shauryasaga.com
सिपाही प्रवीण जंजाल
Kirti Chakra

Sepoy Pravin Janjal सिपाही प्रवीण जंजाल: भारतीय सेना के बहादुर शहीद को मरणोपरांत ‘कीर्ति चक्र’

सिपाही प्रवीण जंजाल: भारतीय सेना के बहादुर शहीद को मरणोपरांत ‘कीर्ति चक्र’

सिपाही प्रवीण जंजाल प्रभाकर भारतीय सेना के उन अदम्य साहस वाले सैनिकों में से एक थे, जिन्होंने देश की रक्षा में अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान दिया। 6 जुलाई 2024 को, जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले में एक भीषण आतंकवाद विरोधी अभियान के दौरान, इस 25 वर्षीय बहादुर सिपाही ने अपनी मातृभूमि की सेवा करते हुए शहादत प्राप्त की। उनके असाधारण साहस और बलिदान को मरणोपरांत ‘कीर्ति चक्र’ – शांतिकाल के दूसरे सर्वोच्च वीरता पुरस्कार – से सम्मानित किया गया है।

सिपाही प्रवीण जंजाल
सिपाही प्रवीण जंजाल

पृष्ठभूमि और देशसेवा का सफर

शुरुआती जीवन और प्रेरणा

सिपाही प्रवीण जंजाल का जन्म महाराष्ट्र के अकोला जिले के मोरगांव गांव में हुआ था। वह एक साधारण किसान परिवार से आते थे। उनके पिता प्रभाकर जंजाल और माता शालूबाई केवल 1.5 एकड़ की छोटी सी खेती पर निर्भर थे।

गरीबी और संघर्ष के बावजूद, प्रवीण ने बचपन से ही राष्ट्रसेवा का सपना देखा। उन्होंने अपनी लगन और मेहनत से 2019 में पहली कोशिश में ही भारतीय सेना में भर्ती होकर सफलता हासिल की।

  • मूल रेजिमेंट: 2 महार रेजिमेंट
  • अंतिम पोस्टिंग: 1 राष्ट्रिय राइफल्स (काउंटर-इंसर्जेंसी ड्यूटी)
  • पिछली पोस्टिंग: अरुणाचल प्रदेश
सिपाही प्रवीण जंजाल
सिपाही प्रवीण जंजाल

शहादत

सिपाही प्रवीण जंजाल, जो महार रेजिमेंट से भारतीय सेना की 1 राष्ट्रिय राइफल्स में तैनात थे, 6 जुलाई 2024 को एक महत्वपूर्ण आतंकवाद विरोधी अभियान का हिस्सा थे। यह ऑपरेशन पुलवामा के चिंगम गांव में लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के आतंकवादियों के खिलाफ चलाया गया था।

मुठभेड़ भयंकर थी। अपनी जान की परवाह न करते हुए, सिपाही प्रवीण जंजाल ने दुश्मन के ठिकानों पर हमला किया और उन्हें उलझाए रखा, जिससे उनके साथियों को सामरिक बढ़त मिली। इस वीरगाथा में वे अपने साथी लांस नायक परदीप कुमार के साथ शहीद हो गए।

परिणाम: इस जुड़वां मुठभेड़ (चिंगम और कुलगाम) में सेना ने चार दुर्दांत आतंकवादियों को मार गिराया, जो कश्मीर घाटी में शांति भंग करने की कोशिश कर रहे थे।

अंतिम बातचीत

सिपाही प्रवीण जंजाल का निजी जीवन भी बलिदान के साथ जुड़ा हुआ है। उनकी शहादत से महज एक साल पहले उनका विवाह शंबाला से हुआ था। शहादत के दिन, 6 जुलाई 2024 को दोपहर 3:50 बजे, परिवार से उनकी आखिरी कॉल हुई थी। इस कॉल में उन्होंने घर बनाने के लिए भेजे गए ₹49,000 के UPI ट्रांसफर के बारे में पूछा था। यह बातचीत उनके और उनके परिवार के बीच अंतिम संवाद साबित हुई।

सिपाही प्रवीण जंजाल का पार्थिव शरीर श्रीनगर से नागपुर होते हुए, 8 जुलाई 2024 को उनके पैतृक गांव अकोला लाया गया, जहां पूरे सैनिक सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया।

मरणोपरांत सम्मान: कीर्ति चक्र

कीर्ति चक्र
कीर्ति चक्र KC

सिपाही प्रवीण जंजाल के अदम्य साहस और सर्वोच्च बलिदान को राष्ट्र ने सबसे बड़ी श्रद्धांजलि दी है।

15 अगस्त 2025 को, भारत के 79वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर, उन्हें मरणोपरांत ‘कीर्ति चक्र’ से सम्मानित किया गया।

कीर्ति चक्र: यह युद्ध के मैदान से बाहर (शांतिकालीन) दूसरा सर्वोच्च वीरता पुरस्कार है। यह सम्मान आतंकवाद विरोधी अभियानों में उनके असाधारण साहस, कर्तव्यनिष्ठा और दृढ़ संकल्प के लिए दिया गया।

यह पुरस्कार मई 2025 में हुए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ (पहलगाम हमले के बाद पाकिस्तान और PoK में आतंकी ठिकानों पर भारत की स्ट्राइक) से जुड़े आतंकवाद विरोधी प्रयासों की श्रृंखला का हिस्सा था, जिसमें प्रवीण का बलिदान एक महत्वपूर्ण कड़ी था।

पुरस्कार की घोषणा पर, उनकी माता शालूबाई ने गर्व के साथ कहा कि वह स्वयं इस सम्मान को ग्रहण करना चाहती हैं। बड़े भाई सचिन और पूरे परिवार ने प्रवीण के राष्ट्रसेवा के सपने को याद किया, जो अब अनगिनत लोगों के लिए प्रेरणा बन गया है।

एक अमर कहानी

सिपाही प्रवीण जंजाल
सिपाही प्रवीण जंजाल

सिपाही प्रवीण जंजाल की कहानी सिर्फ शहादत की नहीं, बल्कि एक साधारण भारतीय युवक के असाधारण साहस और राष्ट्र के प्रति अटूट प्रेम की कहानी है। उनका बलिदान हमें याद दिलाता है कि हमारी स्वतंत्रता और शांति की कीमत अनमोल है, जिसे ऐसे वीरों ने अपने रक्त से सींचा है।

उनके बड़े भाई सचिन अब राज्य पुलिस बल में शामिल होकर परिवार की सेवा परंपरा को आगे बढ़ाना चाहते हैं—यह दर्शाता है कि बलिदान और राष्ट्रप्रेम की यह विरासत पीढ़ी दर पीढ़ी जारी रहेगी।

जय हिन्द!

ALSO READ:-कप्तान चन्दर नारायण सिंह Captain Chander Narayan Singh 1965: A Saga of Unflinching Courage Maha Vir Chakra

FOLLOW US:-शौर्य गाथा Shaurya Saga | Facebook

Related posts

Sudeep Sarkar शहीद सुदीप सरकार: कीर्ति चक्र विजेता – एक अमर वीर की गाथा

shauryaadmin

Lieutenant Sushil Khajuria लेफ्टिनेंट सुशील खजूरिया कीर्ति चक्र

shauryaadmin

कीर्ति चक्र नायक हरि सिंह पायल

Chandra kishore

Leave a Comment