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Maha Veer Chakra

हवलदार थामस फिलिपोस: एक सच्चे वीर की शौर्य गाथा

——-शौर्यनमन——-
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हवलदार फिलिपोस, थामस
(महावीर चक्र)

8 जुलाई 1941 को केरल के अल्लिप्पी, इडायरनमुला में जन्मे हवलदार थामस फिलिपोस एक ऐसे सैनिक थे, जिन्होंने अपनी वीरता से देश का नाम रोशन किया। उनके पिता श्री फिलिपोस के घर में जन्मे इस साहसी योद्धा ने 8 जुलाई 1961 को 16 मद्रास (द्रावनकोर) में अपनी सेवा शुरू की। 1971 के भारत-पाक युद्ध में उनकी अदम्य साहस और नेतृत्व की कहानी आज भी हर भारतीय के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

 

1971 का युद्ध और बंसतार नदी का मोर्चा

 

1971 में 16 मद्रास को पश्चिमी मोर्चे पर तैनात किया गया था। उनका मिशन था बंसतार नदी के उस पार एक पुल-पदाधार स्थापित करना, ताकि भारतीय सेना आगे बढ़ सके। इसके लिए उन्हें 15 दिसंबर तक सराजचाक और लालियाल पर कब्जा करना था। लेकिन यह आसान नहीं था। दुश्मन ने नदी के दोनों ओर गहरी सुरंगें खोद रखी थीं, जो मशीन गन की प्रभावी फायर से सुरक्षित थीं। सुरंगों के बीच पैदल सेना और मशीन गन के “नेस्ट” तैनात थे। बंकरों को संचार खाइयों और वैकल्पिक ठिकानों से जोड़ा गया था, और गांव में तोपखाने की चौकियां हर गतिविधि पर नजर रखे हुए थीं।

 

ऐसी मजबूत रक्षा पंक्ति को तोड़ना बेहद चुनौतीपूर्ण था, मगर 16 मद्रास ने इसे अपनी हिम्मत और आत्मविश्वास से स्वीकार किया।

 

संकट में संभाला मोर्चा

 

15 दिसंबर की रात, हवलदार थामस फिलिपोस “सी” कंपनी के साथ लालियाल पर धावा बोलने निकले। दुश्मन ने भारी गोलाबारी और मशीन गन से हमला किया। इस दौरान प्लाटून कमांडर गंभीर रूप से घायल हो गया, और कई सैनिक हताहत हो गए। अब सिर्फ 15 सैनिक बचे थे। ऐसे संकट में हवलदार फिलिपोस ने कमान संभाली। उन्होंने नन्ही टुकड़ी के साथ दुश्मन पर जोरदार हमला बोला और लक्ष्य तक पहुंच गए।

 

लेकिन दुश्मन ने हार नहीं मानी। जवाबी हमले की तैयारी शुरू हुई। तब हवलदार फिलिपोस ने अपने सैनिकों के साथ संगीनें चढ़ाईं और दुश्मन पर टूट पड़े। उनकी प्रचंडता से दुश्मन घबरा गया और पीछे हट गया। इस लड़ाई में हवलदार फिलिपोस को गोली लगी, फिर भी वे डटे रहे। युद्धभूमि से निकलने से पहले उन्हें एक और गहरी चोट लगी, लेकिन उनका हौसला कभी नहीं डगमगाया।

 

महावीर चक्र से सम्मानित

 

अपने दृढ़ नेतृत्व और असाधारण साहस के लिए हवलदार थामस फिलिपोस को भारत के दूसरे सर्वोच्च वीरता पुरस्कार “महावीर चक्र” से सम्मानित किया गया। उनकी यह गाथा हमें याद दिलाती है कि सच्चा साहस संख्याओं से नहीं, संकल्प से नापा जाता है।

 

शौर्य नमन: शहीदों का सम्मान

 

“शौर्य नमन” एक ऐसा संगठन है जो हमारे वीर शहीदों और उनके परिवारों के सम्मान के लिए समर्पित है। हवलदार थामस फिलिपोस जैसे नायकों की कहानियां हमें प्रेरित करती हैं कि हम उनके बलिदान को कभी न भूलें।

 

 

 

 

 

 

    • संपर्क: +91 91110-10008

 

आइए, हम सब मिलकर अपने शहीदों को सलाम करें और उनके परिवारों के साथ खड़े हों।
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