—— बलिदान दिवस -शौर्यनमन—–
कैप्टन रामचंद्रन सुब्रमण्यम
IC56963Y
12-08-1976 – 19-06-2000
कीर्ति चक्र (मरणोपरांत)
यूनिट – 1 पैराशूट रेजिमेंट (SF)
ऑपरेशन रक्षक 2000
कैप्टन रामचंद्रन सुब्रमण्यम का जन्म 12 अगस्त 1976 को मुंबई के गोरेगांव में श्री एस. रामचंद्रन एवं श्रीमती सुब्बालक्ष्मी के परिवार में हुआ था। जुलाई 1993 में उनका NDA में चयन हुआ। वर्ष 1996 में वे एकेडमी से स्नातक हुए। वर्ष 1997 में उन्होंने IMA देहरादून से ट्रेनिंग पूरी की। 7 जून 1997 को उन्हें भारतीय सेना की 1 पैराशूट रेजिमेंट में सैकिंड लेफ्टिनेंट के रूप में कमीशन प्राप्त हुआ था। फरवरी 2000 में इन्हें आतंकवाद विरोधी अभियानों के लिए कश्मीर में ऑपरेशन रक्षक में तैनात किया गया व वर्ष 2000 में उन्हें कैप्टन रैंक पर पदोन्नति प्राप्त हुई।
18 जून 2000 को कश्मीर घाटी के कुपवाड़ा जिले के हफरुदा जंगल के ऑपरेशन में कैप्टन सुब्रमण्यम ट्रूप कमांडर के रूप में एक टुकड़ी का नेतृत्व कर रहे थे। सांय लगभग 6:30 बजे उनके सैनिकों पर 10-15 विदेशी आतंकवादियों के एक समूह ने फायरिंग की। स्थिति का त्वरित विश्लेषण करते हुए कैप्टन सुब्रमण्यम ने अपने सैनिकों को इस प्रतिकूल व कठिन क्षेत्र में तैनात किया व उनका नेतृत्व करते हुए आतंकवादियों से संघर्ष किया।
उनकी इस साहसिक कार्रवाई के परिणामस्वरूप उनके सैनिक मुठभेड़ के संकटग्रस्त क्षेत्र से सुरक्षित निकले और आतंकवादियों को टक्कर दी। कैप्टन सुब्रमण्यम ने आतंकवादियों पर दबाव बनाए रखा व संपूर्ण रात्रि आगे का संघर्ष चलता रहा। इस मुठभेड़ में अनेक आतंकवादी मारे गए।
दूसरे दिन प्रातः कैप्टन सुब्रमण्यम और उनके साथी मुठभेड़ वाले स्थान पर पहुंचे। जब वे मारे गए आतंकवादियों के शव वहां से हटा रहे थे, उसी समय एक सुरक्षित स्थान पर छिपे हुए तीन आतंकवादियों ने उनकी टुकड़ी पर प्रभावी फायरिंग की। अपने सैनिकों के जीवन पर आसन्न गंभीर संकट को देख कर कैप्टन सुब्रमण्यम ने आतंकवादियों पर आक्रमण किया और दो आतंकवादियों को मार दिया। दोनों ओर से हुई भीषण फायरिंग में कैप्टन सुब्रमण्यम को गर्दन व कंधे पर गोलियां लग गईं। तो भी, अविचलित फायर करते हुए वह आगे बढ़ते रहे व उन्होंने तीसरे आतंकवादी को भी मार दिया, किंतु उनके मुख व सिर में और गोलियां लग गईं।
कैप्टन सुब्रमण्यम को त्वरित वहां से निकाला गया व हेलिकॉप्टर से हॉस्पिटल ले जाया गया जहां वह वीरगति को प्राप्त हो गए। इस मुठभेड़ में कुल नौ कट्टर विदेशी आतंकवादी मारे गए थे।
कैप्टन सुब्रमण्यम को उनके अदम्य साहस, वीरता, दृढ़ निश्चय एवं कर्तव्य के प्रति निस्वार्थ समर्पण के लिए मरणोपरांत “कीर्ति चक्र” से सम्मानित किया गया।
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