आज जब हम अपने घरों में सुरक्षित बैठे चाय की चुस्की ले रहे हैं, तब भी कोई न कोई जवान अपनी जान की परवाह किए बिना देश की रक्षा के लिए सीमा पर डटा रहता है। ऐसी ही एक शख्सियत थे Lance Naik Preetpal Singh – एक 28 वर्षीय युवा, जिन्होंने अपनी जिंदगी का आखिरी सांस लेते हुए भी दुश्मनों को करारा जवाब दिया। पंजाब के लुधियाना जिले के मनूपुर गांव से ताल्लुक रखने वाले Lance Naik Preetpal Singh सिख लाइट इन्फैंट्री रेजिमेंट के लांस नायक थे, और हाल ही में 19 राष्ट्र्रीय राइफल्स के साथ जम्मू-कश्मीर में तैनात थे। उनकी शहादत की कहानी न सिर्फ हिम्मत की मिसाल है, बल्कि एक नवविवाहित पति, भाई और बेटे की भावुक दास्तान भी। आइए, आज हम उनकी जिंदगी के कुछ अनसुने पहलुओं को करीब से जानें।
बचपन की मिट्टी से सेना की वर्दी तक

Lance Naik Preetpal Singh का जन्म 1996 में पंजाब के लुधियाना जिले के शांतिपूर्ण मनूपुर गांव में हुआ था। पंजाब की वो धरती, जहां हर गली-नुक्कड़ पर शहीदों की कहानियां गूंजती हैं, प्रीतपाल को बचपन से ही वीरता की सीख देती रही। उनके पिता हरबंस सिंह एक साधारण किसान थे, जो परिवार को प्यार और मेहनत से संभालते थे। मां की कमी तो महसूस होती ही होगी, लेकिन घर का हर सदस्य Lance Naik Preetpal Singh के सपनों का साथी था। स्कूल के दिनों से ही प्रीतपाल को आर्मी जॉइन करने का जुनून सवार था। पढ़ाई पूरी करने के बाद, 2015 में उनका सपना सच हो गया। सिख लाइट इन्फैंट्री में भर्ती होकर उन्होंने अपनी ट्रेनिंग शुरू की।
सेना की कठोर ट्रेनिंग ने Lance Naik Preetpal Singh को एक मजबूत योद्धा बना दिया। शुरुआती सालों में उन्होंने कई चुनौतीपूर्ण इलाकों में तैनाती संभाली, जहां ठंड, ऊंचाई और दुश्मन की साजिशें आम बातें थीं। लेकिन Lance Naik Preetpal Singh कभी हारते नहीं थे। उनकी डायरी में लिखा मिला है – “हर सुबह एक नई जंग है, लेकिन जीत हमारी है।” दस साल की सेवा में उन्होंने कई ऑपरेशन्स में हिस्सा लिया, जहां उनकी बहादुरी ने साथी जवानों को प्रेरित किया।
वैवाहिक जीवन की शुरुआत और कश्मीर की तैनाती
फरवरी 2025 में Lance Naik Preetpal Singh की जिंदगी में एक नया मोड़ आया। 25 फरवरी को उन्होंने मनप्रीत कौर से शादी की। शादी के सिर्फ पांच महीने बाद ही उन्हें 19 राष्ट्र्रीय राइफल्स के साथ जम्मू-कश्मीर के कुलगाम जिले में तैनात कर दिया गया। राष्ट्र्रीय राइफल्स यूनिट काउंटर-इंसर्जेंसी ऑपरेशन्स के लिए मशहूर है, जहां हर दिन मौत से जंग लड़नी पड़ती है। Lance Naik Preetpal Singh का ग्रुप लोकल कम्युनिटी को प्रोटेक्ट करने और टेररिस्ट्स को नेस्तनाबूद करने का काम कर रहा था।
शहादत का वो दिन: 8 अगस्त 2025

8 अगस्त 2025 को जम्मू-कश्मीर के कुलगाम जिले के अखल खुलसन फॉरेस्ट में ‘ऑपरेशन अखाल’ चल रहा था। इंटेलिजेंस रिपोर्ट्स से पता चला था कि कुछ हथियारबंद मिलिटेंट्स एक बड़े हमले की प्लानिंग कर रहे थे। Lance Naik Preetpal Singh एक असॉल्ट टीम का हिस्सा थे, जो कॉर्डन एंड सर्च ऑपरेशन (CASO) चला रही थी। जंगल की घनी झाड़ियों में घुसते ही दुश्मनों ने फायरिंग और ग्रेनेड्स से हमला बोल दिया।
Lance Naik Preetpal Singh ने बिना पीछे हटे जवाब दिया। उन्होंने एक आतंकवादी को मार गिराया, जो ऑपरेशन की शुरुआत में ही दुश्मनों को डराने के लिए काफी था। लेकिन इंटेंस फायरिंग के दौरान एक गोली उनके सिर में लग गई। वो मौके पर ही शहीद हो गए। उसी ऑपरेशन में सिपाही हरमिंदर सिंह भी शहीद हुए। उनकी बहादुरी ने मिलिटेंट्स की साजिश को नाकाम कर दिया, वरना कुलगाम में बड़ी आतंकवादी घटना हो जाती । ये एनकाउंटर नौ दिनों तक चला |
गांव में उनका अंतिम संस्कार पूरे सैन्य सम्मान के साथ किया गया। हजारों लोग सलामी देने पहुंचे|
परिवार की पीड़ा और विरासत
Lance Naik Preetpal Singh के पीछे एक ऐसा परिवार छूट गया, जो उनकी ताकत था। पिता हरबंस सिंह, जो अब अकेले बूढ़े हो चुके हैं, कहते हैं, “मेरा बेटा हमेशा कहा करता था कि देश पहले है।” बड़ी बहन कुलदीप कौर, बड़ा भाई हरप्रीत सिंह और छोटा भाई गुरदीप सिंह – सबकी आंखों में आंसू हैं, लेकिन सीने में गर्व। मनप्रीत अब विधवा हो गईं, लेकिन वो कहती हैं, “प्रीतपाल की यादें मेरी जिंदगी हैं।”
Lance Naik Preetpal Singh की कहानी हमें सिखाती है कि सच्ची वीरता क्या होती है। वो न सिर्फ एक सिपाही थे, बल्कि एक इंसान भी – जो हंसते-खेलते परिवार के साथ समय बिताते थे, लेकिन ड्यूटी की घड़ी आते ही सब कुछ भुला देते थे। आज, जब कश्मीर में शांति की कोशिशें चल रही हैं, प्रीतपाल जैसे शहीदों की कुर्बानी हमें याद दिलाती है कि आजादी आसान नहीं आती।

