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Kargil story

ऑपरेशन विजय कारगिल युद्ध नायब सूबेदार लाल सिंह यादव नायक राकेश चंद यादव

—— बलिदान दिवस -शौर्यनमन—–
नायब सूबेदार लाल सिंह यादव
नायक राकेश चंद यादव
यूनिट – 18 ग्रेनेडियर्स रेजिमेंट
तोलोलिंग का युद्ध
ऑपरेशन विजय
कारगिल युद्ध 1999
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नायब सूबेदार लाल सिंह यादव
01-04-1963 – 28-05-1999
सेना मेडल (मरणोपरांत)
वीरांगना – श्रीमती गयारसी देवी
नायब सूबेदार लाल सिंह यादव का जन्म 1 अप्रैल 1963 को हरियाणा के नारनौल जिले के गुवाणी गांव में श्री बीरबल सिंह यादव एवं श्रीमती शांति देवी के परिवार में हुआ था। बारहवीं तक शिक्षा प्राप्त करने के पश्चात वर्ष 1981 में वह भारतीय सेना की ग्रेनेडियर्स रेजिमेंट में रंगरूट के रूप में भर्ती हुए थे। प्रारंभिक प्रशिक्षण के पश्चात उन्हें 18 ग्रेनेडियर्स बटालियन में, ग्रेनेडियर के पद पर नियुक्त किया गया था।
लाल सिंह अत्यंत ही साहसी प्रवृत्ति के सैनिक थे। वह भारतीय शांति सेना द्वारा श्रीलंका में चलाए गए ऑपरेशन पवन में जाफना में भी तैनात रहे थे। वर्ष 1999 तक वह नायब सूबेदार के पद पर पदोन्नत हो चुके थे।
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नायक राकेश चंद यादव
वीरांगना – श्रीमती मिथिलेश देवी
यूनिट – 18 ग्रेनेडियर्स रेजिमेंट
तोलोलिंग का रण
ऑपरेशन विजय
कारगिल युद्ध 1999
नायक राकेश चंद यादव का जन्म श्री रामप्रकाश यादव एवं श्रीमती जसोदा देवी के परिवार में हुआ था। वह उत्तर प्रदेश के फर्रूखाबाद जिले की मोहम्मदाबाद तहसील के नगला जब्ब गांव के निवासी थे। वर्ष 1984 में, आगरा से वह भारतीय सेना की ग्रेनेडियर्स रेजिमेंट में रंगरूट के रूप में भर्ती हुए थे। प्रशिक्षण के पश्चात उन्हें 18 ग्रेनेडियर्स बटालियन में ग्रेनेडियर के पद पर नियुक्त किया गया था।
राकेश चंद अत्यंत ही साहसी प्रवृत्ति के सैनिक थे। अपनी बटालियन में विभिन्न परिचालन परिस्थितियों और स्थानों पर सेवाएं देते हुए वर्ष 1999 तक वह नायक के पद पर पदोन्नत हो गए थे। कारगिल में घुसपैठ उजागर होने पर, जब उन्होंने अपनी बटालियन में जाने के लिए घर से प्रस्थान किया तो उन्होंने कहा कि “देश के सम्मान के लिए मुझे युद्ध में जाने का सौभाग्य प्राप्त हो सकता है।”
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ऑपरेशन विजय में, मई 1999 में तोलोलिंग पहाड़ी से शत्रु को निष्कासित करने के लिए कमांडिंग ऑफिसर कर्नल Khushal Thakur के नेतृत्व में 18 ग्रेनेडियर्स बटालियन को श्रीनगर से कारगिल भेजा गया था। 28 मई 1999 को नायब सूबेदार लाल सिंह और नायक राकेश चंद यादव एक आक्रमणकारी टुकड़ी के सदस्य थे। शत्रु ऊंचाई पर तोपों और स्वचालित शस्त्रों से सुसज्जित, सुदृढ़ बंकरों में स्थिति लिए हुए था।
शत्रु की भीषण गोला वृष्टि से अभीत नायब सूबेदार लाल सिंह और नायक राकेश चंद यादव अपनी टुकड़ी के संग अदम्य साहस व दृढ़ निश्चय से आगे बढ़े। उन्होंने शत्रु को गंभीर क्षति पहुंचाई और तोलोलिंग क्षेत्र में अपनी कंपनी के लिए एक स्थान पर पांव रोपने (FOOTHOLD) का मार्ग प्रशस्त किया। शत्रु से अंतिम श्वास तक संघर्ष करते हुए नायब सूबेदार लाल सिंह और नायक राकेश चंद यादव वीरगति को प्राप्त हुए थे।
नायब सूबेदार लाल सिंह को उनके अदम्य साहस, वीरता एवं सर्वोच्च बलिदान के लिए मरणोपरांत सेना मेडल (वीरता) से सम्मानित किया गया था। गुवाणी गांव में उनकी स्मृति में प्रतिमा स्थापित की गई है।

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