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Ashok Chakra

अशोक चक्र लेफ्टिनेंट राम प्रकाश रोपड़िया

—— बलिदान दिवस -शौर्यनमन—–
लेफ्टिनेंट राम प्रकाश रोपड़िया
IC39994
10-06-1959 – 09-06-1984
अशोक चक्र (मरणोपरांत)
यूनिट – 26 मद्रास रेजिमेंट
ऑपरेशन ब्लू स्टार
लेफ्टिनेंट राम प्रकाश रोपड़िया का जन्म 10 जून 1959 को पंजाब (वर्तमान हरियाणा) के हिसार जिले के पाली गांव में श्री भाल सिंह रोपड़िया के घर में हुआ था। 19 दिसंबर 1981 को इन्हें भारतीय सेना की मद्रास रेजिमेंट की 26 बटालियन में सैकिंड लेफ्टिनेंट के रूप में कमीशन प्राप्त हुआ था।
वर्ष 1984 में पंजाब में आतंकवाद चरम पर पहुंच गया था। आतंकवादियों ने पवित्र स्वर्ण मंदिर परिसर पर अधिकार कर लिया था और वहां किलेबंदी कर उसे अपना मुख्यालय बना लिया था। अंततः स्वर्ण मंदिर परिसर पर नियंत्रण स्थापित करने और परिसर को आतंकवादियों से मुक्त कराने के लिए 1 जून 1984 से 8 जून 1984 तक भारतीय सेना द्वारा ‘ऑपरेशन ब्लू स्टार’ चलाया गया था।
“ऑपरेशन ब्लू स्टार” में, 5/6 जून 1984 की रात्रि में 26 मद्रास बटालियन की ‘C’ कंपनी को स्वर्ण मंदिर परिसर में एक भवन समूह के प्रथम तल्ले को सुरक्षित करने का कार्य सौंपा गया था। यह तल्ला दुर्दांत खालिस्तानी आतंकवादियों के अधिकार में था। लेफ्टिनेंट रोपड़िया 26 मद्रास की ‘C’ कंपनी के कमांडिंग ऑफिसर थे। स्वचालित शस्त्रों से लैस आतंकवादियों ने प्रथम तल्ले तक जाने वाली सीढ़ियों को अवरुद्ध कर दिया था।
लेफ्टिनेंट रोपड़िया ने अपनी व्यक्तिगत सुरक्षा की घोर उपेक्षा करते हुए, एक सीढ़ी की सहायता से भवन पर चढ़ने का निर्णय किया। प्रथम तल्ले पर चढ़ने का प्रयास करते समय आतंकवादियों द्वारा उन पर मशीनगन से फायरिंग की गई, तो भी निर्भीकता से वह एकाकी अपने प्रयास करते रहे और तीन प्रयासों के पश्चात उन्होंने सहायता मांगी।
चतुर्थ प्रयास में उनके साथ नायब सूबेदार के. जी. कोशी थे। वे दोनों भवन के प्रथम तल्ले तक पहुंच गए। मशीनगन की भीषण फायरिंग में लेफ्टिनेंट रोपड़िया और नायब सूबेदार कोशी ने मशीनगन बंकरों को ध्वस्त किया। लेफ्टिनेंट रोपड़िया ने साहसपूर्वक अपनी कंपनी का नेतृत्व किया, किंतु प्रथम तल्ले की सीढ़ियां CLEAR करते हुए उन्हें गोली लग गई। घायल होते हुए भी वह नहीं रूके, अपितु अपना प्रयास और तेज कर दिया। दो हथगोले फेंक कर वह सीढ़ियों से नीचे उतरने लगे।
उसी समय, एक आतंकवादी ने उन पर पुनः गोलियां चला कर उन्हें गंभीर रूप से घायल कर दिया, लेफ्टिनेंट रोपड़िया ने प्रत्युत्तर में गोलियां चला कर उस आतंकवादी को भी मार दिया। उन्हें दो गोलियां लग गईं थी और वह गंभीर रूप से घायल थे, तो भी वह सीढ़ियों से नीचे उतर गए तथा 26 मद्रास की ‘D’ कंपनी के साथ संपर्क स्थापित किया। भूतल पर पहुंचते ही वह गिर गए। उन्हें शीघ्र चिकित्सालय ले जाया गया, जहां 9 जून 1984 को वह वीरगति को प्राप्त हो गए।
लेफ्टिनेंट राम प्रकाश रोपड़िया को उनकी अति विशिष्ट वीरता, अत्यंत कुशल नेतृत्व और कर्तव्य के प्रति असाधारण समर्पण के लिए 26 जनवरी 1985 को मरणोपरांत ‘अशोक चक्र’ से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उनके पिता श्री भाल सिंह द्वारा ग्रहण किया गया।
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