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कारगिल युद्ध 9 जुलाई 1999 नायब सूबेदार करनैल सिंह

—— बलिदान दिवस -शौर्यनमन—–
नायब सूबेदार करनैल सिंह
JC498695P
04-04-1962 – 09-07-1999
वीर चक्र (मरणोपरांत)
वीरांगना – श्रीमती रंजीत कौर
यूनिट – 8 सिख रेजिमेंट
टाईगर हिल का संग्राम
ऑपरेशन विजय
कारगिल युद्ध 1999
नायब सूबेदार करनैल सिंह का जन्म 4 अप्रैल 1962 को पंजाब के अमृतसर (वर्तमान तरनतारन) जिले की खडूर साहिब तहसील के रानीवाला गांव में हुआ था। शिक्षा पूर्ण करने के पश्चात वह भारतीय सेना की सिख रेजिमेंट में रंगरूट के रूप में भर्ती हुए थे। प्रशिक्षण के पश्चात उन्हें 8 सिख बटालियन में सिपाही के पद पर नियुक्त किया गया था।
अपनी बटालियन में विभिन्न परिचालन परिस्थितियों और स्थानों पर सेवाएं देते हुए, वह नायब सूबेदार के पद पर पदोन्नत हो गए थे। कारगिल युद्ध के समय वह अपनी बटालियन के साथ युद्धक्षेत्र में तैनात थे।
“ऑपरेशन विजय” में, 5 जुलाई 1999 की भोर में 4:00 बजे, 8 सिख की एक टुकड़ी ने टाईगर हिल के पश्चिमी स्कंध पर इंडिया गेट और हेलमेट पर अधिकार कर लिया और इससे टाईगर हिल टॉप पूर्ण रूप से कट गया। नायब सूबेदार करनैल सिंह पांच सैनिकों के साथ हेलमेट में पिछली ढलान पर तैनात थे। टाईगर हिल टॉप पर टिके रहने और आपूर्ति के लिए पश्चिमी मार्ग को खुला रखने के लिए शत्रु अधीर हो गया।
6 जुलाई 1999 की प्रातः 6:00 बजे शत्रु ने टाईगर हिल, चार्ली फीचर, रॉकी नॉब और ट्रिंग हाइट से तोपों की भयानक गोला वृष्टि की। शत्रु ने आरंभ में तीन दिशाओं से प्रचंड फायरिंग की और इसके पश्चात 15 सैनिकों के साथ नायब सूबेदार करनैल सिंह की स्थिति पर पलटवार किया। नायब सूबेदार करनैल सिंह ने निकट आ रहे शत्रुओं पर स्वचालित शस्त्रों के फायर को निर्देशित किया और वहां आमने-सामने का भीषण युद्ध हुआ।
नायब सूबेदार करनैल सिंह ने प्रचंड वीरता से शत्रु से संघर्ष किया और शत्रु का पलटवार विफल नहीं होने तक जूझते रहे। भीषण मुठभेड़ में वह गंभीर रूप से घायल हो गए। इसके पश्चात, शत्रु ने 40 से 45 सैनिकों के साथ द्वितीय पलटवार किया। गंभीर रूप से घायल होते हुए भी नायब सूबेदार करनैल सिंह ने शत्रु को चुनौती दी और अपने सैनिकों के साथ शत्रु पर आक्रमण किया।
नायब सूबेदार करनैल सिंह ने, अति निकट के संघर्ष में शत्रु को गंभीर क्षति पहुंचाई। उन्होंने चार शत्रु सैनिकों को मार दिया और अनेक को घायल कर दिया, जिससे शत्रु भागने पर विवश हो गए। नायब सूबेदार करनैल सिंह और उनके सैनिकों ने शरीर में चेतना रहने तक शत्रु को आगे नहीं बढ़ने दिया। अंततः नायब सूबेदार करनैल सिंह और उनके समस्त सैनिक घातक घावों से वीरगति को प्राप्त हुए।
नायब सूबेदार करनैल सिंह ने विशिष्ट वीरता, प्रचंड साहस और कर्तव्य के प्रति असाधारण समर्पण का प्रदर्शन करते हुए, भारतीय सेना की सर्वोच्च परंपराओं और राष्ट्र की सेवा में अपने जीवन का सर्वोच्च बलिदान दिया। उन्हें मरणोपरांत “वीर चक्र” से सम्मानित किया गया। पंजाब सरकार ने रानीवाला गांव के राजकीय विद्यालय का नामकरण उनके नाम पर किया है।
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