shauryasaga.com
Kargil storyVeer Chakra

कारगिल युद्ध 3 जून 1999 लेफ्टिनेंट कर्नल रामकृष्णन विश्वनाथन

—— बलिदान दिवस -शौर्यनमन—-
लेफ्टिनेंट कर्नल रामकृष्णन विश्वनाथन
IC39584M
12-01-1960 – 03-06-1999
वीर चक्र (मरणोपरांत)
वीरांगना – श्रीमती जालेजा विश्वनाथन
यूनिट – 18 ग्रेनेडियर्स रेजिमेंट
तोलोलिंग का रण
ऑपरेशन विजय
कारगिल युद्ध 1999
लेफ्टिनेंट कर्नल रामाकृष्णन विश्वनाथन का जन्म 12 जनवरी 1960 को केरल राज्य के कोच्चि नगर में हुआ था। नेशनल डिफेंस एकेडमी (NDA) खड़कवासला व इंडियन मिलिट्री एकेडमी (IMA) से पास आउट होने के पश्चात वर्ष 1981 में उन्हें भारतीय सेना की ग्रेनेडियर्स रेजिमेंट की 18 बटालियन में सैकिंड लेफ्टिनेंट के रूप में कमीशन प्राप्त हुआ था। उन्होंने श्रीलंका में भारतीय शांति सेना द्वारा चलाए गए ऑपरेशन पवन में और संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन में अंगोला में भी अपनी सेवाएं प्रदान की थीं।
कारगिल युद्ध के समय 18 ग्रेनेडियर्स बटालियन के कमांडिंग ऑफिसर कर्नल Khushal Thakur के नेतृत्व में 2/3 जून 1999 की रात्रि में, लेफ्टिनेंट कर्नल विश्वनाथन को तोलोलिंग पहाड़ी क्षेत्र में पांव रोपने (FOOTHOLD) के लिए आक्रमण करने और साथ ही साथ वहां पूर्व की कार्रवाई में बलिदान हुए मेजर राजेश सिंह अधिकारी, नायक बीरेंद्र सिंह लांबा, लांसनायक राजेंद्र कुमार यादव के शवों को वहां से सुरक्षित निकाल कर नीचे लाने का कार्य भी सौंपा गया था।
शत्रु 15000 फीट की ऊंचाई पर सुदृढ़ बंकरों में स्थिति लिए हुए थे और उन्हें इसका सामरिक रूप से लाभ प्राप्त रहा था। आक्रमण के समय लेफ्टिनेंट कर्नल विश्वनाथन की टुकड़ी पर शत्रु द्वारा स्वचालित शस्त्रों से भीषण फायरिंग होते हुए भी वह दृढ़ निश्चय से आगे बढ़ते रहे। भीषण संघर्ष में उन्हें एकसाथ अनेक गोलियां लगी और वह गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें वहां से हटने के लिए कहा गया, किंतु वह वहीं डटे रहकर अपने सैनिकों के साथ संघर्ष करते रहे।
अदम्य साहस, दृढ़ निश्चय एवं वीरता से युद्ध करते हुए उन्होंने शत्रु के तीन बंकरों को निष्क्रिय कर दिया और आमने-सामने के संघर्ष में में 4 पाकिस्तानियों को मार दिया। अंततः अपने घातक घावों के कारण वह वीरगति को प्राप्त हुए।
यद्यपि वह अपनी बटालियन के सैकिंड-इन-कमांड थे, तो भी अपनी वरिष्ठता की अवहेलना कर अपने सैनिकों के मनोबल की वृद्धि के लिए उन्होंने उनके साथ रह कर युद्ध किया। उनके साहसिक प्रयासों से ही बटालियन को तोलोलिंग पहाड़ी क्षेत्र में पांव रोपने में सफलता प्राप्त हुई, जिससे आगामी युद्ध में पॉइंट 4590 पर अधिकार करने का मार्ग प्रशस्त हुआ।
लेफ्टिनेंट कर्नल रामाकृष्णन विश्वनाथन को उनकी वीरता, अदम्य साहस एवं सर्वोच्च बलिदान के लिए मरणोपरांत “वीर चक्र” से सम्मानित किया गया। वह कारगिल युद्ध में बलिदान हुए सर्वाधिक ऊंची रैंक के अधिकारी थे।
#कारगिलसेजोलौटकेघरनाआए
#Kargil3June
#Kargil18Grenadiers
#KargilKerla
#KargilKocchiDistrict

#indianarmy #india #army #indianairforce #indiannavy #pulwama #galwan #freedomfighter #15august #26january #nationfirst #shauryanaman #shauryasaga #realheros #superheros
#kargil #shauryagatha #shauryanaman #kargilwar #news #imp #army #salute #ngo #bestngo #bestngoformartyrs
https://www.shauryanaman.com/ https://www.shauryanaman.org
:
https://www.instagram.com/shauryanamanngo
:
https://www.facebook.com/ShauryaNamanNGO
https://www.youtube.com/c/shauryanaman
: shauryanaman2019@gmail.com
:
+91 91110-10007/8

Related posts

कारगिल युद्ध 5 जुलाई 1999 सिपाही सतपाल सिंह

Chandra kishore

कारगिल युद्ध 8 जुलाई 1999 लांस नायक राजेंद्र सिंह धामा

Chandra kishore

वीर चक्र नायक चेत सिंह

Chandra kishore

Leave a Comment