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Ashok Chakra

अशोक चक्र हवलदार हंगपन दादा

——-शौर्यनमन——-
हवलदार हंगपन दादा (13622536 एन) का जन्म 2 अक्तूबर, 1969 में अरुणाचल प्रदेश के तिरप जिले के बोरदरिया गांव में हुआ था। उनके पिता का नाम सेनवांग दादा एवं मां का नाम तोयजीन दादा था। वे 1997 में सेना के असम रेजिमेंट में भर्ती हुए थे। बाद में उनकी तैनाती 35 राष्ट्रीय राइफल्स में की गई थी। हवलदार हंगपन अपनी टीम में दादा के नाम से जाने जाते थे। वह 2016 में हाई माऊंटेन रेंज में तैनात थे।

26 मई 2016 को जब आतंकवादियों ने जम्मू कश्मीर के कुपवाड़ा जिले के नौगाम सेक्टर में हमारी सेना से संपर्क तोड़ दिया तब हवलदार हंगपन दादा को अपने सेक्शन के साथ भाग रहे आतंकवादियों का पीछा करने और उन्हें पकड़ने का दायित्व सौंपा गया। अपने विवेक और समझ से पूर्व कमांडो दादा की टीम नियंत्रण रेखा के शामशाबारी माऊंटेन पर करीब 13000 फीट की ऊंचाई वाले बर्फीले इलाके में तेजी से आगे बढ़ी। उनकी उस संक्रिया से आतंकवादियों के बच निकलने का रास्ता बंद हो गया और वे एकदम अंचभित रह गए।

इसी बीच आतंकवादियों ने दादा की टीम पर भारी-गोलाबारी शुरू कर दी, जिसके कारण दादा की टीम आगे बढ़ पाने में असमर्थ हो गई। तब अपनी सुरक्षा की परवाह किए बिना हंगपन दादा एक ओर सरकते हुए पत्तों और बोल्डरों के पीछे छिपे आतंकवादियों के बिल्कुल नजदीक पहुंच गए और अनुकरणीय साहस और अपनी सूझ-बूझ का इस्तेमाल करते हुए दो आतंकवादियों को नजदीक से मार गिराया। इन आतंकवादियों के मारे जाने के कारण उनके साथियों की जान बच गई।
यद्यपि इस गोलाबारी में वे गंभीर रुप से घायल हो गए थे लेकिन अपने जख्मों की परवाह किए बिना उन्होंने बचे हुए आतंकवादियों का पीछा किया। उसके बाद की कार्रवाई में उनका सामना तीसरे आतंकवादी से हुआ जिसे उन्होंने हाथापाई में मार गिराया। इस प्रकार हवलदार हंगपन दादा ने ऑपरेशन के दौरान तीन आतंकवादियों को अकेले ही मार गिराया। उसके बाद उनके ऊपर चौथे आतंकवादी ने बन्दूक से प्रहार किया, किन्तु उसे भी मार गिराया गया। इस प्रकार उनकी इस कार्रवाई से चारों ही पाकिस्तानी

आंतकवादियों का सफाया हो गया जिससे वे घुसपैठ करने में नाकामयाब हो गए।

इस प्रकार हंगपन दादा ने कर्तव्य से आगे बढ़कर शूरवीरता एवं निःस्वार्थ समर्पण का प्रदर्शन किया और आतंकवादियों से लड़ते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया। 26 जनवरी 2017 को गणतंत्र दिवस परेड के अवसर पर हंगपन दादा को राष्ट्रपति श्री प्रणब मुखर्जी ने उनके द्वारा प्रदर्शित अद्भुत शौर्य के लिए उन्हें मरणोपरांत अशोक चक्र से सम्मानित किया। यह सम्मान उनके बदले में उनकी पत्नी चासेन लोआंग दादा ने ग्रहण किया।

अशोक चक्र पाने के बाद पत्रकारों से बात करते हुए हंगपन दादा की पत्नी चासेन लोवांग दादा ने कहा;

“यह बहुत बड़ा सम्मान है। मुझे अपने पति पर गर्व है। मैं चाहती हूं कि मेरी बेटी और बेटा भी सेना में जाएं और बड़े अधिकारी बनें। मैं चाहती हूं कि मेरे बच्चे बहादुर बनें और उनके लिए मुझे भी बहादुर बनना पड़ेगा।”

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