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Medal

नौसेना मेडल एचए 4 राकेश कुमार

—— बलिदान दिवस -शौर्यनमन—–
एचए 4 राकेश कुमार
502230-H
नौसेना मेडल (मरणोपरांत)
यूनिट – आईएनएस विक्रमादित्य
CI/IS ऑपरेशन्स
10 जून 2016 को एचए 4 राकेश कुमार दो असैन्य अनुबंध-श्रमिकों द्वारा नवनिर्मित एक सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) पाइप के फिटमेंट की निगरानी का कार्य सौंपे गए दल के सदस्य थे।
उन्हें एक सबमर्सिबल पंप के संचालन को जोड़ने और पर्यवेक्षण करने का कार्य सौंपा गया था और उसे पावर जनरेशन रूम (PGR) में तैनात किया गया था, जो कोफेडेम वाले कक्ष के ऊपर एक डेक था, जिसमें केवल एक लंबवत सीढ़ी के माध्यम से कोफेडेम तक पहुंच थी, सीढ़ी एक संकीर्ण HATCH से नीचे गई हुई थी। कोफेडेम एक WATER TIGHT संरचना होती है जिसका उपयोग इसकी जल रेखा के नीचे जहाज का रखरखाव करते समय किया जाता है।
पाइप REPLACEMENT की प्रक्रिया के समय, एचए 4 राकेश कुमार ने नीचे के कक्ष में किसी को पुकारते हुए सुना और एक श्रमिक को अर्ध-चेतन अवस्था में उसमें से निकलते देखा। वे त्वरित सीढ़ी से नीचे गए, उस श्रमिक को अपने कंधे पर उठाया, पीजीआर की खड़ी सीढ़ी पर चढ़े और उसे एक एसी वेंट के नीचे लिटा दिया। उसके पश्चात उन्हें ज्ञात हुआ कि एक अन्य श्रमिक भी कोफेडेम में अचेत पड़ा हुआ है।
एक क्षण भी अपनी स्वयं की सुरक्षा के संबंध में नहीं सोचते हुए, वे पुनः लंबवत सीढ़ी से उतरे और निःसंकोच कोफेडेम में प्रवेश किया, जहां उन्होंने देखा कि उनके दल का नायक आपातकालीन जीवन रक्षक उपकरण (Emergency Life Saving Apparatus) सेट पहने हुए उस श्रमिक को उठाने का प्रयास कर रहा है। एचए 4 राकेश कुमार ने अपने संपूर्ण शारीरिक बल से द्वितीय श्रमिक को उठाने का प्रयास किया, किंतु उनके रपटन युक्त वस्त्र होने और संकरे स्थान में डेक की फिटिंग्स में अटके हुए होने के कारण से वे उस श्रमिक को उठाने में असमर्थ रहे।
वहां जहरीली गैस संभावित होने और उसके परिणाम के संकटों के संबंध में ज्ञान होते हुए भी, एचए 4 राकेश अपने प्रयासों से पीछे नहीं हटे और श्रमिक के जीवन की रक्षा की, उसको निरंतर शारीरिक रूप से कोफेडेम से बाहर निकालने का प्रयास करते रहे। यद्यपि इसमें समय लग गया, और निरंतर अपने व्यर्थ किंतु साहसिक प्रयासों को करते हुए, श्वास के साथ विषैली गैसें शरीर में जाने से वह अचेत होकर कोफेडेम के भीतर गिर गए और वीरगति को प्राप्त हो गए।
एचए 4 राकेश कुमार को सेवा की उच्चतम परंपराओं में, अपनी स्वयं की सुरक्षा की घोर उपेक्षा करते हुए, घातक विषैली गैसों से प्रभावित संकड़े स्थान में कार्य कर रहे नागरिकों के जीवन की रक्षा में इस अनुकरणीय साहसिक कार्य के लिए मरणोपरांत “नौसेना मेडल” से सम्मानित किया गया।

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