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Ashok Chakra

अशोक चक्र लांस नायक सुन्दर सिंह

——-शौर्यनमन——-
लांस नायक सुन्दर सिंह (नं-15103) का जन्म 14 फरवरी, 1929 को ग्राम चौकी हंडन, जिला राजौरी, जम्मू और कश्मीर में हुआ था। वे 14 फरवरी, 1947 को जम्मू और कश्मीर स्टेट फोर्स में भर्ती हुए। बाद में 1 जनवरी, 1957 को वे जम्मू और कश्मीर इंफैंट्री में ले लिए गए। वे सूबेदार मेजर तथा ऑनरेरी लेफ्टिनेंट के पद पर भी सेवारत रहे।

1956 में 4 जम्मू कश्मीर इंफैन्ट्री, फिरोजपुर के निकट हुसैनीवाला हेड वर्क्स पर तैनात थी। 18 मार्च की रात को पाकिस्तानियों ने उनके ठिकाने पर हमला बोल दिया। भारतीय सैनिकों ने इस हमले को नाकाम कर दिया और हमलावरों को गाइड बांध के दाहिने भाग से खदेड़ दिया। लेकिन गाइड बांध का अगला भाग और दाहिना छोर अभी भी दुश्मन के कब्जे में था।

हमलावरों की बांध के अगले भाग पर लाइट मशीन गन की एक चौकी थी और वहां से उन्होंने नदी के पार भारतीय सैनिक चौकी बेला, गाईड बांध के दाहिने तथा गाइड बांध के बाएं नौका स्थल पर धुआंधार गोलियां बरसानी शुरू कर दीं। ऐसी स्थिति में भारतीय सैनिकों के लिए बांध पर कब्ज़ा बनाए रखना, गोला-बारूद की आपूर्ति करना तथा हताहतों की निकासी के लिए नदी में नाव चलाना कठिन हो गया। गन की इस चौकी के कारण बेला स्थित भारतीय सैनिकों की सुरक्षा भी खतरे में थी।

इसलिए इस चौकी से दुश्मन को खदेड़ना आवश्यक परन्तु दुश्मन की गन की भारी गोलाबारी ने बांध के अगले भाग की ओर बढ़ना रोक दिया था। तब मशीन गन पोस्ट को नष्ट करने के लिए वालंटियर्स का आह्वान किया गया। लांस नायक सुन्दर सिंह इस काम के लिए आगे आए। उन्होंने अपने साथ 6 हथगोले लिए, दुश्मन की गोलियों से घिरे बांध से रेंगते हुए 100 मीटर आगे बढ़े,और फिर दाहिने बांध पर पत्थरों के ढेर को पार कर 50 मीटर अंदर शत्रु के इलाके में घुस गए। जैसे ही वे गन चौकी के नजदीक पहुंचे उन्होंने उस पर कई ग्रेनेड फेंक दिए। इस प्रकार मशीन गन बेकार हो गई और उस पर तैनात तीन सैनिक मारे गए। अपने जीवन को भारी खतरे में डालते हुए तब वे मशीन गन तक गए और उसे मैग्जीन समेत अपने कब्जे में कर लिया। नायक सुन्दर सिंह की इस बहादुरी के ही कारण 4 जम्मू और कश्मीर इन्फैंट्री बांध के अगले भाग पर कब्जा करने में सफल रही। वे गन चौकी से तीनों मृतकों को लाने के लिए तीन बार वहां तक गए।

इस कार्रवाई में लांस नायक सुन्दर सिंह ने अपनी सुरक्षा की तनिक भी परवाह न करते हुए बड़ी सूझ-बूझ और उच्चकोटि के साहस का प्रदर्शन किया। इस साहसिक कार्य के लिए उन्हें अशोक चक्र से सम्मानित किया गया।

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