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Maha Veer Chakra

महावीर चक्र राइफलमैन धौंकल सिंह भाटी

—— बलिदान दिवस -शौर्यनमन—–
राइफलमैन धौंकल सिंह भाटी
2831725P
01-12-1923 – 30-04-1948
महावीर चक्र (मरणोपरांत)
यूनिट – 6 राजपुताना राइफल्स
उरी का युद्ध
भारत-पाक युद्ध 1947-48
राइफलमैन धौंकल सिंह भाटी का जन्म 1 दिसंबर 1923 को राजस्थान के जोधपुर जिले की शेरगढ़ तहसील के सेखाला (जूनावास) गाँव में श्री सिमरथ सिंह भाटी एवं श्रीमती मोती कँवर के परिवार में हुआ था। वर्ष 1944 में 21 वर्ष की आयु में वह ब्रिटिश-भारतीय सेना की राजपुताना राइफल्स रेजिमेंट में रंगरूट के रूप में भर्ती हुए थे। प्रारंभिक प्रशिक्षण के पश्चात उन्हें 6 राजरिफ बटालियन में राइफलमैन के पद पर नियुक्त किया गया था।
—– उरी ऑपरेशन 1948 —–
स्वतंत्रता के पश्चात 22 अक्टूबर 1947 को जम्मू-कश्मीर राज्य पर कबाईली आक्रमण होने के पश्चात भारत, पाकिस्तान से युद्ध लड़ रहा था। अप्रैल 1948 में जब उरी सेक्टर में शत्रु की गतिविधियां बढ़ गई। तब 6 राजरिफ बटालियन को उरी सेक्टर में तैनात किया गया था। राजरिफ दो अन्य भारतीय बटालियन के साथ वहां रक्षण कर रही थी। 18 अप्रैल को, शत्रु ने 6 राजरिफ के दो पिकेटों पर आक्रमण किया, किंतु राजरिफ के पलटवार से शत्रु को वहां से भागना पड़ा और उसके अनेक सैनिक मारे गए। 29 अप्रैल को 6 राजरिफ की टुकड़ियों को नलवा पिकेट पर अधिकार करने का आदेश दिया गया, नलवा पिकेट को सामरिक महत्व के कारण “उरी का मोर्चा” भी कहा जाता था।
30 अप्रैल 1948 की रात्रि 8:00 बजे राइफलमैन धौंकल सिंह अपनी प्लाटून को निर्देश देते हुए उसकी अगुवाई कर रहे थे। उरी के दक्षिण में पॉइंट 8370 का मार्ग एक लंबे संकरे उभार के साथ था, जो चीड़ की लकड़ियों से ढका था। शत्रु ने आगे बढ़ रही प्लाटून की गतिविधियों का अवलोकन कर लिया, वह प्लाटून के फायरिंग रेंज में आने की प्रतीक्षा कर रहा था। जैसे ही, यह प्लाटून शत्रु के एक बंकर के 30 गज समीप पहुंची, शत्रु ने लाइट मशीनगन (LMG) से प्लाटून पर भयानक फायरिंग आरंभ कर दी।
राइफलमैन धौंकल सिंह प्लाटून की अगुवाई कर रहे थे अतः, उनके बांए कंधे में सर्वाधिक गोलियां लगने से वह घायल हो गए। यद्यपि, प्लाटून को अप्रत्याशित आक्रमण का सामना करना पड़ा, तो भी शत्रु की गोलियों से अपना रक्षण करने और परिस्थिति को समझने के लिए, राइफलमैन धौंकल सिंह त्वरित रेंगने की स्थिति में आ गए।
राइफलमैन धौंकल सिंह ने शीघ्र ही अनुभव किया कि प्लाटून की रक्षा करने और आगे बढ़ाने के लिए किसी न किसी प्रकार से शत्रु की लाइट मशीन गन को शांत करना आवश्यक है। इसके पश्चात राइफलमैन धौंकल सिंह एक दिशा से रेंगते हुए शत्रु की मशीनगन पोस्ट की ओर बढ़े, तथा कुछ गज निकट से हथगोला फेंक कर उस पोस्ट को ध्वस्त कर दिया, जिससे शत्रु के तीन सैनिक मारे गए।
इस साहसिक कार्रवाई से शत्रु चकित रह गया और वहां से हट गया, किंतु इस भयानक और वीरतापूर्ण कार्रवाई में गोले के विस्फोट से राइफलमैन धौंकल सिंह को छाती और मुख पर अनेक घाव लगे। अपने रक्त बहते और कष्टदाई घावों के उपरांत भी राइफलमैन धौंकल सिंह आगे बढ़े और भागते हुए शत्रु पर द्वितीय हथगोला फेंका, जिससे शत्रु का एक कमांडर और दो सैनिक मारे गए। उनका सेक्शन जब लक्ष्य तक पहुँचा तो राइफलमैन धौंकल सिंह अपने अत्यधिक बहते रक्त में भीग चुके थे और वीरगति को प्राप्त हुए।
राइफलमैन धौंकल सिंह भाटी को उनके अदम्य साहस, प्रचंड वीरता, युद्ध की अडिग भावना एवं सर्वोच्च बलिदान के लिए मरणोपरांत “महावीर चक्र” सम्मान दिया गया।

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