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Shaurya chakra

शौर्य चक्र (मरणोपरांत) मेजर विनय चौधरी

—— बलिदान दिवस -शौर्यनमन—–
मेजर विनय चौधरी
IC50288M
18-01-1968 – 29-04-1999
शौर्य चक्र (मरणोपरांत)
वीरांगना – श्रीमती प्रतिमा देवी
यूनिट – 13 पंजाब रेजिमेंट
आतंकवाद विरोधी अभियान
मेजर विनय चौधरी का जन्म 18 जनवरी 1968 को हरियाणा के जींद जिले की उचाना तहसील के मंगलपुर गांव में श्री जिले सिंह लौरा एवं श्रीमती संतोष देवी के परिवार में हुआ था। 15 दिसंबर 1990 को उन्हें भारतीय सेना की पंजाब रेजिमेंट की 13 बटालियन में सैकिंड लेफ्टिनेंट के रूप में कमीशन प्राप्त हुआ था। अपनी बटालियन में भिन्न-भिन्न परिचालन परिस्थितियों व स्थानों पर सेवाएं देते हुए तथा क्रमशः पदोन्नत होते हुए वह मेजर के पद पर पदोन्नत हो गए थे।
वर्ष 1998 में मेजर चौधरी की बटालियन को जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले में आतंकवाद विरोधी अभियानों में तैनात किया गया था। 13 पंजाब बटालियन ने कश्मीर घाटी के पुलवामा जिले में एक जटिल सूचना तंत्र विकसित कर लिया था। 29 अप्रैल 1999 को बटालियन को सूचना प्राप्त हुई कि पुलिस ने टाकिया गांव में दुर्दांत आतंकवादी इकबाल गुर्जर व अन्य को घेर लिया है।
आतंकवादी इकबाल गुर्जर अक्टूबर 1998 में बटालियन के लेफ्टिनेंट अतुल कटारिया की हत्या में कथित रूप से सम्मिलित था। सूचना के आधार पर इन आतंकवादियों को निष्क्रिय करने के लिए मेजर विनय चौधरी के नेतृत्व में एक ऑपरेशन चलाने का निर्णय लिया गया। मेजर चौधरी अपने सैनिकों के साथ संदिग्ध क्षेत्र में पहुँचे और अपरान्ह 3:00 बजे तक वहां घरों की कड़ी घेराबंदी कर दी। घेराबंदी देख कर आतंकवादियों ने गोलियां चलाईं जिसके परिणामस्वरुप वहां भीषण मुठभेड़ आरंभ हो गई।
मेजर चौधरी ने अपने सटीक लक्ष्यवेधित्व से उनके CORDON पर गोलियां चला रहे एक आतंकवादी को मार दिया। आगे हुई मुठभेड़ में वे अपने साथियों की फायरिंग की आड़ में रेंग कर एक अनुकूल स्थान पर पहुंचे और द्वितीय आतंकवादी को भी मार दिया, किंतु सावधानी से तृतीय आतंकवादी की ओर सरकते हुए उनकी दांई जांघ में गोली लग गई। तिस पर भी, अविचलित मेजर चौधरी ने उस घर पर आक्रमण किया और अति निकट से तृतीय आतंकवादी को भी मार दिया। दोनों ओर से हुई भयानक गोली वर्षा में मेजर चौधरी गंभीर रूप से घायल हो गए और चिकित्सालय ले जाने से पूर्व ही वीरगति को प्राप्त हो गए।
मेजर विनय चौधरी को उनके अदम्य साहस, दृढ़ संकल्प, प्रेरणादायक नेतृत्व एवं सर्वोच्च बलिदान के लिए 26 जनवरी 2000 को मरणोपरांत “शौर्य चक्र” सम्मान दिया गया।
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