—— शौर्य दिवस -शौर्यनमन—–
हवलदार टी. के. गोपाल कुरूप
वीर चक्र
यूनिट – 1 मद्रास रेजिमेंट
टिथवाल का संग्राम
भारत-पाक युद्ध 1947-48
हवलदार टी.के. गोपाल कुरूप का जन्म ब्रिटिश भारत में 15 सितंबर 1913 को श्री पी. के. नांबियार के घर में हुआ था। वह कुन्नूर के निवासी थे और भारतीय सेना की मद्रास रेजिमेंट की 1 बटालियन में सेवारत थे। 1947-48 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में वह अपनी बटालियन के साथ कश्मीर में तैनात थे।
11 जून 1948 को, जम्मू-कश्मीर में RING CONTOUR पर तैनात 1 मद्रास बटालियन की “A” कंपनी पिकेट पर शत्रु द्वारा पाकिस्तानी सैनिकों और कबाइलियों की संयुक्त व लगभग 300 की प्रबल संख्या में आक्रमण किया गया। भोर में 5:45 बजे हुए आक्रमण में शत्रु ने सर्वप्रथम मोर्टार दाग कर आक्रमण आरंभ किया। 90 मिनट में शत्रु ने लगभग 70 से अधिक मोर्टार गोले दागे।
इस गोला वृष्टि के साथ घने कुहासे की आड़ में, शत्रु पिकेट के अल्पतम 30 गज तक निकट पहुंच गया था। शत्रु के एक अन्य समूह ने कंपनी पिकेट के निकट एक नाले में स्थितियां ले ली और निरंतर अल्लाह हू अकबर और पाकिस्तान जिंदाबाद जैसे घोष कर रहे थे।
हवलदार टी. के. गोपाल कुरूप “A” कंपनी में प्लाटून हवलदार थे, प्रथम आक्रमण में, उनके सेक्शन कमांडर नायक राजू को आघात लगा और वे घायल हो गए। भीषण गोला वृष्टि के होते हुए भी, उन्होंने एकाकी ही नायक राजू को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया और उनकी लाइट मशीन गन का संचालन किया। इस लाइट मशीन गन से उन्होंने शत्रु के प्रत्येक आक्रमण को विफल कर दिया। अंतत: वह बंकर गिर गया किंतु वह एक छिद्र बनाने में सफल रहे, जहां से वे शत्रु पर फायरिंग करते रहे।
इसके पश्चात उन्होंने बंकर छोड़ दिया और संगीनों के साथ उनकी स्थिति पर आगे बढ़ रहे, शत्रु पर हथगोले फेंकना आरंभ कर दिया। जब उन्होंने सारे हथगोले समाप्त कर दिए तो वह पुनः अपनी स्थिति पर लौट आए और पुनः अपनी लाइट मशीन गन से शत्रु पर फायरिंग आरंभ कर दी। जिससे शत्रु को गंभीर क्षति हुई, उसे पीछे हटने पर विवश होना पड़ा और इस प्रकार हवलदार गोपाल कुरूप अपनी स्थिति के रक्षण में सफल रहे।
इस युद्ध में हवलदार गोपाल कुरूप ने अदम्य साहस और कर्तव्यपरायणता का परिचय दिया। यद्यपि आक्रमण के समय उनका जीवन गंभीर संकट में था, तो भी उन्होंने अति दृढ़ संकल्प और धैर्य के साथ आक्रमण का प्रतिकार किया। उन्हें “वीर चक्र” से सम्मानित किया गया। वह माननीय नायब सूबेदार के रूप में सेवानिवृत्त हुए थे।
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