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कारगिल युद्ध 30 मई 1999 मेजर राजेश सिंह अधिकारी

—— बलिदान दिवस -शौर्यनमन—–
मेजर राजेश सिंह अधिकारी
IC52574F
25-12-1970 – 30-05-1999
महावीर चक्र (मरणोपरांत)
वीरांगना – श्रीमती किरण नेगी
यूनिट – 18 ग्रेनेडियर्स/2 मैकनाइज्ड इंफेट्री
तोलोलिंग का रण
ऑपरेशन विजय
कारगिल युद्ध 1999
मेजर राजेश सिंह अधिकारी का जन्म 25 दिसंबर 1999 को श्री के. एस. अधिकारी एवं श्रीमती मालती अधिकारी के परिवार में हुआ था। वह उत्तराखंड के नैनीताल जिले के तल्लीताल के हरिनगर क्षेत्र के निवासी थे। 11 दिसंबर 1993 को उन्हें भारतीय सेना की मैकनाइज्ड इंफेट्री रेजिमेंट की 2 बटालियन में सैकिंड लेफ्टिनेंट के रूप में कमीशन प्राप्त हुआ था।
“ऑपरेशन विजय” में 30 मई 1999 को, कर्नल Khushal Thakur के नेतृत्व में 18 ग्रेनेडियर्स बटालियन द्वारा तोलोलिंग चोटी पर अधिकार के लिए आक्रमण आरंभ किया गया। मेजर राजेश सिंह अधिकारी को बटालियन के आक्रमण के समय एक सुरक्षित पड़ाव बनाने के लिए पहाड़ के उभरे हुए भाग पर शत्रु की एक अग्रिम चौकी पर आक्रमण करने का दायित्व सौंपा गया। शत्रु की यह चौकी अत्यंत ही दुर्गम पहाड़ी भूभाग पर, 15000 फुट की ऊँचाई पर हिमाच्छादित स्थान पर थी। शत्रु ने वहां अति सुदृढ़ रक्षण किया हुआ था। अपनी टुकड़ी का नेतृत्व करते हुए, जब मेजर राजेश सिंह अपने लक्ष्य की ओर बढ़ रहे थे, उसी समय उन पर दो शत्रु बंकरो से यूनिवर्सल मशीन गन से भयानक आक्रमण हुआ।
मेजर राजेश सिंह ने शत्रु का ध्यान बंटाने के लिए तत्क्षण अपनी रॉकेट लॉंचर टुकड़ी को शत्रु पर पलटवार करने के निर्देश दिए और समय नष्ट नहीं करते हुए वह स्वयं शत्रु के बंकर में पहुंच गए। आमने-सामने के संघर्ष में उन्होंने दो पाकिस्तानी सैनिकों को मार दिया। इसके पश्चात प्रचंड गोलीवर्षा में अपने रणकौशल का परिचय देते हुए मेजर राजेश सिंह ने अपनी मीडियम मशीनगन टुकड़ी को एक चट्टानी उभार के पीछे डटे रहते हुए शत्रु को व्यस्त रखने का आदेश दिया और स्वयं आक्रमण करते हुए अपने लक्ष्य की ओर आगे बढ़ते रहे।
आगे बढ़ते समय भीषण गोलीवर्षा में, गंभीर रूप से घायल होते हुए भी मेजर राजेश सिंह अपने दल का नेतृत्व करते रहे। उन्होंने युद्ध से हटना अस्वीकार कर दिया और द्वितीय बंकर पर आक्रमण कर एक और पाकिस्तानी सैनिक को मार दिया व तालोलिंग क्षेत्र के द्वितीय बंकर पर भी अधिकार कर लिया। उनकी इस वीरतापूर्ण कार्रवाई ने पॉइंट 4590 पर अधिकार करने का मार्ग प्रशस्त कर दिया। अंततः अपने घातक घावों से वह वीरगति को प्राप्त हुए।
मेजर राजेश सिंह अधिकारी ने भारतीय सेना की सर्वोच्च परंपराओं में शत्रु की उपस्थिति में अदम्य साहस, दृढ़ निश्चय, असाधारण वीरता एवं उत्कृष्ट नेतृत्व का प्रदर्शन किया। उन्हे मरणोपरांत “महावीर चक्र” से सम्मानित किया गया।

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