भारत की धरती वीरों की जननी है। हर युग में ऐसे सपूत पैदा हुए जिन्होंने अपने प्राणों की आहुति देकर देश की रक्षा की। इन्हीं अमर वीरों में से एक नाम है –सिपाही एम. मुरली नायक । देश की सुरक्षा करते हुए मुरली नायक ने अपने प्राण न्यौछावर कर दिए। उनका यह बलिदान केवल उनके परिवार के लिए ही नहीं बल्कि पूरे राष्ट्र के लिए एक अपूरणीय क्षति थी।
उनकी शहादत हमें यह याद दिलाती है कि हमारी आज़ादी की कीमत कितनी भारी है और सैनिक किस तरह चौबीसों घंटे हमारी रक्षा के लिए तैयार रहते हैं।
जन्म और बचपन
सिपाही मुधावथ ऍम मुरली नायक का जन्म 10 अगस्त 2002 को आंध्र प्रदेश के कल्लि थंडा (श्री सत्य साईं ज़िला) में हुआ।
एक बेहद साधारण परिवार से ताल्लुक रखने वाले मुरली के पिता श्री मुधावथ श्रीराम नायक और माता श्रीमती ज्योति बाई मुंबई में मज़दूरी करते थे। परिवार आर्थिक कठिनाइयों से जूझता रहा, लेकिन मुरली बचपन से ही मेहनती, अनुशासित और देशभक्त स्वभाव के थे।
उन्होंने अपनी पढ़ाई विज्ञान हाई स्कूल , सोमनदेपल्ली से पूरी की।
स्कूल के दिनों से ही उनका सपना था – भारतीय सेना की वर्दी पहनना और मातृभूमि की रक्षा करना।
जहाँ अधिकांश युवा नौकरी और करियर की सुरक्षा तलाशते हैं, वहीं मुरली ने अपना रास्ता अलग चुना – राष्ट्र सेवा का।
सेना में भर्ती और तैनाती
दिसंबर 2022 में अग्निपथ योजना के तहत भारतीय सेना में भर्ती हुए। नासिक (देवलाली) में कठोर सैन्य प्रशिक्षण पूरा करने के बाद उन्हें 851 Light Regiment, Regiment of Artillery में शामिल किया गया। उनकी पहली तैनाती असम में हुई और फिर उन्हें भेजा गया जम्मू-कश्मीर के LoC (Line of Control) पर।
शहादत : ऑपरेशन सिंदूर
मई 2025 में आतंकियों की घुसपैठ और पाकिस्तानी फायरिंग के बीच भारतीय सेना ने ऑपरेशन सिन्दूर चलाया।ऑपरेशन सिन्दूर भारत की प्रतिक्रिया थी, जो आतंकवादी हमले के बाद की गई। यह सीमा पार आतंकी आधारों पर कार्रवाई थी। 8-9 मई 2025 की रात पाकिस्तानी सेना ने LoC पर गोलाबारी शुरू की।मुरली नायक ने बहादुरी से अपनी पोस्ट संभाली और दुश्मन को मुंहतोड़ जवाब दिया।9 मई की सुबह वह गंभीर रूप से घायल हो गए और अस्पताल ले जाते समय उन्होंने अंतिम सांस ली। उनकी उम्र उस समय सिर्फ़ 22 साल थी।
परिवार और अंतिम संस्कार
मुरली अपने माता-पिता के इकलौते बेटे थे।12 मई 2025 को उनका अंतिम संस्कार पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनके गाँव कल्लि थंडा में हुआ।हज़ारों लोग अंतिम दर्शन के लिए उमड़े। “भारत माता की जय” और “मुरली नायक अमर रहें” के नारों से गाँव गूंज उठा।
सरकार ने उनके परिवार को आर्थिक सहायता, ज़मीन और नौकरी देने की घोषणा की। गाँव का नाम बदलकर “मुरली नायक थंडा” रखने का प्रस्ताव भी रखा गया।
“शहीद वो नहीं जो देश के लिए जान देता है, बल्कि वो है जो देश की आत्मा बनकर हमेशा जीवित रहता है।”
“मुरली नायक जैसे सपूत हमें याद दिलाते हैं कि आज़ादी की कीमत वर्दी में खड़े हर जवान की कुर्बानी है।”
सिपाही एम. मुरली नायक की शहादत युवाओं के लिए प्रेरणा है। वह हमें यह संदेश देते हैं कि देश सबसे ऊपर है। आज के समय में जब हम आरामदायक जीवन जी रहे हैं, तब सीमा पर खड़ा हर सैनिक हमें सुरक्षा देने के लिए खुद को जोखिम में डाल रहा है।
सिपाही मुरली नायक सिर्फ़ एक जवान नहीं, बल्कि हिम्मत, त्याग और सच्चे देशभक्ति की प्रतिमूर्ति हैं।
उनकी कहानी हर युवा को प्रेरित करती है कि जीवन का असली अर्थ केवल जीना नहीं, बल्कि देश के लिए कुछ कर जाना है।
शत-शत नमन इस अमर वीर को।

