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Sena Medal

सेना मेडल मेजर भानु प्रताप सिंह राठौड़

—— बलिदान दिवस -शौर्यनमन—–
मेजर भानु प्रताप सिंह राठौड़
IC65695F
सेना मेडल (मरणोपरांत)
वीरांगना – डॉ. श्रीमती सारिका सिंह
यूनिट – 43 राष्ट्रीय राइफल्स/8 राजपुताना राइफल्स
ऑपरेशन रक्षक
आतंकवाद विरोधी अभियान
मेजर भानु प्रताप सिंह का जन्म राजस्थान के चूरू जिले के लोहसना बड़ा गांव के मूल निवासी एडीशनल एसपी राजेन्द्र सिंह राठौड़ एवं श्रीमती पद्मा कंवर के परिवार में हुआ था।
वर्ष 2001 में उन्हें भारतीय सेना की राजपुताना राइफल्स रेजिमेंट की 8 बटालियन में लेफ्टिनेंट के रूप में कमीशन प्राप्त हुआ था। इससे पूर्व उन्होंने दो समय COMBINED DEFENCE SERVICES (CDS) की परीक्षा उत्तीर्ण की थी, किंतु उनकी माता सैन्य सेवा के लिए सहमत नहीं हुई थी। तृतीय समय CDS परीक्षा उत्तीर्ण करने पर मेजर भानु प्रताप ने उन्हें इसके लिए सहमत किया था।
वर्ष 2008 में, मेजर भानु प्रताप सिंह प्रतिनियुक्ति पर जम्मू-कश्मीर के आतंकवाद विरोधी अभियानों में 43 राष्ट्रीय राइफल्स बटालियन के साथ संलग्न थे। उनके जीवन के अंतिम ऑपरेशन से पूर्व उन्हें 43 RR से स्थानांतरित भी कर दिया गया था। वह अन्य ऑफिसर को चार्ज देने ही वाले थे, किंतु उनके भाग्य में कुछ और ही था।
19 जुलाई 2008 की रात्रि में, गोपनीय सूत्रों से सुरक्षा बलों को, जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले की थाना मंडी तहसील के कुंडा क्षेत्र में लश्कर-ए-तैयबा के आतंकवादियों की उपस्थिति से संबंधित विश्वसनीय सूचना प्राप्त हुई। इस सूचना के आधार पर सेना और जम्मू-कश्मीर पुलिस SOG के संयुक्त खोजी दल ने रात्रि के समय CORDON & SEARCH अभियान आरंभ किया।
20 जुलाई, 2008 की भोर में, मेजर भानु प्रताप सिंह एक विशिष्ट INPUT के आधार पर आरंभ किए गए ऑपरेशन रक्षक के कमांडर थे। एक ढोक में छिपे हुए आतकंवादी घिर जाने से पूर्ण रूप से अनभिज्ञ और स्तब्ध थे। आतंकवादी भाग ना जाएं, यह सुनिश्चित करने के लिए वह अपने साथी के साथ ढोक में प्रवेश कर गए।
भीषण मुठभेड़ में आतंकवादियों ने इस राष्ट्रीय राइफल्स टुकड़ी पर अंधाधुंध फायरिंग की और हथगोले फेंके।
आतंकवादियो की फायरिंग में आघात लगने और गंभीर रूप से घायल होते हुए भी, अपनी व्यक्तिगत सुरक्षा की घोर उपेक्षा करते हुए, मेजर राठौड़ ने सटीक फायरिंग की और अपनी टुकड़ी और भीतर घिरी एक वृद्ध महिला को सुरक्षित बाहर निकाला। वह अंतिम श्वास तक आतंकवादियों से संघर्ष करते रहे।
मेजर राठौड़ को, उनके अनुकरणीय साहस, कर्तव्य के प्रति परम समर्पण, प्रेरणादायक नेतृत्व के लिए मरणोपरांत सेना मेडल (वीरता) से सम्मानित किया गया।
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