——शौर्यनमन——
श्री चमन लाल का जन्म ग्राम हैबित पिंडी, जिला गुरदासपुर, पंजाब में हुआ था। उनके पिता का नाम श्री गुरदास मल था।
1965 के भारत-पाक युद्ध के दौरान फायरमैन श्री चमन लाल उत्तरी रेलवे की एक माल गाड़ी में गुरदासपुर रेलवे स्टेशन पर सेवारत थे। 13 सितंबर, 1965 को उस माल गाड़ी पर कुछ पाकिस्तानी विमानों ने भारी गोले बरसाए, परिणामस्वरूप माल गाड़ी तथा डीजल से भरे तीन टैंकर-वैगनों में आग लग गई। एक टैंकर-वैगन का तो विस्फोट ही हो गया। आग को देखकर और भावी विनाश की आशंका से श्री चमन लाल अन्य टैंकर-वैगनों को बचाने के लिए भागे।
अपनी सुरक्षा की लेशमात्र परवाह न करते हुए फायरमैन ने आग से जलते टैंकर-वैगन को अलग कर दिया। उन्होंने इस जोखिम भरे काम को पूरा किया ही था कि वे जलते हुए टैंकर-वैगन की लपटों में घिर गए और जलकर राख हो गए। उनकी इस साहसिक कार्रवाई के फलस्वरूप गाड़ी के शेष वैगनों को सुरक्षित स्थान पर ले जाया जा सका। श्री चमन लाल ने न केवल शेष वैगनों तथा उनमें लदे मूल्यवान सामान को बचाया अपितु रेलवे स्टेशन पर उपस्थित और लोगों की जान भी बचाई।
इस कार्रवाई के दौरान श्री चमन लाल ने अनुकरणीय साहस, दूरदर्शिता तथा आत्म बलिदान की भावना का प्रदर्शन किया। उन्हें मरणोपरांत अशोक चक्र प्रदान किया गया।
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