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शौर्य चक्र फ्लाइट लेफ्टिनेंट समीर रियाज कागदी

—— बलिदान दिवस -शौर्यनमन—–
फ्लाइट लेफ्टिनेंट समीर रियाज कागदी
23771
17-07-1973 – 16-07-2000
शौर्य चक्र (मरणोपरांत)
वीरांगना – श्रीमती जोहरा समीर
यूनिट – 114 हेलिकॉप्टर यूनिट
भारतीय वायुसेना
ऑपरेशन मेघदूत
फ्लाइट लेफ्टिनेंट समीर रियाज कागदी का जन्म 17 जुलाई 1973 को श्री आर. एम. कागदी के घर में हुआ था। वह महाराष्ट्र के नासिक नगर के निवासी थे और भारतीय वायुसेना की 114 हेलिकॉप्टर यूनिट में सेवारत थे।
जुलाई 2000 में, फ्लाइट लेफ्टिनेंट एसआर कागदी 114 हेलिकॉप्टर यूनिट में कार्यरत थे, जिसे “सियाचिन पायनियर्स” के नाम से जाना जाता था। वर्ष 2000 में, 114 हेलिकॉप्टर यूनिट ऑपरेशन मेघदूत में भाग लेते हुए सियाचिन ग्लेशियर क्षेत्र में भारतीय सेना के समर्थन में ऑपरेशन में लगी हुई थी। अक्टूबर 1999 में यूनिट में सम्मिलित होने के पश्चात फ्लाइट लेफ्टिनेंट कागदी ने अनेक वायवीय सहायता ऑपरेशन्स चलाए थे और चुनौतीपूर्ण परिचालन स्थितियों में उड़ान भरने का पर्याप्त अनुभव प्राप्त किया था।
अपने सराहनीय व्यावसायिक कौशल से फ्लाइट लेफ्टिनेंट कागदी ने पांच महीने के कीर्तिमान समय में ही ऑपरेशन मेघदूत में ‘ग्लेशियल कैप्टन’ की प्रतिष्ठा अर्जित कर ली थी। अक्टूबर 1999 से आरंभ होने वाले नौ महीनों में, उन्होंने 350 घंटे की उड़ानें भरीं, जिनमें 225 घंटे ग्लेशियर पर उड़ान के थे। अनेक अवसरों पर उन्होंने विश्व के सर्वाधिक ऊंचे हेलीपैड पर सामरिक रूप से महत्वपूर्ण चौकियों पर आपूर्ति पहुंचाने के लिए शत्रु की गोलाबारी में भी हेलिकॉप्टर उड़ाया था।
4 जुलाई 2000 को, फ्लाइट लेफ्टिनेंट समीर रियाज कागदी को एक कैप्टन के रूप में फ्लाइंग ऑफिसर सिद्धार्थ पुराणिक के साथ सह-पायलट के रूप में दौलत बेग ओल्डी (DBO) की उड़ान के लिए नियुक्त किया गया था। दौलत बेग ओल्डी के लिए उड़ान भरते समय, गोशेन से 05 एनएम दूर उनके हेलीकॉप्टर में यांत्रिक समस्या (COLLECTIVE PITCH LEAVER FALURE) आ गई और हेलिकॉप्टर तीव्रता से नीचे आने लगा। फ्लाइट लेफ्टिनेंट कागदी ने इस गंभीर आपात स्थिति को अत्यंत व्यावसायिक और सक्षम रूप से संभाला। उन्होंने फोर्स लैंडिंग के लिए सबसे उपयुक्त क्षेत्र का चयन किया और केवल CYCLIC CONTROL के साथ अपने हेलीकॉप्टर को नीचे उतारा।
किंतु, हेलिकॉप्टर उतरते समय सतह से टकराया जिसके कारण फ्लाइंग ऑफिसर सिद्धार्थ पुराणिक वीरगति को प्राप्त हो गए और फ्लाइट लेफ्टिनेंट कागदी को रीढ़ की हड्डी में गंभीर आघात लगने से फ्रैक्चर हो गए। अत्यधिक शारीरिक पीड़ा में भी उनके द्वारा आपातकाल का सटीक और तार्किक विश्लेषण करने से वे कारक उजागर हुए , जिन्होंने आगे चलकर COURT OF INQUIRY को अपेक्षित दिशा दी, जिससे इस उड़ान की विफलता का कारण निर्धारित करना और भविष्य के लिए उपचारात्मक कार्रवाई आरंभ करना संभव हुया, जिससे ऐसी दुर्घटना की पुनरावृत्ति को रोका जा सके। फ्लाइट लेफ्टिनेंट कागदी को उपचार के लिए चंडीगढ़ के कमांड हॉस्पिटल में भर्ती किया गया। 16 जुलाई 2000 को उपचार के समय वह वीरगति को प्राप्त हो गए।
फ्लाइट लेफ्टिनेंट समीर रियाज कागदी को उनके व्यावसायिक साहस, कर्तव्य के प्रति समर्पण और भारतीय वायु सेना की सर्वश्रेष्ठ परंपरा में सर्वोच्च बलिदान के लिए 15 अगस्त 2000 को मरणोपरांत “शौर्य चक्र” से सम्मानित किया गया।
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