर्तव्य के लिए बलिदान दिया। उनकी उत्कृष्ट वीरता, युद्ध की अडिग भावना, कर्तव्य के प्रति समर्पण एवं सर्वोच्च बलिदान के लिए उन्हें मरणोपरांत “वीर चक्र” से सम्मानित किया गया।

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