आज हम भारतीय सेना के एक वीर सपूत, Lieutenant colonel Gaurav Solanki लेफ्टिनेंट कर्नल गौरव सोलंकी को श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं। Lieutenant colonel Gaurav Solanki गौरव सोलंकी, जो 12 PARA (SF) और 6 JAT रेजिमेंट से थे, ने अपने असाधारण साहस, निस्वार्थ सेवा और देशभक्ति के साथ न केवल भारतीय सेना, बल्कि पूरे देश का गौरव बढ़ाया। सेना मेडल (SM) से सम्मानित इस वीर सैनिक Lieutenant colonel Gaurav Solanki ने 2019 में संयुक्त राष्ट्र (UN) मिशन के दौरान कांगो में अपने प्राणों की आहुति दी, जब उन्होंने एक सहकर्मी की जान बचाने के लिए अपनी जान जोखिम में डाल दी। उनकी यह कहानी हर भारतीय के लिए प्रेरणा का स्रोत है और हमें यह सिखाती है कि सच्चा सैनिक वही है जो “राष्ट्र प्रथम” के सिद्धांत को अपने जीवन का आधार बनाता है।
प्रारंभिक जीवन और सेना में योगदान
Lieutenant colonel Gaurav Solanki लेफ्टिनेंट कर्नल गौरव सोलंकी का जन्म नई दिल्ली में एक सैन्य परिवार में हुआ था। उनके पिता भी एक सैन्य अधिकारी थे, जिससे गौरव को देश सेवा की प्रेरणा विरासत में मिली। उन्होंने दिसंबर 2002 में राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) से स्नातक किया और 2004 में 6 JAT रेजिमेंट में कमीशन प्राप्त किया। साहस और उत्साह से भरे गौरव ने बाद में विशेष बलों (Special Forces) में शामिल होने के लिए स्वेच्छा से आवेदन किया और 12 PARA (SF) के साथ अपनी सेवाएँ दीं।
Lieutenant colonel Gaurav Solanki अपने 15 साल के सैन्य करियर में, गौरव ने जम्मू-कश्मीर, मणिपुर और आगरा जैसे विभिन्न क्षेत्रों में अपनी सेवाएँ दीं। विशेष रूप से, उन्होंने कुपवाड़ा जिले में 4 PARA (SF) के साथ सेवा करते हुए आतंकवाद विरोधी अभियानों में हिस्सा लिया, जिसके लिए उन्हें सेना मेडल (SM) से सम्मानित किया गया। उनकी यह उपलब्धि उनके साहस, नेतृत्व और कर्तव्यनिष्ठा का प्रतीक थी। गौरव न केवल एक उत्कृष्ट सैनिक थे, बल्कि एक शानदार व्यक्ति भी थे, जो हमेशा अपने सहकर्मियों और देश को सर्वोच्च प्राथमिकता देते थे।
कांगो में UN मिशन और बलिदान

2019 में, Lieutenant colonel Gaurav Solanki लेफ्टिनेंट कर्नल गौरव सोलंकी को संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन (MONUSCO) के तहत कांगो में एक सैन्य स्टाफ अधिकारी के रूप में तैनात किया गया था। यह मिशन उनके करियर का एक महत्वपूर्ण हिस्सा था, और वह जल्द ही पूर्ण कर्नल के रूप में 12 PARA (SF) के कमांडिंग ऑफिसर के रूप में पदभार संभालने वाले थे। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था।
8 सितंबर 2019 को, Lieutenant colonel Gaurav Solanki अपने कुछ सहकर्मियों के साथ कांगो के कीवु झील में कयाकिंग के लिए गए। इस दौरान, एक सहकर्मी की कयाक पलट गई और वह झील में डूबने लगा। गौरव, जो एक कुशल तैराक थे, ने तुरंत अपनी लाइफ जैकेट उतारी और अपने सहकर्मी को बचाने के लिए झील में छलांग लगा दी। उनकी इस निस्वार्थ कार्रवाई के कारण सहकर्मी तो सुरक्षित किनारे तक पहुँच गया, लेकिन गौरव स्वयं लापता हो गए। कीवु झील की मजबूत धाराएँ और मीथेन गैस की उपस्थिति ने स्थिति को और जटिल बना दिया।
चार दिनों तक चले गहन खोज और बचाव अभियान के बाद, 12 सितंबर 2019 को Lieutenant colonel Gaurav Solanki का शव कीवु झील से बरामद किया गया। उनकी इस बलिदानी कार्रवाई ने न केवल उनकी वीरता को दर्शाया, बल्कि यह भी साबित किया कि एक सच्चा सैनिक अपने साथियों और कर्तव्य के लिए किसी भी हद तक जा सकता है।
एक सैनिक, एक मित्र, एक परिवारवादी
Lieutenant colonel Gaurav Solanki लेफ्टिनेंट कर्नल गौरव सोलंकी को उनके सहकर्मी और दोस्त “जोश बॉक्स” के रूप में याद करते हैं। वह एक ऐसे अधिकारी थे, जो हमेशा दूसरों को प्रेरित करते थे। उनके भाई के अनुसार, गौरव अपनी उपलब्धियों के बारे में कभी बात नहीं करते थे। उनके मेडल और ट्रॉफियाँ उनके घर के एक कोने में चुपके से रखी रहती थीं, और जब उनसे इसके बारे में पूछा जाता, तो वह मुस्कुराकर बात बदल देते। उनके लिए देश और सेना ही सब कुछ था।
Lieutenant colonel Gaurav Solanki गौरव अपनी पत्नी और दो बच्चों के साथ एक प्रेमी पति और पिता भी थे। 2018 में आगरा में अपनी अंतिम तैनाती के दौरान परिवार ने उन्हें आखिरी बार देखा था। उनके बलिदान ने उनके परिवार के लिए एक अपूरणीय क्षति छोड़ी, लेकिन उनकी वीरता और समर्पण की कहानी आज भी हर भारतीय के दिल में जीवित है।
राष्ट्र प्रथम: गौरव सोलंकी का संदेश

Lieutenant colonel Gaurav Solanki लेफ्टिनेंट कर्नल गौरव सोलंकी का जीवन और बलिदान हमें “राष्ट्र प्रथम” के सिद्धांत को जीने की प्रेरणा देता है। उनकी कहानी हमें सिखाती है कि सच्चा साहस न केवल युद्ध के मैदान में, बल्कि हर उस पल में दिखता है जब हम दूसरों की भलाई के लिए स्वयं को जोखिम में डालते हैं। गौरव ने अपने सहकर्मी की जान बचाने के लिए अपनी जान की परवाह नहीं की, और यह उनकी सैन्य प्रशिक्षण और मूल्यों का प्रतीक है।
Lieutenant colonel Gaurav Solanki उनके बलिदान ने हमें यह भी याद दिलाया कि एक सैनिक का जीवन कितना चुनौतीपूर्ण और बलिदान से भरा होता है। उनके परिवार ने भी उनकी अनुपस्थिति में गर्व के साथ इस दुख को सहा, जो हर सैनिक परिवार की ताकत को दर्शाता है।
श्रद्धांजलि और स्मरण
आज हम Lieutenant colonel Gaurav Solanki लेफ्टिनेंट कर्नल गौरव सोलंकी को नमन करते हैं। उनकी वीरता, निस्वार्थता और देशभक्ति की कहानी हर भारतीय को प्रेरित करती रहेगी। वह एक सच्चे योद्धा थे, जिन्होंने अपने कर्तव्य को सर्वोपरि रखा और अपने जीवन की अंतिम साँस तक “राष्ट्र प्रथम” के सिद्धांत को जिया।
हम उनके परिवार के प्रति अपनी संवेदनाएँ व्यक्त करते हैं और प्रार्थना करते हैं कि ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करे। लेफ्टिनेंट कर्नल गौरव सोलंकी जैसे वीर सपूतों के कारण ही हमारा देश सुरक्षित और गौरवमयी है।
ॐ शांति।

