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राइफलमैन निहाल गुरुंग – 5/9 गोरखा राइफल्स

आज, हम सब एक वीर सपूत, राइफलमैन निहाल गुरुंग को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं जिनकी उम्र तो महज 18 वर्ष थी पर हौसला सर्वोच्च ।

भारतीय सेना की 5/9 गोरखा राइफल्स के इस नन्हे सैनिक ने मात्र 18 वर्ष की आयु में देश की रक्षा करते हुए अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान दिया। उनकी शहादत हर भारतीय के लिए गर्व और प्रेरणा का प्रतीक है।

एक सैन्य परिवार का साहसी सपूत

राइफलमैन निहाल गुरुंग जम्मू और कश्मीर के कठुआ जिले के खग्रोहरे गाँव, बासोहली तहसील के निवासी थे। उनका परिवार सैन्य परंपरा से गहराई से जुड़ा था। उनके दादा, सूबेदार अनंतबीर गुरुंग, 1983 में सेना से रिटायर हुए थे, जबकि उनके पिता, रविंदर गुरुंग, 2 जम्मू और कश्मीर राइफल्स में सेवा दे चुके थे और 2004 में रिटायर हुए। उनके चाचा, निरपत गुरुंग, भी सेना में अपनी सेवाएँ दे चुके थे। इस सैन्य विरासत को आगे बढ़ाते हुए, निहाल ने 2014 में 18 वर्ष की आयु में भारतीय सेना में भर्ती होकर 5/9 गोरखा राइफल्स में अपनी जगह बनाई।

केरन सेक्टर में शहादत

2018 में, राइफलमैन निहाल गुरुंग की यूनिट जम्मू और कश्मीर के कुपवाड़ा जिले के केरन सेक्टर में नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर तैनात थी। यह क्षेत्र बेहद संवेदनशील और अस्थिर है, जहाँ अक्सर घुसपैठ और गोलीबारी की घटनाएँ होती रहती हैं। 25 अगस्त 2018 को, निहाल एक नियमित गश्ती अभियान का हिस्सा थे, जिसका उद्देश्य घुसपैठ को रोकना और सीमा की सुरक्षा सुनिश्चित करना था।

इसी दौरान, केरन सेक्टर के बल्बीर पोस्ट के पास एक भयंकर विस्फोट हुआ, जिसमें निहाल गंभीर रूप से घायल हो गए। तत्काल उन्हें श्रीनगर के 92 बेस हॉस्पिटल ले जाया गया, लेकिन गंभीर चोटों के कारण वे अपने प्राण नहीं बचा सके। इस विस्फोट में उन्होंने देश के लिए अपने जीवन का सर्वोच्च बलिदान दे दिया। उनकी शहादत ने न केवल उनके परिवार, बल्कि पूरे बासोहली क्षेत्र को शोक में डुबो दिया।

सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई

26 अगस्त 2018 को, राइफलमैन निहाल गुरुंग को उनके गृहनगर बासोहली के गागरोट गाँव में पूर्ण सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। उनकी शहादत की खबर फैलते ही क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। निहाल अपने माता-पिता के इकलौते पुत्र थे और अगले वर्ष उनकी शादी होने वाली थी। उनके बलिदान ने न केवल उनके परिवार, बल्कि पूरे समुदाय को गहरा आघात पहुँचाया।

गोरखा राइफल्स की गौरवशाली परंपरा

5/9 गोरखा राइफल्स भारतीय सेना का एक ऐसा रेजिमेंट है, जो अपने साहस और वीरता के लिए विश्व भर में प्रसिद्ध है। इस रेजिमेंट के सैनिकों ने कई युद्धों और अभियानों में अपनी बहादुरी का परचम लहराया है। राइफलमैन निहाल गुरुंग ने इस गौरवशाली परंपरा को और मजबूत किया। इतनी कम उम्र में भी उन्होंने अपने कर्तव्य के प्रति अटूट समर्पण दिखाया और देश की सुरक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए।

एक प्रेरणा, एक नायक

राइफलमैन निहाल गुरुंग की कहानी हमें सिखाती है कि साहस और बलिदान की कोई उम्र नहीं होती। उन्होंने अपने छोटे से जीवन में जो वीरता और समर्पण दिखाया, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा। उनकी शहादत हमें याद दिलाती है कि हमारे सैनिक देश की सीमाओं पर हर पल अपनी जान जोखिम में डालकर हमारी सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं।

श्रद्धांजलि

 हम राइफलमैन निहाल गुरुंग को नमन करते हैं। उनका बलिदान हमें हमेशा यह याद दिलाएगा कि स्वतंत्रता और सुरक्षा की कीमत कितनी अनमोल है। हम उनके परिवार, विशेष रूप से उनकी वीरांगना और माता-पिता, के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करते हैं।

जय हिंद! जय गोरखा!

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