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Maha Veer Chakra

महावीर चक्र कर्नल बिकुमल्ला संतोष बाबू

—— बलिदान दिवस -शौर्यनमन—–
कर्नल बिकुमल्ला संतोष बाबू
IC-64405M
13-02-1983 – 15-06-2020
महावीर चक्र (मरणोपरांत)
वीरांगना – श्रीमती संतोषी
यूनिट – 16 बिहार रेजिमेंट
ऑपरेशन स्नो लेपर्ड 2020
कर्नल बिकुमल्ला संतोष बाबू का जन्म13 फरवरी1983 को हुआ था। वह तेलंगाना के सूर्यापेट के मूल निवासी थे। 27 नवंबर 2000 को, वह राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) में सम्मिलित हुए और वर्ष 2004 में वह भारतीय सैन्य अकादमी में चले गए। 10 दिसंबर 2004 को उन्हें भारतीय सेना की बिहार रेजिमेंट की 16 बटालियन में लेफ्टिनेंट के रूप में कमीशन दिया गया था।
10 दिसंबर 2006 को वह कैप्टन के पद पर, तत्पश्चात 10 दिसंबर 2010 को मेजर के पद पर पदोन्नत हुए थे। 10 दिसंबर 2017 को वह लेफ्टिनेंट कर्नल के पद पर पदोन्नत हुए थे।‌ 2 दिसंबर 2019 को उन्होंने 16 बिहार की कमान संभाली थी। फरवरी 2020 में उन्हें कर्नल के पद पर पदोन्नत किया गया था।
जून 2020 के आरंभ से ही लेह से दौलत बेग ओल्डी को जाने वाली सड़क के निकट गलवान घाटी में निर्माण कार्य के कारण LAC पर तनाव बढ़ रहा था। गलवान नदी पर अक्साई चिन क्षेत्र में एक पुल के निर्माण पर चीनियों को गंभीर आपत्ति थी। यह क्षेत्र भारत के साथ-साथ चीन के लिए भी सामरिक रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि यह क्षेत्र लेह से दौलत बेग ओल्डी तक की सड़क पर प्रभावी है, जो भारत के लिए अत्यंत सैन्य महत्व की हवाई पट्टी थी। तनाव नियंत्रण के लिए दोनों पक्षों के वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों के मध्य अनेक समय वार्ता हुई।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए 15/16 जून 2020 की रात्रि को, क्षेत्र में तैनात 16 बिहार बटालियन के कमांडिंग ऑफिसर कर्नल संतोष बाबू ने वार्ता का नेतृत्व करने का निर्णय किया। किंतु, वार्ता के समय हुई कहासुनी से हाथापाई हो गई। शीघ्र ही यह हाथापाई हिंसक झड़प में परिवर्तित गई और चीनी सैनिकों ने कर्नल संतोष बाबू और उनके सैनिकों पर घातक कल्बों और छड़ों से आक्रमण कर दिया। भारतीय सैनिकों की संख्या अति अल्प थी और चीनी सैनिक पूर्व से ही आक्रमण के लिए तत्पर प्रतीत हो रहे थे।
15 जून 2020 को, कर्नल संतोष बाबू को पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में एक अवलोकन चौकी (OBSERVATION POST) स्थापित करने का कार्य सौंपा गया था। एक ठोस योजना के आधार पर उन्होंने इस कार्य को सफलतापूर्वक निष्पादित किया। इस चौकी पर पकड़ बनाए रखने में उनके कॉलम को चीनियों के कड़े प्रतिरोध का सामना करना पड़ा, जिन्होंने घातक और धारदार शस्त्रों का प्रयोग करते हुए आक्रमण किया और आसपास की ऊंचाइयों से भारी पत्थर फेंके।
शत्रु सैनिकों की हिंसक और आक्रामक कार्रवाई से अभीत, अधिकारी ने भारतीय सैनिकों को पीछे धकेलने के शत्रु के प्रयासों का प्रतिरोध किया। गंभीर रूप से घायल होते हुए भी, उन्होंने आगे होकर नेतृत्व किया और शत्रु के कुटिल आक्रमण को अपनी स्थिति में आने से रोक दिया।
कर्नल संतोष बाबू ने अपनी अंतिम श्वास तक शत्रु के आक्रमण का विरोध किया और अपने सैनिकों को डटे रहने के लिए प्रेरित किया। उन्हें मरणोपरांत “महावीर चक्र” से सम्मानित किया गया।
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