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Param Veer Chakra

परमवीर चक्र कंपनी क्वार्टर मास्टर हवलदार अब्दुल हमीद

—–जन्मदिवस-शौर्यनमन—–
कंपनी क्वार्टर मास्टर हवलदार अब्दुल हमीद (नं-2639885) का जन्म 1 जुलाई, 1933 को गांव धामपुर, गाजीपुर, उत्तर में हुआ था। उनके पिता का नाम श्री उस्मान था। वे 27 दिसंबर, 1954 को 4 ग्रेनेडियर्स में भर्ती हुए। वीरगति पाने से पहले उन्हें जम्मू और कश्मीर क्लास्प के साथ सैन्य सेवा मैडल, समर सेवा मैडल और रक्षा मैडल से सम्मानित किया गया था।

1965 के भारत-पाक युद्ध के दौरान भारतीय 4 डिवीजन को दोहरी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। पहली-इच्छोगिल नहर के पूर्व के पाकिस्तानी इलाके पर कब्ज़ा करना और दूसरी कसूर-खेमकरन अक्ष पर शत्रु के संभावित हमले को रोकना। डिवीजन इच्छोगिल नहर तक पहुंचने में सफल रही परंतु दुश्मन के जबरदस्त आक्रमण के सामने उसे असल-उत्तर तक पीछे हटना पड़ा। यहां पर दुश्मन के हमले का मुकाबला करने के लिए डिवीजन जम कर बैठ गई।

डिवीजन की नई सुरक्षा योजना के अन्तर्गत 4 ग्रेनेडियर्स ने खेमकरन-भिक्खीविंड मार्ग पर चीमा ग्राम के आगे एक सामरिक महत्व की जगह पर मोर्चा संभाला। योजना के सफल संचालन के लिए डिवीजन को इस जगह पर अपनी स्थिति सुदृढ़ करना आवश्यक था। 8 सितंबर की रात को दुश्मन ने ग्रेनेडियर्स की पोजीशन पर लगातार टोही हमले किए लेकिन उसका हर प्रयास नाकाम कर दिया गया।

परंतु सबसे गंभीर संकट तब पैदा हुआ जब दुश्मन ने 10 सितंबर को 8:00 बजे पैटन टैंक की एक रेजीमेंट के साथ इस इलाके पर आक्रमण किया। आक्रमण से पहले तोपों से इतनी भारी गोलाबारी की गई कि बटालियन अधिकृत क्षेत्र की हर एक मीटर जमीन पर तोपों के गोले फैल गए। 9:00 बजे तक शत्रु के टैंक भारतीय अग्रिम कंपनियों की चौकियों तक घुस आए। इस गंभीर स्थिति में कंपनी क्र्वाटर मास्टर हवलदार अब्दुल

हमीद रिकॉईलेस गन की टुकड़ी की कमान संभाले हुए थे। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए वे अपनी तोप लगी जीप के साथ बगल वाली पोजीशन की ओर बढ़े। शत्रु की भीषण गोलाबारी तथा टैंक फायर उन्हें रोक न सके। अपनी नई पोजीशन से उन्होंने सही निशाना साधकर शत्रु के अग्रिम टैंक को ध्वस्त कर दिया। फिर उन्होंने अपनी पोजीशन बदली और दुश्मन के एक और टैंक को ध्वस्त कर दिया। परंतु अब तक शत्रु को उनकी पोजीशन का पता चल गया था। उसने मशीन गनों और विस्फोटकों से उन पर धुआंधार गोलाबारी की, लेकिन हमीद भी गोलाबारी करते रहे। जैसे ही उन्होंने दुश्मन के एक और टैंक को अपना निशाना बनाया तभी शत्रु के विस्फोटक गोले से आहत होकर वे वीर गति को प्राप्त हुए। इस पूरी कार्रवाई के दौरान अब्दुल हमीद ने अपने साथियों को दुश्मन के टैंक हमले को विफल करने हेतु डटकर लड़ने के लिए प्रेरित किया। शत्रु की निरन्तर गोलाबारी के सम्मुख अपनी सुरक्षा की परवाह न कर सतत वीरता का उनका प्रदर्शन निःसंदेह भारतीय सेना की उत्कृष्ट परंपराओं के अनुरूप था। कंपनी क्वार्टर मास्टर हवलदार अब्दुल हमीद को मरणोपरांत परम वीर चक्र से सम्मानित किया गया।

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