—— बलिदान दिवस -शौर्यनमन—–
सिपाही ज्ञान सिंह
06-01-1924 – 29-05-1948
वीर चक्र (मरणोपरांत)
यूनिट – 1 (पैरा) पंजाब
भारत-पाक युद्ध 1947-48
सिपाही ज्ञान सिंह का जन्म ब्रिटिश भारत में 6 जनवरी 1924 को श्री भुल्ला सिंह के घर में हुआ था। वह पंजाब के होशियारपुर जिले के पंडोरी गांव के निवासी थे।
29 मई 1948 को 1 (पैरा) पंजाब की एक कंपनी जम्मू-कश्मीर में दो चोटियों का रक्षण कर रही थी। 20 मई 1948 की भोर में शत्रु ने मीडियम मशीन गन और मोर्टार के निरंतर प्रचंड फायर किए और फायर की आड़ में दबे पांव अग्रिम प्लाटून की स्थिति के 50 गज के घेरे में आ गए।
सिपाही ज्ञान सिंह अग्रिम सेक्शन के 1 नंबर लाइट मशीन गनर थे। शत्रु का मीडियम मशीन गन और मोर्टार फायर अब अत्यंत तीव्र था और हताहत नहीं हुए स्वयं को उजागर करना संभव नहीं था।
सिपाही ज्ञान सिंह ने अपनी व्यक्तिगत सुरक्षा की पूर्ण उपेक्षा करते हुए शत्रु से संघर्ष किया और प्रचंड फायरिंग कि जिससे शत्रु को गंभीर क्षति हुई।
शत्रु की फायरिंग होते हुए भी सिपाही ज्ञान सिंह ने अपनी लाइट मशीन गन के प्रचंड फायर को अविचल रखा। उनकी गर्दन पर शत्रु की मीडियम मशीन गन की गोली लगने तक वह नहीं रुके और अंततः वीरगति को प्राप्त हुए।
सिपाही ज्ञान सिंह ने, कर्तव्य के प्रति उल्लेखनीय समर्पण, आत्म-बलिदान और साहस प्रदर्शित किया। उन्हें मरणोपरांत “वीर चक्र” से सम्मानित किया गया था।
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