आज, हम सब एक वीर सपूत सर्जेंट सुरेंद्र कुमार मोगा की वीरता की कहानी जानेंगे जिन्होंने देश सेवा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया |
सुरेंद्र का जन्म एक ऐसे परिवार में हुआ, जहाँ देशसेवा की भावना खून में थी। उनके पिता, स्वर्गीय शिशपाल सिंह मोगा, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) में अपनी सेवाएँ दे चुके थे। बचपन से ही सुरेंद्र के मन में देश के लिए कुछ करने का जज़्बा था। मेहरादासी जैसे गाँव, जहाँ हर घर से कोई न कोई सैनिक निकलता है, वहाँ की मिट्टी ने सुरेंद्र को वीरता और समर्पण का पाठ पढ़ाया।
राजस्थान के झुंझुनू जिले के मेहरादासी गाँव इस छोटे से गाँव ने अपने एक लाल, सर्जेंट सुरेंद्र कुमार मोगा । 36 साल की उम्र में, भारतीय वायु सेना के इस मेडिकल असिस्टेंट ने 10 मई, 2025 को जम्मू-कश्मीर के उधमपुर में देश की सेवा करते हुए अपनी जान न्योछावर कर दी। सुरेंद्र सिर्फ़ एक सैनिक नहीं थे, बल्कि एक बेटा, एक पिता, और एक पति थे, जिनके बलिदान ने पूरे देश को गर्व और दुख से भर दिया।
1 जनवरी, 2010 को सुरेंद्र भारतीय वायु सेना में शामिल हुए और 15 साल तक एक मेडिकल असिस्टेंट के रूप में अपनी सेवाएँ दीं। उनकी मेहनत, लगन और दूसरों की मदद करने की भावना ने उन्हें सभी का प्रिय बना दिया। चाहे साथी सैनिकों की देखभाल हो या मुश्किल हालात में हिम्मत दिखाना, सुरेंद्र हमेशा आगे रहते थे।
बलिदान
10 मई, 2025 का दिन मेहरादासी और पूरे देश के लिए एक दुखद दिन बन गया। उधमपुर में ड्यूटी के दौरान सर्जेंट सुरेंद्र कुमार मोगा ने देश के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया । उनकी शहादत ने न केवल उनके परिवार, बल्कि पूरे गाँव और देश को झकझोर कर रख दिया। लेकिन इस दुख के साथ-साथ, उनके बलिदान ने हमें गर्व करने का मौका भी दिया। सुरेंद्र ने दिखाया कि सच्चा सैनिक वही है, जो अपने कर्तव्य को हर चीज़ से ऊपर रखता है।
परिवार
सुरेंद्र अपने पीछे अपनी पत्नी, एक छोटी बेटी, और एक बेटा छोड़ गए हैं। उनके परिवार के लिए यह नुकसान असहनीय है, लेकिन वे जानते हैं कि सुरेंद्र ने जो किया, वह देश के लिए था। मेहरादासी गाँव के लोग आज भी उनके घर के सामने इकट्ठा होते हैं, उनकी कहानियाँ सुनाते हैं, और उनके साहस को याद करते हैं। सुरेंद्र के पिता की तरह, अब सुरेंद्र की कहानी भी आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करेगी।
सर्जेंट सुरेंद्र कुमार मोगा की कहानी हमें सिखाती है कि देशसेवा सिर्फ़ एक नौकरी नहीं, बल्कि एक जुनून है। उन्होंने अपने जीवन से हमें यह दिखाया कि मुश्किल हालात में भी हिम्मत और इंसानियत को कभी नहीं छोड़ना चाहिए। उनकी शहादत हमें याद दिलाती है कि हमारी आज़ादी और सुरक्षा के पीछे अनगिनत सैनिकों का बलिदान है।
आज, जब हम अपने घरों में सुरक्षित बैठे हैं, तो हमें सर्जेंट सुरेंद्र जैसे वीरों को याद करना चाहिए। उनके परिवार के प्रति हमारी संवेदनाएँ हैं, और उनके साहस को हमारा सलाम।
जय हिंद!

