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Shaurya chakra

शौर्य चक्र राइफलमैन अब्दुल हमीद चारा

—— बलिदान दिवस -शौर्यनमन—–
राइफलमैन अब्दुल हमीद चारा
12974149W
08-03-1975 – 12-06-2007
शौर्य चक्र (मरणोपरांत)
वीरांगना – गुलशन अख्तर
यूनिट – 162 इंफेंट्री (TA)
आतंकवाद विरोधी अभियान
राइफलमैन अब्दुल हमीद चारा का जन्म 8 मार्च 1975 को श्री लालदीन चारा के परिवार में हुआ था। वह जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा जिले की लोलाब घाटी के दारदपुरा गांव के निवासी थे। वह जब किशोरावस्था में थे, उस समय घाटी के कुछ भागों में आतंकवाद बढ़ रहा था। एक बार अल-बर्क संगठन के आतंकवादियों ने उनका अपहरण कर लिया और उन्हें अपने संगठन में सम्मिलित होने के लिए विवश किया। किंतु कुछ दिन पश्चात उन्होंने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया।
मन से राष्ट्रवादी होने के कारण उन्होंने जम्मू-कश्मीर पुलिस के स्पेशल ऑपरेशन्स ग्रुप (SOG) के साथ कार्य किया था और अनेक सफल आतंकवाद विरोधी अभियानों के लिए महत्वपूर्ण सूचनाएं प्रदान की थीं। अपने परिजनों के जीवन पर गंभीर संकट से अभीत राइफलमैन अब्दुल हमीद लोलाब घाटी में शांति स्थापित करने के कार्य करते रहते थे।
उन्हें आतंकवादी संगठनों से घुड़की मिलती रहती थीं। एक समय आतकंवादियों ने उन्हें IED विस्फोट से मारने का असफल प्रयास किया था। उस प्रयास में असफल रहने पर वर्ष 2004 में आतंकवादियों ने उनके पिता की हत्या कर दी थी। परिणामस्वरूप, वह 162 इंफेट्री बटालियन (Territorial Army) में सम्मिलित हो गए और उन्हें 18 राष्ट्रीय राइफल्स बटालियन के साथ संलग्न किया गया था।
जून 2007 में, राइफलमैन अब्दुल हमीद जम्मू-कश्मीर के आतकंवाद विरोधी अभियानों में 18 राष्ट्रीय राइफल्स बटालियन के साथ कार्य कर रहे थे। 12 जून 2007 को, गोपनीय सूत्रों से प्राप्त हुई विश्वसनीय सूचना के आधार पर 18 राष्ट्रीय राइफल्स बटालियन की एक टुकड़ी द्वारा कुपवाड़ा जिले के गगल के अंदर-नार क्षेत्र में एक SEARCH & DESTROY अभियान आरंभ किया गया।
लगभग अपरान्ह के समय जब ऑपरेशन चल रहा था, तो राइफलमैन अब्दुल हमीद ने दो आतंकवादियों को भागने का प्रयास करते हुए देखा। उन्होंने आतकंवादियों को आगे पांच मीटर के घेरे में आने दिया और उन्होंने देखा कि आतंकवादी थोराया सैटेलाइट फोन लिए हुए थे।
उन्होंने त्वरित रेडियो सेट पर आतंकवादियों के संबंध में अपने प्लाटून कमांडर को सूचित किया और उनके भागने के मार्ग को अवरूद्ध करने के लिए नीचे घने जंगल की ओर रेंगने लगे। आतंकवादियों ने राइफलमैन अब्दुल हमीद और उनके सहकर्मियों को देख लिया और उनपर अंधाधुंध गोलियां चलाईं।
राइफलमैन अब्दुल हमीद को अनेक गोलियां लगीं और वह गंभीर रूप से घायल हो गए। किंतु घायल होते हुए भी वह सटीक फायरिंग करते रहे और आतकंवादियों के भागने के मार्ग को अवरुद्ध करने के लिए पहाड़ी से नीचे रेंगते रहे।
अदम्य साहस और युद्ध की अडिग भावना के प्रदर्शन में, उन्होंने एक आतंकवादी को मार दिया, जिसका आगे चलकर मूसा के रूप में अभिज्ञान हुआ, जो लश्कर का एक स्वयंभू जिला कमांडर था, और कथित रूप से क्षेत्र में समस्त आतंकवादी गतिविधियों का मुख्य समन्वयक था। अंततः अपने घातक घावों से वह वीरगति को प्राप्त हो गए।
राइफलमैन अब्दुल हमीद चारा को उनके असाधारण साहस, वीरता एवं सर्वोच्च बलिदान के लिए मरणोपरांत “शौर्य चक्र” से सम्मानित किया गया।
#आतंकवाद_विरोधी_अभियान_2007

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