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Ashok Chakra

अशोक चक्र हवलदार राजेश कुमार धोचक

—— बलिदान दिवस -शौर्यनमन—–
हवलदार राजेश कुमार धोचक
2890262H
अशोक चक्र (मरणोपरांत)
वीरांगना – श्रीमती बीता देवी
यूनिट – 11 राजपुताना राइफल्स
आतंकवाद विरोधी अभियान
हवलदार राजेश कुमार का जन्म हरियाणा के सोनीपत जिले की गोहाना तहसील के लाठ गांव में, श्री रामकिशन धोचक एवं श्रीमती परमेश्वरी देवी के परिवार में हुआ था। उन्होंने अपनी प्राथमिक शिक्षा गांव के विद्यालय से प्राप्त की थी और मैट्रिक की शिक्षा राजकीय सीनियर सेकेंडरी विद्यालय, गोहाना से प्राप्त की थी।
23 फरवरी 1995 को, वह भारतीय सेना की राजपुताना राइफल्स रेजिमेंट में भर्ती हुए थे। प्रशिक्षण के पश्चात उन्हें 11 राजरिफ बटालियन में राइफलमैन के पद पर नियुक्त किया गया था। कारगिल युद्ध में, तुर्तुक के युद्ध में, विशेष प्रदर्शन के लिए उन्हें प्रशंसा पत्र दिया गया था। अपनी बटालियन में सेवाएं प्रदान करते हुए वह हवलदार के पद पर पदोन्नत हो गए थे। वर्ष 2009 में उनकी बटालियन को जम्मू-कश्मीर के आतंकवाद से अति प्रभावित कुपवाड़ा जिले में तैनात किया गया। वह 11 राजरिफ की ‘B’ कंपनी में घातक प्लाटून के सदस्य थे।
1 अगस्त 2009 को, गोपनीय सूत्रों से बटालियन को कुपवाड़ा जिले के घने बंगास जंगल में लश्कर-ए-तैयबा के आतंकवादियों के छिपे होने की विश्वसनीय सूचना प्राप्त हुई। सूचना के आधार पर जंगल में अन्वेषण अभियान चला रही घातक प्लाटून पर आतंकवादियों ने अंधाधुंध फायरिंग की। हवलदार राजेश कुमार इस घातक प्लाटून के अग्रणी सेक्शन में थे। उन्होंने प्रत्युत्तर में प्रचंड फायरिंग की और दृढ़ निश्चय से रेंगते हुए घने झाड़-झंखाड़ों में घुस कर एक आतंकवादी को मार दिया।
भीषण फायरिंग में, उनके प्लाटून कमांडर लेफ्टिनेंट अश्विन एक दिशा से हो रही प्रभावी फायरिंग में घिर गए। अपने अधिकारी के जीवन पर आसन्न गंभीर संकट को देख, अपनी व्यक्तिगत सुरक्षा की घोर उपेक्षा करते हुए, हवलदार राजेश कुमार आड़ से निकल कर उनकी ओर दौड़ पड़े। इस साहसिक प्रक्रिया में, उनके पेट में अनेक गोलियां लग गईं।
अपने घावों से अविचलित और असहनीय पीड़ा सहते हुए उन्होंने गोलियां चला कर द्वितीय आतंकवादी को भी मार दिया। इसके पश्चात अपनी अंतिम ऊर्जा एकत्र कर वह तृतीय आतंकवादी की एके-47 राइफल की बैरल पर झपटे। अति निकट से हुइ इस भयानक हाथापाई में पुनः गोलियां लगने से वह प्राणघातक रूप से घायल हो गए। उन्होंने तृतीय आतंकवादी को भी मार दिया और वीरगति को प्राप्त हुए।
हवलदार राजेश कुमार को उनकी विशिष्ट वीरता, असाधारण साहस, सौहार्द की भावना एवं सर्वोच्च बलिदान के लिए 26 जनवरी 2010 को महामहिम राष्ट्रपति द्वारा मरणोपरांत “अशोक चक्र” से सम्मानित किया गया।
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