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Kargil story

कारगिल युद्ध 30 मई 1999 सूबेदार हरफूल सिंह कुलहरी

—— बलिदान दिवस -शौर्यनमन—–
सूबेदार हरफूल सिंह कुलहरी
JC183456
02-06-1952 – 30-05-1999
Mention – in – Despatches
वीरांगना – श्रीमती सुकनी देवी
यूनिट – 17 जाट रेजिमेंट
मश्कोह का रण
ऑपरेशन विजय
कारगिल युद्ध 1999
सूबेदार हरफूल सिंह कुलहरी का जन्म 2 जून 1952 को राजस्थान के झुंझुनूं जिले के तिलोका का बास गांव में श्री भागीरथ मल कुलहरी एवं श्रीमती झूमा देवी के परिवार में हुआ था। साधारण शिक्षा प्राप्त करने के पश्चात 4 अगस्त 1971 को वह भारतीय सेना की जाट रेजिमेंट में रंगरूट के रूप में भर्ती हुये थे। प्रशिक्षण के पश्चात उन्हें 17 जाट बटालियन में सिपाही के पद पर नियुक्त किया गया था।
1971 के भारत – पाकिस्तान युद्ध के समय वह जम्मू – कश्मीर में तैनात थे। 15 मार्च 1989 को वे नायब सूबेदार पद पर पदोन्नत हुए। वर्ष 1993 में वह सूबेदार पद पर पदोन्नत हुए थे।
“ऑपरेशन विजय” में 29 मई 1999 को, 17 जाट के 4 नंबर प्लाटून को द्रास सेक्टर की मश्कोह घाटी के पॉइंट 4540 से घुसपैठियों को निष्कासित करने का आदेश दिया गया। सूबेदार हरफूल सिंह 38 सैनिकों के प्लाटून के साथ आगे बढ़े। 2 घंटे तक चले भीषण संघर्ष में 15 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए व प्लाटून को किसी प्रकार की क्षति नहीं हुई और भारतीय सेना का इस चोटी पर नियंत्रण हो गया।
इसके पश्चात सूबेदार हरफूल सिंह और उनकी प्लाटून को रॉकी नॉब पर सैडल के संगड़ नष्ट करने का आदेश दिया गया। 29 मई 1999 को रात्रि के 8:00 बजे इस प्लाटून ने पॉइंट 4540 से प्रस्थान किया। रात्रि के अँधकार में कुछ दिखाई नहीं दे रहा था। 30 मई 1999 की भोर में 3:00 बजे प्लाटून ने शत्रु पर आक्रमण किया। भीषण संघर्ष करते हुए भोर में 4:00 बजे यह टुकड़ी शत्रु के बंकर से मात्र 100 मीटर के अंतर पर थी, उसी समय शत्रु ने उनपर मशीन गनों से अंधाधुंध फायरिंग आरंभ कर दी।
इस गोली वर्षा में सूबेदार हरफूल सिंह के साथी व रेडियो ऑपरेटर सिपाही रणवीर सिंह बराला को गोली लगी और वह वीरगति को प्राप्त हो गए। सूबेदार हरफूल सिंह की बांह में भी एक गोली लगी, किंतु घाव से अविचलित उन्होनें शत्रु के दो संगड़ ध्वस्त कर दिए। इस मध्य इस टुकड़ी का गोला-बारूद समाप्त हो गया और पार्श्व से सहायता नहीं पहुँचने के कारण वे शत्रु से घिर गए। सूबेदार हरफूल सिंह को माथे पर दो गोलियां व छाती पर तीन गोलियां लगी और वह वीरगति को प्राप्त हुए।
इस संघर्ष में बलिदान हुए अन्य सैनिकों के नाम…
सिपाही रणवीर सिंह बराला, मैनपुरा,
झुंझुनूं, (राजस्थान)
सिपाही विनोद कुमार नागा, रामपुरा,
सीकर, (राजस्थान)
सिपाही कृष्ण कुमार बांदर, तरकांवाली,
सिरसा, (हरियाणा)
सिपाही गजपाल सिंह अग्रे, नगला चौधरी,
हाथरस, (उत्तर प्रदेश)
सिपाही धर्मवीर सिंह कोयड़, मलूपुर,
आगरा, (उत्तर प्रदेश)
सूबेदार हरफूल सिंह व अन्य सैनिकों के शव हिमपात के कारण तत्काल नहीं मिल पाए। 46 दिन पश्चात 14 जुलाई 1999 को उनका शव अन्य सैनिकों के साथ 15 फीट हिम में दबा हुआ पाया गया।
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