shauryasaga.com
Param Veer Chakra

परम वीर चक्र (मरणोपरांत), राजपूत रेजिमेंट नायक जदुनाथ सिंह

नायक जदुनाथ सिंह

परम वीर चक्र (मरणोपरांत), राजपूत रेजिमेंट

 

नायक जदुनाथ सिंह (नं-27373) का जन्म 21 नवंबर, 1916 को गांव खजूरी, शाहजहांपुर, उत्तर प्रदेश में हुआ था। उनके पिता का नाम श्री बीरबल सिंह था। वे 21 नवंबर, 1941 को राजपूत रेजिमेंट में भर्ती हुए थे।

24 दिसंबर, 1947 को झंगर पर कब्जा करने के बाद नौशेरा सेक्टर में पाकिस्तानी कबायलियों की स्थिति मजबूत हो गई थी। मीरपुर से पुंछ तक की संचार लाइन पर पूरा अधिकार हो जाने के कारण वे अब नौशेरा पर हमले के लिए अपनी सेना को तैयार कर सकते थे। भारतीयों को इस खतरे का एहसास था। अतः जनवरी 1948 में उन्होंने नौशेरा से उत्तर-पश्चिम में स्थित कोट गांव पर कब्जा कर लिया था।

नौशेरा पर शत्रु का हमला निश्चित था अतः 50 पैरा ब्रिगेड के कमांडर ब्रिगेडियर मोहम्मद उस्मान ने दुश्मन के आक्रमण के सभी संभावित रास्तों पर अपनी चौकियां बनाकर इसे नाकाम करने की पूरी तैयारी कर ली थीं इनमें एक रास्ता नौशेरा के उत्तर में तैन धार से होकर जाता था।

शत्रु का संभावित हमला 6 फरवरी को सुबह 6:40 बजे धुंधलके में हुआ। दुश्मन ने तैन धार की पहाड़ी पर स्थित अपने ठिकाने से एक भारतीय पेट्रोलिंग पर गोलीबारी शुरू कर दी। इसके साथ ही सारा तैन धार फीचर और उसके आसपास की पहाड़ियां मशीन गन और मोर्टार की फायर से गूंज उठीं। इसी बीच अंधेरे का फायदा उठाकर दुश्मन भारतीय पिकेटों तक घुस आए। पौ फटते ही चौकी स्थित भारतीयों ने हजारों दुश्मनों को अपनी ओर बढ़ते देखा।

6 फरवरी के निर्णायक दिन नायक जदुनाथ सिंह तैन धार स्थित पिकेट नम्बर 2 की अग्रिम चौकी की कमान संभाले हुए थे। इस छोटी चौकी की रखवाली 9 सैनिक कर रहे थे। इस चौकी पर कब्जा पाने के लिए शत्रु ने एक के बाद एक कई हमले किए। पहले आक्रमण के दौरान शत्रु चौकी तक आ पहुंचा। तब इस कठिन परिस्थिति में नायक जदुनाथ सिंह ने पराक्रम और उत्कृष्ट नेतृत्व का परिचय देते हुए अपनी छोटी सी टुकड़ी का इस प्रकार संचालन किया कि दुश्मन घबराकर वापस लौट गया। जब उनके चार सैनिक घायल हो गए तो उन्होंने अपनी थकी-मांदी टुकड़ी को दूसरे हमले का मुकाबला करने के लिए पुनः संगठित किया।

जब वे अपने सारे सैनिकों सहित घायल हो गए तब उन्होंने घायल गनर से ब्रेनगन ले ली। दुश्मन अब सीधे चौकी की दीवार तक पहुंच गया था। अपनी सुरक्षा की परवाह न करते हुए नायक जदुनाथ सिंह साथी सैनिकों को लड़ने के लिए उत्साहित करते रहे। उनकी गोलियों की बौछार शत्रु के लिए इतनी विनाशकारी साबित हुई कि एक निश्चित हार, जीत में बदल गई। दुश्मन मृतकों और घायलों को युद्ध भूमि में ही छोड़कर घबरा कर भाग गया। इस प्रकार चौकी को दूसरी बार भी बचा लिया गया। अब तक चौकी के सभी लोग हताहत हो चुके थे। तभी शत्रु ने चौकी पर अधिकार करने का संकल्प कर बड़ी संख्या में तीसरा और अंतिम धावा बोला। अकेले और घायल नायक जदुनाथ सिंह ने एक बार फिर शत्रु से लोहा लेने की ठानी। वे अपने खाई से बाहर आए और स्टेनगन से गोलीबारी करते हुए शत्रु पर टूट पड़े। हतोत्साहित दुश्मन भाग खड़ा हुआ। परंतु इस तीसरे और अंतिम आक्रमण में वे वीर गति को प्राप्त हुए। दो गोलियां उनके सीने और सिर को पार कर गई थीं। नौशेरा की लड़ाई के इस बहुत ही नाजुक मोड़ पर उन्होंने अपनी पिकेट को दुश्मन के हाथों में पड़ने से बचा लिया।

नायक जदुनाथ सिंह को उनके अद्भुत साहस एवं उत्कृष्ट नेतृत्व के लिए मरणोपरांत परम वीर चक्र से सम्मानित किया गया।

 

जय हिन्द जय भारत

(साभार – गूगल , पराक्रम गाथा सूचना और प्रसारण मंत्रालय भारत सरकार, विजय सोहनी, पेन टुडे, #shauryanamanfoundation)

#आतंकवाद_विरोधी_अभियान_2016
#kritichakra#kargil  #NGOs #ngo #foryou #everyone #martyrs #ngoformartyrs
#awards #सम्मान #bestngo #bestngoformartyrs #MartyrsFamily #massage #TodayInHistory #today #bharat #bestfortoday #bestforyou #ngoforshaheed #bestngoforshaheed
#Kargil28RashtriyaRifle#bhagatsingh #sukhdev #rajguru
#IndianArmedForces
#IndianArmyDay
#JaiHind
#SaluteToIndianArmy
#ArmyStrong
#SiachenWarriors
https://www.shauryanaman.com/
https://www.shauryanaman.org/
:Follow on Instagram
https://www.instagram.com/shauryanamanngo/
:Follow on Facebook
https://www.facebook.com/ShauryaNamanNGO
:Subscribe on YouTube
https://www.youtube.com/c/shauryanaman
:#Id :-  shauryanaman2019@gmail.com
:#Contact
+91 91110-10007-8

Related posts

परम वीर चक्र, सिख रेजिमेंट लांस नायक करम सिंह  

Shivam Shahi

Major Dhan Singh Thapa मेजर धन सिंह थापा: 1962 के युद्ध का अमर नायक

shauryaadmin

परम वीर चक्र कैप्टन विक्रम बत्रा

Chandra kishore

Leave a Comment