—— बलिदान दिवस -शौर्यनमन—–
नायब सूबेदार नुदुराम सोरेन
JC561645F
02-04-1977 – 15-06-2020
वीर चक्र (मरणोपरांत)
वीरांगना – श्रीमती लक्ष्मिनी
यूनिट – 16 बिहार रेजिमेंट
ऑपरेशन स्नो लेपर्ड 2020
नायब सूबेदार नुदुराम सोरेन का जन्म 15 अप्रैल 1977 को ओडिशा के मयूरभंज जिले के बड़ाचमपौड़ा गांव में हुआ था। 27 अप्रैल 1996 को वह भारतीय सेना की बिहार रेजिमेंट में रंगरूट के रूप में भर्ती हुए थे। प्रशिक्षण के पश्चात 27 मार्च 1997 को उन्हें 16 बिहार बटालियन में सिपाही के पद पर नियुक्त किया गया था।
जून 2020 के आरंभ से ही लेह से दौलत बेग ओल्डी को जाने वाली सड़क के निकट गलवान घाटी में निर्माण कार्य के कारण LAC पर तनाव बढ़ रहा था। गलवान नदी पर अक्साई चिन क्षेत्र में एक पुल के निर्माण पर चीनियों को गंभीर आपत्ति थी। यह क्षेत्र भारत के साथ-साथ चीन के लिए भी सामरिक रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि यह क्षेत्र लेह से दौलत बेग ओल्डी तक की सड़क पर प्रभावी है, जो भारत के लिए अत्यंत सैन्य महत्व की हवाई पट्टी थी। तनाव नियंत्रण के लिए दोनों पक्षों के वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों के मध्य अनेक समय वार्ता हुई।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए 15/16 जून 2020 की रात्रि को, क्षेत्र में तैनात 16 बिहार बटालियन के कमांडिंग ऑफिसर कर्नल संतोष बाबू ने वार्ता का नेतृत्व करने का निर्णय किया। किंतु, वार्ता के समय हुई कहासुनी से हाथापाई हो गई। शीघ्र ही यह हाथापाई हिंसक झड़प में परिवर्तित गई और चीनी सैनिकों ने कर्नल संतोष बाबू और उनके सैनिकों पर घातक कल्बों और छड़ों से आक्रमण कर दिया। भारतीय सैनिकों की संख्या अति अल्प थी और चीनी सैनिक पूर्व से ही आक्रमण के लिए तत्पर प्रतीत हो रहे थे।
नायब सूबेदार (Driver Mechanical Transport Department) नुदुराम सोरेन पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में ऑपरेशन स्नो लेपर्ड में भाग ले रहे थे। 15 जून 2020 को, उन्होंने भारतीय सैनिकों को गलवान घाटी में एक ऑब्जर्वेशन पोस्ट स्थापित करने से रोकने के शत्रु के प्रयासों का विरोध किया।
उनके कॉलम ने शत्रु के भारतीय सैनिकों को पीछे धकेलने के प्रयासों का प्रबल प्रतिरोध किया। झड़प के समक्ष निडर, और अडिग नायक, सूबेदार सोरेन को शत्रु द्वारा घातक धारदार शस्त्रों आसपास की ऊंचाईयों से पत्थरों से भी निशाना बनाया गया।
गंभीर रूप से घायल होने और शत्रु के अनुपात में संख्या बल में अल्प होते हुए भी वह पीछे नहीं हटे। वह सबसे आगे डटे रहे। उन्होंने प्रचंड साहस का परिचय दिया। आमने-सामने के युद्ध में, घातक घाव होते हुए भी दृढ़ संकल्प के साथ वह अंतिम श्वास तक जूझते रहे।
नायब सूबेदार सोरेन के वीरतापूर्ण कार्यों के परिणामस्वरूप सकारात्मक प्रतिक्रिया हुई जिसने शत्रु को विस्मित कर दिया, भारतीय सैनिकों के प्रतिशोध की गति तेज हुई। उन्होंने अपने सैनिकों को चौकी पर डटे रहने के लिए प्रेरित किया। नायब सूबेदार सोरेन को उनके अनुकरणीय नेतृत्व, साहस और दृढ़ संकल्प के लिए मरणोपरांत “वीर चक्र” से सम्मानित किया गया।
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वीर चक्र नायब सूबेदार नुदुराम सोरेन

