—— शौर्य दिवस -शौर्यनमन—–
नायक राम मेहर सिंह यादव
शौर्य चक्र
यूनिट – 19 कुमाऊं रेजिमेंट
ऑपरेशन मेघदूत
नायक राम मेहर सिंह का जन्म 24 मई 1956 को संयुक्त पंजाब (वर्तमान हरियाणा हरियाणा) के वर्तमान रेवाड़ी जिले के प्राणपुरा गाँव में शेओ चंद यादव के घर में हुआ था। अहीर कॉलेज, रेवाड़ी से बीए प्रथम वर्ष के पश्चात वह भारतीय सेना की कुमाऊं रेजिमेंट में रंगरूट के रूप में भर्ती हुए थे। नवंबर 1976 में उन्हें भारत सेना की कुमाऊं रेजिमेंट की 5 बटालियन में नामांकित किया गया था। तीन वर्ष के पश्चात उन्हें नवगठित 19 कुमाऊं बटालियन में स्थानांतरित कर दिया गया था।
वर्ष 1984 में, जब 19 कुमाऊं बटालियन एक इंफेंट्री ब्रिगेड की कमान में श्रीनगर में तैनात थी, तो आकस्मिक बटालियन को सियाचिन ग्लेशियर के सर्वाधिक विश्वासघाती और दुर्गम वातावरण में अत्यंत ही दुर्जेय क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निर्वहन के लिए स्थानांतरित कर दिया गया। सियाचिन ग्लेशियर क्षेत्र में वर्ष 1984 से भारत और पाकिस्तान के मध्य रह-रह कर संघर्ष होते रहे हैं। वहां घास का एक तिनका भी नहीं उगता। तो भी सामरिक महत्व के कारण सियाचिन विश्व का सबसे ऊँचा युद्धक्षेत्र बना हुआ है।
4 जुलाई, 1984 को, 19 कुमाऊं बटालियन के एक सेक्शन की संख्या के गश्ती दल को 20,000 फीट की ऊंचाई पर “ओपी हिल” नामक एक स्थान पर अधिकार करने का आदेश दिया गया। सिग्नल प्लाटून के नायक राम मेहर सिंह स्वेच्छा से उस गश्ती दल में सम्मिलित हो गए। शत्रु के तीव्र मोर्टार और मशीन गन फायर के होते हुए भी, गश्ती दल ने ऊंचाई पर एक शंक्वाकार चट्टान पर अधिकार कर लिया।
नायक राम मेहर सिंह ने पोस्ट को बटालियन मुख्यालय के साथ संचार बनाए रखने के लिए त्वरित एक टेलीफोन लाइन बिछाई। शत्रु आर्टिलरी की भीषण गोला वृष्टि के कारण प्रायः टेलीफोन लाइन के तार टूट जाते थे और संचार बाधित हो जाता था। नायक राम मेहर सिंह ने अपनी व्यक्तिगत सुरक्षा पर ध्यान नहीं देते हुए सदैव निर्बाध संचार सुनिश्चित किया। शत्रु के फायर के सीधे संपर्क में आते हुए भी, दिन-रात, वह क्षतिग्रस्त तारों को सुधारने के लिए दौड़ पड़ते थे।
5 जुलाई 1984 को दिन के 11:00 बजे, शत्रु ने मोर्टार और मीडियम मशीन गन के साथ केबल को तोड़ते हुए चौकी पर धावा बोल दिया। एक बार पुनः, व्यक्तिगत सुरक्षा की घोर अवहेलना करते हुए, नायक राम मेहर सिंह क्षतिग्रस्त केबल सुधारने निकल पड़े। इस प्रक्रिया में, उनके कंधे में शत्रु मशीन गन की गोलियां लगने से वह गंभीर रूप से घायल हो गए।
तो भी, नायक राम मेहर सिंह ने, जहां से मशीन गन की फायरिंग हुई, उस शत्रु के बंकर को देख लिया। यद्यपि, उनका अत्यधिक रक्त बह रहा था, तो भी वह रेंगते हुए वापस आए, गश्ती दल की मीडियम मशीन गन को संभाला और निरंतर फायरिंग कर शत्रु के मशीन गन बंकर को शांत कर दिया।
नायक राम मेहर सिंह इंफेंट्री के सैनिक द्वारा सिग्नलमैन और मशीन गनर की दोहरी भूमिका निर्वहन करने का एक आदर्श उदाहरण थे। उन्हें “शौर्य चक्र” से सम्मानित किया गया। वह सैन्य सेवा के साथ-साथ शिक्षा प्राप्त करते रहे और उन्होंने स्नातक की परीक्षा उत्तीर्ण की। 28 वर्षों की गौरवमई सेवा के पश्चात, वर्ष 2004 में वह मानद कैप्टन के रूप में सेवानिवृत्त हुए थे।
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